सब किस्मत का खेल है –नादिरा

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nadira

 

मायापुरी अंक 44,1975

फिल्म ‘जूली’ की सफलता के कारण दो कलाकारों को बहुत लाभ हुआ है। एक तो फिल्म की हीरोइन लक्ष्मी को और दूसरा करैक्टर आर्टिस्ट नादिरा को।

नादिरा एक बहुत ही अच्छी और मंझी हुई कलाकार हैं। लेकिन किस्मत ने साथ नही दिया, सच पूछिए तो ‘आन’ और ‘श्री 420’ के बाद आज पहली बार उनके काम की तारीफ हुई है। मिलने पर वह बड़ी खुश दिखाई दीं। मैंने जब पूछा कि उन्हें कामयाबी न मिलने के लिए किसे दोषी ठहराया जा सकता है? तो वह बोलीं दोषी मैं खुद ही थी। ‘श्री 420’ में मैंने राजकपूर के कहने पर वेम्प का रोल किया तो उसके बाद वैसे ही रोल करने के लिए ऑफर आने लगें। कम से कम तीन सौ पिक्चरें ऐसी थीं जिन्हें मैंने स्वीकार नहीं किया कुछ पिक्चरों में हीरोइन आ रही थी, वह सब फ्लॉप हो गई।

नादिरा का कहना है कि लोग उन्हें बहुत गलत समझते हैं। वह जब भी किसी भी पार्टी में जाती हैं तो जवान लड़को और लड़कियों में बैठना पसंद करती हैं। लेकिन दूसरे इसका कुछ और ही मतलब निकालते हैं।

अच्छा यह बताईये कि आज के हीरोज़ में सबसे ज्यादा सैक्स अपील किसमें है?

नादिरा काफी देर तक सोचती रहीं। फिर बोलीं,

जहां तक शशि कपूर और अमिताभ बच्चन का सवाल है लोगों को वे शायद सैक्सी लगते होगें। लेकिन मेरे लिये तो वह भाई जैसे हैं। हां विनोद खन्ना मुझें बहुत सैक्सी लगते हैं… वह हंसते हुए बोलीं, मैं तो उनसे पूछने वाली हूं एक दिन, क्यों भाई तुम बीस साल पहले कहां थे?

मुझें बहुत ही हंसी आई और नादिरा की मजांक की आदत की दाद देनी पड़ी। लेकिन बाद में मुझें यह समझ में नही आया कि विनोद खन्ना की किस्मत पर हंसू या रोऊं


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Mayapuri

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