एक्टर वही जो पहला शॉट ओके दे दे महबूब खान

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मायापुरी अंक 43,1975

स्वर्गीय महबूब खान ने जब अपनी निजी फिल्म कंपनी की स्थापना की तो उन्होंने हथौड़ा और हसिया को अपना ट्रेड मार्क निश्चित किया। यह निशान उन्होंने अपनी फिल्म ‘रोटी’ से लिया था। उस फिल्म में मजदूर और पूंजीपति की आपसी समस्या पेश की गयी थी। हथौड़ा और हसिया अपनाने के पश्चात उनके कितने ही दोस्तों ने उन्हें साम्यवादी कहना शुरू कर दिया। उन्हें यह निशान पसन्द नही था लेकिन स्व.महबूब खान ने कम्यूनिस्ट न होते हुए भी उन लोगों की अवहेलना की तनिक भी परवाह न की और लोगों ने देखा कि एक दिन आया कि लोग महबूब के नाम और उनके निशान पर फिल्म देखने के लिए दौड़े चले जाते थे। यही नही आज के कितने ही चोटी के कलाकार उनके हाथों में ढलकर स्टार बने हैं। नरगिस, दिलीप, राज कपूर, राजकुमार, सुनील दत्त, राजेन्द्र कुमार खुद ही इस बात की गवाई दे सकते हैं।

महबूब ने जिस समय राज कपूर और दिलीप कुमार को अपनी फिल्म ‘अंदाज’ में लिया था तो उस समय भी दोनों हीरो तो अवश्य थे किंतु उनकी प्रसिद्धि ‘अंदाज’ से ही होनी आरंभ हुई।

यह घटना जो सुनाने वाला हूं, वह भी ‘अंदाज’ के निर्माण काल की है। दिलीप कुमार और राज कपूर में उस समय बराबर की टक्कर थी। दोनों एक दूसरे को पीछे छोड़कर आगे निकल जाने की कोशिश में लगे रहते थे। ‘अंदाज’ शुरू होने के पश्चात महबूब खान को उनकी आपसी प्रतिद्वंद्विता से निपटारा बड़ा भारी पड़ता था। हालांकि महबूब खान के सामने कोई गलत बात कहने की हिम्मत नही रखता था।

दिलीप कुमार और राज कपूर दोनों ही अपने स्टाइल के अभिनय में अपना जवाब नहीं रखते थे। इस बात से हर कोई सहमत था। लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि महबूब खान को अपनी पसंद का काम लेने के लिए दिलीप के छ: टेक लिए राजकपूर को लगा कि महबूब साहब दिलीप कुमार की अदाकारी में अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं और दिलीप की अपेक्षा उनको महत्व नही दे रहे हैं। बस इस ख्याल के आते ही उन्होंने महबूब खान से प्रार्थना कि की मेरे भी कुछ अधिक टेक लीजिए।

क्यों? महबूब खान ने आश्चर्य से पूछा।

आप दिलीप के अधिक टेक लेते हैं और मेरे कम! राज राजकपूर ने द्वेष की आग में जलते हुए कहा।

महबूब खान मामला समझ गए हंसते हुए बोले अरे बाबा ऐसी बात नही है। अगर सीन मेरी मर्जी के अनुसार हो जाए तो मैं अधिक टेक नही लेता हूं। अधिक उसी सूरत में लेता हूं जब तक मैं संतुष्ट नहीं हो जाता।

यह तो मैं समझता हूं। लेकिन इस तरह तो फिल्म में दिलीप का काम अधिकाधिक नजर आएगा। मुझे लगता है कि अब आप ऐसी कोशिश कर रहे हैं।

राज कपूर दिल की बात जुबान पर ले आये।

नही बाबा, ऐसी बात नही है मैं दिलीप कुमार के लिए नही मैं फिल्म अपने लिए बना रहा हूं। महबूब खान ने उन्हें समझाते हुए कहा। एक्टर वही है जो पहला ही शॉट ओके दे दे। अगर फिल्म में तुम से किसी का भी काम कमजोर होगा तो मेरी फिल्म कमजोर हो जाएगी और लोग मुझे गालियां देगें। ऐसे किसी विचार को अपने दिल से निकाल दो।

फिल्म पूरी होनी के बाद जब रिलीज हुई तो उसने बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये और दोनों ही कलाकार रातों रात स्टार बन गये लोगों को यह फैसला करना मुश्किल हो गया कि दोनों में से किसने अच्छा अभिनय किया।

‘अंदाज़’ की सफलता पर महबूब खान ने कहा मैं इन दोनों महान कलाकारों की अदा के लिए बेहद अभारी हूं और इन दोनों ने ही अपना काम बड़ी खूबसूरती से निभाया है और इसका कारण वह ‘हौड़’ है जो इन दोनों में लगी हुई थी।

आज ऐसी हौड़ कम ही पाई जाती है। अब तो जहां देखो बड़े कलाकार होते हैं वहां झगड़े और एक दूसरे को नीचा दिखाने की पॉलीटिक्स (राजनीति) फिल्म तक को ले डूबती है। ‘प्रेम कहानी’ इसकी जिंदा मिसाल है


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Mayapuri

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