‘अमिताभ पर तो कोई भी फिदा हो सकता है’ – ज़ीनत

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ZMAG80S

 

 

मायापुरी अंक 43,1975

एक्चुअली, न तो मुझे किसी पत्रकार से कोई गिला है, और न ही फिल्म पत्रिकाओं से मेरा झगड़ा लेकिन मुश्किल यह है कि पोली पत्रकारिता का वह रूप मुझें कतई नहीं भाता जिसमें किसी कलाकार के परिवार अथवा माता-पिता के बारे में बक-बक लिखी जाये। मैं सोचती हूं कि इतनी घटिया किस्म की पत्रकारिता करने वालों को लेखक कहलाने का कोई अधिकार नही बल्कि उन्हें तो बंदूक से उड़ा देना चाहिये।

यह जीनत कह रही थीं, जब उनसे चंद सवाल पूछने के लिये हाल ही में उनकी फिल्म डॉन के सैट पर मैं पहुंचा था। उस रोज नायक अभिताम बच्चन की शूटिंग नही थी, और इसे मैंने शुभ शगुन ही समझा, चूंकि अमित की कुछ आदते हैं कि वह ना तो खुद ही पत्रकारों को अधिक कुछ सम्मान देना पसंद करते हैं, तथा न ही अन्य किसी कलाकार को ही ऐसा करने देना चाहते हैं।

खैर, पीली पत्रकारिता का सिलसिला तो जीनत ने अपने आप ही छेड़ दिया था, कुछ गुस्से में, कुछ बात करने की खातिर लेकिन मैं तो उनसे कुछ पर्सनल बातें पूछने आया था। सो ज्यों ही उन्होंने शान से अपना “रोथमैंस” सिगरेट का डिब्बा मेरी ओर बढ़ाते हुए अपनी चुनी हुई सिगरेट को लाइटर से सुलगाया, मैंने कह दिया, “जीनत, अब आपके पास इतनी फिल्में हैं, और आपकी एक-दो फिल्में अब तक हिट भी हो चुकी हैं, लेकिन लोग आपको अच्छी एक्ट्रेस फिर भी मानने को राजी नही। क्या बात है?

मेरी यह बात जीनत को नही भायी वो तबाक से बोलीं,

मैं इस बात से एकदम इंकार करती हूं कि मैं एक अच्छी एक्ट्रेस नही हूं। क्या अभी तक मैंने केवल एक ही टाईप के रोल किये हैं? क्या मैं सिर्फ एक ही भाव, रोमांस दुख, या खुशी को ही निभाती आई हूं? मैं दिल लगाकर मेहनत से एक्टिंग करती आई हूं, तथा आज इसीलिए मुझें सफलता प्राप्त हुई है।

वह तो ठीक है, लेकिन समझा तो यूं जाता है कि आपकी सफलता का कारण असल में आपका निर्वस्त्र होकर स्क्रीन पर आना है?” मैंने साफ-साफ कहा।

वॉट नौनसैंस!” जीनत बोलीं। अगर सिर्फ कपड़े उतार देने से एक अभिनेत्री को पूर्ण सफलता मिलती, तो आज हमारी इंडस्ट्री में हीरोइनंस की भरमार हो गई होती। तब हेलन, पद्मा खन्ना और बिंदु हीरोइन ही क्यों न बन गयी?”

पर इतना तो आप मानती हैं कि दर्शकों को आपने अपनी कला के साथ-साथ अपने जिस्म की भी खूब झलकियां दिखाई हैं?”

क्या मॉर्डन कपड़ें पहनना या बिकनी में उतरना अपने जिस्म की नुमाईश करना है? इसके अलावा कुछ नहीं? मैंने अपनी फिल्मों में हर तरह की पोशाक पहनी हैं, आप लोग तब कुछ नही कहते जब जीनत अमान छ: गज की साड़ी में लिपटी होती है? मेरा फिगर हर तरह के कपड़ों के लिये आइडियल है, और मैंने हमेशा फिल्म की कहानी और अपना रोल देखते हुए ही जिस्म दिखाने वाले कपड़े पहनना मंजूर किया है। और फिर मुझसे ज्यादा जिस्म दिखाने वाली स्टार्स भी तो हैं?”

हां, यह बात तो माननीं पड़ेगी, मैंने मन ही मन सोचा ज़ीनत से मैंने कहा, चलो रहने दो, दूसरी बात करते हैं। अच्छा तो यह बतायें कि आपकी परवीन बॉबी से क्यों नहीं बनती ?”

ज़ीनत पहले तो चुप रहीं, फिर जोर से हंस पड़ी बड़े तीखे सवाल लेकर आये हो आज तो, मगर यह आप से किसने कह दिया कि मेरी और परवीन की बनती नही?”

यही नही, कहा तो यह भी जाता है कि आपको उसके कम्पीटीशन का डर है क्योंकि वह आपसे बेहतरीन अदाकारा हैं, मैंने ज़ीनत से आंखे बचाते हुए कह दिया।

कम्पटीशन तो हर लाईन में ही होता है, चाहे दफ्तर की नौकरी हो या राजनीति। मगर मुझें परवीन तो क्या, किसी भी एक्ट्रेस का डर नही है। मैं अच्छी तरह समझती हूं कि मैं क्या सकती हूं और क्या नही। जहां तक किसी दूसरी अदाकारा से मेरी तुलना का सवाल है, तो यह हो सकता है कि यदि कोई किसी फिल्म में ज्यादा अच्छा काम करे, तो कोई किसी दूसरी फिल्म में, इसमें ईर्ष्या या झगड़ा करने की तो कोई बात हो नही है इट इज ऑल ए क्वेशचन ऑफ टेलेन्ट…

आये दिन जो शत्रुघ्न के साथ आपकी हर गहरी दोस्ती हो जाने की अफवाहें सुनने में आ रही हैं, क्या उनके बारे में आप कुछ कहना चाहेंगी?”

ज़ीनत मुस्कुराई जब आप खुद उन्हें अफवाहें कह रहे हैं, तो उन पर विश्वास करने की क्या जरूरत है?”

हंसते हुए मैंने अपनी भूल कबूल की लेकिन अपना प्रश्न फिर दोहराया। मुझें आपने सवाल का जवाब नहीं दिया?”

धुएं का गुजार छोड़ती हुई ज़ीनत बोलीं, और शायद मैं कोई खास जवाब देना चाहती भी नही कारण यह कि ऐसे मामले में न तो चुप रह कर ही कुछ फायदा होता है, और न ही बात स्पष्ट करके। एक बार पहले भी ऐसी अफवाहें उड़ी थीं, तब भी मैंने न जाने क्या-क्या पढ़ा, सुना। मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि शत्रु से मेरी कोई अनबन नही है।“

एक और प्रश्न बस क्या अभिताम बच्चन से आपकी दोस्ती देव साहब से भी अधिक हो गई है?”

अमित एक बहुत ही मंझे हए कलाकार हैं तथा एक हैंडसम पुरूष हैं, उन पर तो कोई भी फिदा हो सकता है। मगर इस दोस्ती में देव साहब को घसीटने की कोशिश करना पागलपन है। देव साहब के साथ जो मेरे तालुकात कर रहे हैं वह आज भी हैं, उन्हें किसी के साथ दोहराया नही जा सकता।“

और तभी हंसते हुए डॉन के युवा, लम्बे बालों वाले डायरेक्टर चन्द्र बारोट मैकअप रूम में ज़ीनत को बुलाने आ गयें, और मैं भी अपनी बातचीत समाप्त समझ कर स्टूडियो से बाहर आ गया।


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Mayapuri

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