“नर्तकियों की डोर तो नृत्य-निर्देशकों के हाथ में होती है!” मीना.टी.

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मायापुरी अंक 43,1975

जिस तरह मुमताज और मल्लिका दो बहनें फिल्मों में आने के लिए लालयित थीं, और बड़े कठिन परिश्रम के बाद मुमताज को सफलता मिल सकी और मल्लिका ने अपनी असफलता के बाद दारा सिंह के छोटे भाई रणधावा से ब्याह रचाकर घर बसा लिया।

इसी तरह दो बहनें और है जिन्होंने फिल्मों में प्रवेश के लिए काफी हाथ-पैर मारे। एक है जयश्री टी. और दूसरी मीना टी. अभिनेत्री बहनों की इस जोड़ी में से जयश्री टी. को तो अच्छी खासी सफलता मिल गयी, लेकिन मीना टी. अभी तक संघर्ष के मैदान में जूझ रही हैं।

जब मेरी मुलाकात मीना टी.से हुई तो मैंने उनसे इंटरव्यू का समय मांगा, कहने लगीं,

आप जिस दिन चाहें प्रात: दस बजे के पहले घर चले आईये मैं अक्सर घर पर ही मिलती हूं।

और मैंने सोमवार को प्रात: 9 बजे का समय तय किया।

अगली मुलाकात के लिए मैं मीना टी. के फ्लैट सल्मौना विला, जो नार्थ एवेन्यु रोड, सांताक्रूज (वेस्ट) में बसा हुआ है, जा पहुंचा।

मीना टी. का घर मेरे लिए अचरज का कारण बन गया, क्योंकि वहां पहुंचकर मुझें यह महसूस ही नही हुआ कि मैं किसी अभिनेत्री के घर पर हूं।

मीना टी. ने मुस्कुराकर स्वागत किया मैंने तुरंत कहा,

अब आप लड़ने के लिए तैयार हो जाइए।

यह सुन कर मीना बोलीं,

मैं तो कब से तैयार हूं पूछिए..

सचमुच मीना इंटरव्यू के लिए तैयार थीं, सबसे पहले मैंने पूछा,

यह मीना नाम तो समझ में आया, लेकिन आप यह ‘टी’ शब्द क्यों लगाती हैं।

इस पर खिलखिलाकर हंसते हुए मीना बोलीं,

मुझें मालूम था कि आपका पहला सवाल यही होगा। मीना मेरा नाम है और तलपटे सरनेम। इसे छोटा करके सिर्फ टी. रखा लिया है। मुझें एक मजेदार चुटकुला याद आ रहा है। किसी पत्रिका में पढ़ा था।

एक व्यक्ति ने किसी से पूछा, आपको कौन-सी टी. पसंद है जैसे ब्रोक बांड टी, ताजमहल टी.. वह व्यक्ति तुरंत बोला, मुझें तो भाई जय श्री टी. पसंद है,

चुटकुला सुनकर मुझे भी हंसी आ गयी। साथ ही वह भी पता चल गया कि मीना मस्त स्वभाव की लड़की नही हैं, हालांकि मीना ने चुटकला सुनाया लेकिन सुनाने के बाद वह खामोश हो गयीं। मैंने पूछा,

शायद आपको खामोश रहना अधिक पसंद है?”

मीना बोलीं,

जी हां, ज्यादातर मैं खामोश और गंभीर रहना पसंद करती हूं। और आपको आश्चर्य होगा कि मेरी छोटी बहन जय श्री टी. बहुत ज्यादा चंचल और शरारती हैं

फिल्मों में आपका प्रवेश कब हुआ? और फिल्मों में आने की इच्छा आप जैसी सीरियस लड़की को कैसे हो गयी?

बात दरअसल यह है कि हमें यानि मुझे और जय श्री को बचपन से ही अभिनय का बहुत जबरदस्त शौक रहा है। हम दोनों ही शम्मी कपूर की फैन हैं। बचपन में शम्मी कपूर की लगभग सभी फिल्में देखते और उनके अभिनय को घर में नकल करते। अक्सर जय श्री हीरो शम्मी कपूर बनती और मैं हीरोइन बड़ा मजा आता था। धीरे-धीरे शौक बढ़ता रहा और जब मैंने अपनी हाई स्कूल की परीक्षा पास की तो उसके बाद फिल्मों में काम करने के कई ऑफर आये। मैंने सोचा पढ़कर नौकरी तो करना नही है इसलिए यह काम भी बुरा नही है। इसके साथ ही अभिनय हम दोनों बहनों को विरासत में मिला है। हमारे पिताजी मराठी स्टेज के जाने पहचाने कलाकार हैं। अभिनय का यह विशेष गुण हमें उन्हीं से मिला है। अभिनय के साथ-साथ हमने नृत्य की भी विशेष शिक्षा प्राप्त की है और अब नृत्य के साथ-साथ मैंने कई फिल्मों में अभिनय भी किया है।

एक प्रश्न मुझें पूछना तो नहीं चाहिए, लेकिन पूछ रहा हूं..

बीच मैं मीना ने कहा,

आप फिक्र मत कीजिए, जो पूछना है, नि:संकोच पूछिए?

मैंने पूछा,

क्या वजह है कि आपको उतनी सफलता नही मिली, जितनी कि जय श्री. को मिली है। जबकि आप दोनों में किसी बात को कमी नही है। आप भी अच्छा नृत्य करती हैं, साथ ही अभिनय भी?

कुछ सोचते हुए मीना बोलीं,

इसका क्या जवाब हो सकता है। मेरे ख्याल से यह सब किस्मत की बात है। उसे अच्छी फिल्में मिली और वह हिट हो गयी, आज उसके पास ढेर सारी फिल्में हैं। मेरे लिए इससे अच्छी बात और क्या बात होगी कि मेरी प्यारी-सी छोटी बहन आज अच्छी नर्तकियों में गिनी जाती है और इस मंजिल तक पहुंचने के उसने परिश्रम भी बहुत किया है। आपने यह बात बताई है, वरना मैंने आज तक कभी ऐसा सोचा भी नही।

अभिनय की दृष्टि से आप नृत्य प्रधान भूमिका को अधिक सर्वश्रेष्ठ मानती हैं या चरित्र भूमिकाओं या सहनायिका की भूमिका को? यह मेरा अगल सवाल था।

मीना फिर गंभीर हो गयीं हालांकि इंटरव्यू की शुरूआत में वह काफी हंसकर बात कर रही थीं। शायद इसका कारण यह है कि वह बेकार की बातों पर बेबात में हंसना पसंद नही करतीं। मेरे सवाल का उत्तर देते हुए मीना ने कहा,

मेरी नज़र में भूमिका चाहे कैसी भी हो। अगर उसमें एक्टिंग का स्कोप है तो वह सर्वश्रेष्ठ है अन्यथा बेकार फिर चाहे वह नायिका की ही भूमिका क्यों न हो। सिर्फ पर्दे पर नज़र आते रहने से कब किसका भला हुआ है? पूरी फिल्म में काम करने की अपेक्षा दो मिनट का रोल ज्यादा बेहतर है।

आप किस तरह की भूमिकांए पसंद करती हैं?

आपको मैंने अभी बताया ना कि रोल में स्कोप हो तो अच्छा लगता है। मैं किसी खास किस्म की भूमिका करने में उतनी इच्छुक नही, जितनी कि स्कोप वाले रोल की इच्छुक हूं। फिर चाहे वह भूमिका खलनायिका की हो या कोई छोटी-सी गंभीर भूमिका।

आपने तो नृत्य में विशेष शिक्षा पाई है, क्या आप बतायेंगी कि हमारी फिल्मों में अश्लीलता और कामुक नृत्यों की भरमार उचित है या अनुचित?

मीना टी. बोली,

इस बारे में कुछ दावे के साथ कह पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि हमारे फिल्मी नृत्य अधिकतर पाश्चात्य संगीत से प्रभावित होते हैं और ऐसे नृत्यों में नर्तकी साड़ी पहनकर तो नाचने से रही और फिर कहानी की मांग, सिच्युएशन, और भी कई कारण बताये जाते हैं इसलिए यह कहना बहुत मुश्किल है कि नृत्य उचित है या अनुचित।

फिल्मी नृत्यों के बारे में आप कुछ कहेंगी?

हमारे फिल्मी नृत्य, नृत्य-निर्देशक की इच्छानुसार ही तैयार किये जाते हैं, वे जिस तरह को भाव-मुद्गाएं, स्टेप्स और लचकना, झटकना आदि बताते हैं, उसी तरह नर्तकियां या अभिनेत्रियों को उनका आदेश मानते हुए करना पड़ता है और इसलिए कभी-कभी आपने देखा होगा कि कई बार एक ही नर्तकी अभिनेत्री एक फिल्म में बहुत शानदार नृत्य प्रस्तुत करती है और अगली फिल्म में उसी नर्तकी या अभिनेत्री का नृत्य अलग होता है, उसके लिए दर्शक दोषी उसे ही ठहराते हैं, क्योंकि उन्हें क्या मालूम कि वे तो सिर्फ कठपुतलियां हैं और उनके धागे नृत्य-निर्देशकों के हाथ में होते हैं।

लेकिन जब भी नृत्य हिट होता है तो नर्तकी या अभिनेत्री की ही तो तारीफ होती है

सुनकर मीना टी. बोलीं,

जी हा, यह भी ठीक है

मीना पुन: खामोश हुईं जो मैंने अगला प्रश्न पूछा,

फिल्म-जगत को कौन-सी नर्तकी आपको अत्यधिक पसंद है?

सभी नर्तकियों अपनी अपसी जगह ठीक हैं और जहां तक मैं सोचती हूं, हर नर्तकी अपने-अपने नृत्य के लिए बहुत मेहनत करती है। यह बात अलग है कि कोई हिट हो जाती है और कोई बहुत पिछड़ जाती है। हमारे यहां यानि फिल्म इंडस्ट्री का दृष्टिकोण बिल्कुल ही अनोखा है अगर फिल्म हिट हो जाती है तो सब के सब निर्माता उसके पीछे आगे दौड़ते है और दुर्भाग्य से फिल्म फ्लॉप हो जाये तो बेचारी नर्तकी को कई तरह से तकलीफों का सामना करना पड़ता है।

क्या एक नर्तकी को फिल्म-जगत में उतना ही सम्मान मिलता है जितना कि एक अभिनेत्री को मिलता है?

क्यों नही। हमारे यहां कई ऐसी नर्तकियां हैं, जिन्हें बहुत सम्मान मिला है। आपने मशहूर नर्तकी कुक्कू का नाम सुना होगा। कुक्कू की सफलता ने आकाश को छू लिया था। कहा जाता है कि थियेटरों में फिल्म रिलीज़ होने के बाद अगर वह ठीक तरह से नही चल पाती थीं तो विशेष रूप से बाद में कुक्कू का नृत्य फिल्माकर फिल्मों में किया जाता था। उस जमाने में सारा हिंदुस्तान कुक्कू का दीवाना था।

क्या एक नर्तकी सफल-अभिनेत्री बन सकती है?

क्यों नही। इसके कई उदाहरण हैं। हमारी कई हीरोइनें नृत्य में प्रवीण होने की वजह से ही फिल्मों में ली गयी हैं जैसे वैजयन्तीमाला, वहीदा रहमान, आशा पारेख, हेमा मालिनी, आदि।

लेकिन मेरा आशय यह है कि जो नर्तकियां सिर्फ नृत्य करती हैं वे क्यों सफल अभिनेत्री न बन पायीं। जैसे बिंदु का उदाहरण लीजिए। वह दो-एक फिल्मों में बतौर हीरोइन आयीं, लेकिन बुरी तरह असफल रहीं।

आप अभिनेत्री का मतलब नायिका वाली भूमिका निभानेवाली से ही क्यों निकालते हैं, बिंदु, हेलन, पद्मा खन्ना, जय श्री टी. लक्ष्मी छाया आदि कई नर्तकियों ने कई फिल्मों में अभिनय किया है। और इनका अभिनय नायकि से भी बेहतर माना गया है। इसलिए अगर वे नायिका की भूमिका में असफल भी रही हों तो कोई खास अंतर नही, क्योंकि अन्य भूमिकाएं उनकी बहुत सफल हैं। दर्शकों ने भी इन्हें पसंद किया है तो समीक्षकों और आलोचकों ने भी नृत्य और अभिनय दोनों को ही सराहा है।

अब गंभीर मीना टी. से कुछ और पूछना उचित नही समझा। वैसे भी मैं मीना टी. से नृत्य और नर्तकियों के बारे में काफी कुछ पूछ चुका था, अत: मैंने धन्यवाद करने के बाद विदा लेना ही अधिक उचित समझा।


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Mayapuri

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