किस्सा गुलटाक और धर्मेन्द्र के पजामे का

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dharmendra

 

मायापुरी अंक 16.1975

गुलटाक को किसी ने करीब से देखा होता तो मेरी बात की ताकीद करता। दादर के लकड़ी के पुल पर से गुजरने वाली ऐसे बदन की जवानियों की कसम, गुलटाक में कई हीरोज का मिक्सचर नजर आता था। मूंछों वालें जनाब शत्रुघ्न सिन्हा, कल्लों से नवीन निश्चल, जबड़ों से धर्मेन्द्र, कमर से जितेन्द्र, मोजों से विनोद खन्ना और जूतों से डैनी डेंगजोंगप्पा (जिसका नाम मैं आज तक सही न ले पाया नजर आता था अलबत्ता बालों से खलास यानी शेट्टी थे इतना सब होने के बावजूद उनकी भिनभिनी आवाज अरूणा ईरानी से मेल खाती थी। कई दिल फेंक तो उन की आवाज पर मर मिटे, मगर मूंछे देखते ही सरपट भाग निकले। गुलटाक से मेरी पहली मुलाकात भाईखल्ला से लोकल ट्रेन में सवार होते वक्त हुई वह अपने चमचों के साथ थे और मैं पतीले जैसा अकेला मेरी बगल में आधा दर्जन फिल्मी रिसाले दबे देख कर उन्हौंने फुरेरी ली और अपने चमचों से गपबाजी में लग गये वह उन्हें समझा रहे थे कि धर्म (धर्मेन्द्र) अपने पाजामे में नाड़ा तक गुलटाक के पूछे बगैर नही डालते और जीनत अमान बिना उनके इशारे के अपने सिर से जुएं नही निकालती काका (राजेश खन्ना) जब भी छींकते हैं तो चेहरा गुलटाक के रुमाल से ही पोंछते हैं और जया भादुड़ी हर जुमेरात को पीर की मजार पर खैड़ियां चढ़ाने गुलटाक के साथ ही लम्बी उम्र की दुआएं मांगती हैं

कुल मिला कर दो स्टेशन पार होते होते तक गुलटाक ने खुद पर इतना मस्का लपेट लिया कि मैं फिसल गया। वह सीट पर रखी मेरी पत्रिका पलटने लगे और लंगोटी में नाचती हुई पद्मा खन्ना की एक तस्वीर देख कर चीखे हाय मैं भी था जब यह फोटो उतारी जा रही थी निगोड़ो ने मुझें फोटो से काट दिया। उसी शाम शूटिंग निपटा कर पद्मा मेरे साथ घन्टों भिन्डी और तोरियां खरीदती रही थी। बड़ी जिद्दी बच्ची है

दादर आते आते तक मैं उनका लोहा मान गया दोस्ती भी हो गई पता लगा कि उनका पूरा नाम गुल मोहम्मद टाक है और वह खालिस जाफरानी कश्मीरी हैं बकौल उनके युसुफ भाई (दिलीप कुमार) उसे प्यार से गुलटाक पुकारने लगे और वह गुलटाक हो गये। हेमा मालिनी प्यार से कर उन्हें गुल्लू कहती हैं। मुझसे रुख्सत होते वक्त बोला अच्छा के.पी. भाई, जरा जल्दी में हूं यहां जरा दो बेबियों को चांस दिलाना है। फिर लपक कर जुहू जाऊंगा, वरना कमबख्त असरानी मेरे बिना चाय को मुंह नही लगायेगा।

दूसरी बार गुलटाक मुझसे कफ परेड पर भिड़ गये। साथ उन्नीस बीस की मरियल सी छोकरी थी जिसने सीने पर ऊंचे पैड पैक कर रखे थे और नारंगी बेल-बॉटम में खामख्वाह पोज बदल रही थी। गुलटाक ने मुझे उनसे मिलवाया और आंख दबाकर धीरे से बोले मेरे पे मर रही है पर अपुन को टाईम कहां है? रात में गुलाजर भाई डिनर पर कसम लिए बैठे हैं और ईवनिंग में योगिता बेबी पीछे पड़ी हैं कि चल कर हाऊस कोट का अच्छा सा कपड़ा खरीद दो इधर यह छोकरी मेरी जान को आई हुई है सोचता हूं इसे असिस्टेंट डायरेक्टर नैना भाई चम्पारवाला के हवाले कर दूं। यह उसे चांस देगी, वह इसे चांस देगा अच्छा, चलू कभी तो दो चार कॉलम मेरे ऊपर भी लिखो। इधर जरा नवीने (नवीन निश्चल) ने उलझा रखा है जरा छुट्टी पाऊं तो तुम्हें एक इंटरव्यू दे डालूं

गुलटाक छोकरी को बगल में दबा समुन्दर की जानिब हो लिया, और मैं लहरें गिनता रहा

और एक दर्द भरे सीन के साथ मेरी और गुलटाक को तीसरी मुलाकात हुई मै अभी रंजीत में कवरअप करने के लिए टैक्सी से उतरा ही था कि फाटक पर हंगामा देखा। पुरबिया मूंछ वाला दरबान किसी की गर्दन दबोचे गालियां निकाल रहा थे। और भीड का मजमा इकट्ठा था दरबान जोर जोर से चीख रहा था। मुझे अन्दर जाने दो मुझे साथ खिलाए बगैर लीनू (लीना चंदावरकर) लन्च नही लेंगी। वही गुलटाक मजमे को देख ठहाके लगाकर हंस रहा थे। दरबान उनके बाल पकड़े गला फाड़ रहा था अबे लीनू की जूती, अपुन तेरा खोपड़ी ओपन कर देगा। पीछू एक बार आया तो फिल्म जूता टोपी और दुकान का सेट पर से चांदी का पीकदान झाड़ ले गया। कबाड़ी बाजार में बेच आया चोट्टा। आज फिर मेरे को दांव देने का वास्ते आया है।

गुलटाक अपनी नुची कमीज समेटे बुरी तरह हांफ रहा थे। मैनें छुड़ा दिया। वह चुपचाप मासूम भेड़ जैसा मेरे पीछेपीछे ईरानी रेस्त्रां मे आ गये। चाय सिप करते वक्त उनकी आंखों में आंसू छलक रहे थे। बमुश्किल तमाम तुमने मुझे छुड़ा लिया, सो एहसान मानता हूं। कैसा धर्मेन्द्र का पजामा, लीना का हाऊस कोट, वे लोग तो मुझे पहचानते तक नही। यह सुसरी मुम्बई है। मेरे जैसे कितने गुलटाक बातों की रोटी खाते हैं और सूखी सन्ट छोकरियों के साथ रात बिताते हैं। यह भी एक जिन्दगी है। कप खाली करके वह चुपचाप सिर झुकाए बाहर निकल गये। और पिछली शाम लोकल ट्रेन की भीड़ में फिर एक जानी-पहचानी आवाज कानों में आई‘अपुन के पास सबकुछ है टाइम नही। विन्नू (विनोद मेहरा) बोले कि गाड़ी ले जाओ। अपुन ने मना कर दिया। अभी पहले बान्द्रा में सायरा जी को साड़ी पसन्द कराने ले जाना है फिर अपने शत्रु (शत्रुघ्न सिन्हा) के साथ डिनर है। आज भी एक हड्डी नुमा छोकरी उसकी बगल में दबी थी मैं आंख बचाकर परेल पर ही उतर गया।


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Mayapuri

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