अशोक कुमार कहते हैं ‘छ: बजे तक रोमांस कीजिये फिर घर आ जाइये’

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मायापुरी अंक 20,1975

क्या नये सितारे पुराने सितारों को सम्मान देते हैं ? यह सवाल राज कुमार से पूछा जाए तो उनका उत्तर क्या होगा? राज कुमार ने एक पार्टी में पूना इंस्टीट्यूट के एक उभरते सितारे से पूछा क्या तुमने मेरी आखिरी (मतलब ताजा) फिल्म देखी है? उसने जानते हो क्या उत्तर दिया यदि यह आपकी आखिरी फिल्म है तब तो मैं इसे आज ही देख लेता हूं। बेचारे राज कुमार कट कर रह गये।

मगर नये सितारों के संबंध में अशोक कुमार का अनुभव कुछ और है। वे कहते हैं नये सितारे पढ़े लिखे और सभ्य हैं सब मुझे बड़े प्रेम से अंकल कहकर बुलाते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा को ही ले लीजिये उन्हें बहुत बातूनी समझा जाता है। एक दिन मेरे पास आये तो कहने लगे मोनी दादा, मैं बहुत ज्यादा बकबक करता हूं मगर यदि मैं ऐसा न करूं तो मुझे कोई नही पूछेगा काम पाने के लिए आज कल न्यूज में रहना बहुत जरूरी है।

अशोक कुमार उस जमाने के कलाकार हैं जब फिल्मों में कलाकारों को अपने गाने आप ही गानें पड़ते थे। अब कौन कह सकता है कि कभी अशोक कुमार अपने गाने आप ही गाते होगें। मगर अभी भी अशोक कुमार ने ‘आशीर्वाद’ में कानों की एक नगरी देखी, उसमें सारे काने थे तथा ‘रेलगाड़ी छुक छुक छुक’ और ‘एक कली मुस्काई’ में एक भजन अपने ही स्वर में गाया था। कुछ वर्ष पहले अशोक कुमार को लेकर एक हास्य बड़ा प्रचलित था अशोक कुमार फिल्म जगत को तब छोड़ेंगे जब वह उस फिल्म में काम लेगें जिसमें डेजी इरानी हीरोइन होंगी। बेचारी डेजी इरानी युवती बनकर स्टार तो न बन सकीं हां, गीत और वारिस जैसी छुट-पुट फिल्मों में काम करके फिल्मों से निकल गईं और विवाह कर बैठीं और अशोक कुमार मील के पत्थर की भांति आज भी जहां के तहां मौजूद हैं और सफलता के नये नये रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं।

इस लम्बे अंतराल में फिल्म इंडस्ट्री ने क्या-क्या रंग बदले। यह तो सभी को दिखता है कि फिल्मों का रंग बदल कर ईस्टमैन हो गया। लेकिन फिल्मी सितारों ने भी अपने रंग बदले हैं। अशोक कुमार के शब्दों में जब मैं फिल्मों में आया था तो मुझे कुल सौ रुपया माहवार मिलता था और मेरे पास कार खरीदने के लिए भी पैसे नही थे। ट्रेन में स्टूडियों आते जाते थे। निर्देशक की एक घुड़की पर हम सिर से पैर तक कांप जाते थे। मगर आज के सितारों में इतना डिसिप्लिन कहां है?वे रातों-रात करोड़पति बनना चाहते हैं और बन भी जाते हैं। अपने काम के प्रति उनमें कोई लग्न नही हैं लग्न के नाम पर वे कहेंगे चलता है यार और हां मैं इतना बता दूं कि नये कलाकार हम लोगों से बहुत अधिक जानते हैं और हमसे कही आगे बढ़ सकते हैं यदि वे चाहे तो।“

अशोक कुमार फिल्मों में सैक्स संबंधी दृश्य देने के विरोधी हैं। पुराने जमाने में भी फिल्मों में सैक्स होता था मगर उतनी ही जितनी जरूरी थी। वे फिल्में लोग सपरिवार देखते थे। मगर आजकल सैक्स के नाम पर जो फिल्मों में जो नग्नता दिखाई जाती है, उसे पिता पुत्री या भाई बहन एक साथ बैठकर नही देख सकते। दोनों अलग-अलग देख आयें। यही कारण है कि पहले जितनी फिल्में सिल्वर जुबली मनाती थी अब उसकी आधी भी बॉक्स ऑफिस पर हिट नही होती। अशोक कुमार के ख्याल में दर्शकों की रुचि बिगाड़ने के लिए निर्माता ही सबसे अधिक उत्तरदायी हैं। दर्शकों को तो जैसी चीज देखने को दी जाएगी, वे उसी के आदी हो जायेगें।

नये सितारे अपनी प्राइवेट जिंदगी को जैसे पब्लिक में घसीट लाए हैं, उसे देख कर अशोक कुमार का दिल बाग-बाग हो जाता हो, ऐसी बात नही हैं। बहुत पहले वहीदा रहमान ने अशोक कुमार को अपने प्रेमपाश में बाधं लेना चाहा था मगर अपनी पत्नी के डर से अशोक कुमार की हिम्मत न पड़ी। जब वहीदा रहमान ने देखा कि उसका प्रणय निवेदन ठुकराया जा रहा है तो उन्होंने फौरन पटरी बदल ली और अशोक कुमार को अपना भाई बना लिया। मगर आजकल के सितारे तो खुले आम पति पत्नी की तरह रहते हैं। इतना ही नही, वे उसकी पब्लिसिटी भी करते हैं। जमाने का यह बहाव देख कर अशोक कुमार के मन को चोट पहुंचती है हम भी अपने टाइम में ऐसी हरकतें करते थे। दिलीप और कामिनी, राज और नरगिस में कितना गहरा रोमांस चलता था। मगर हम इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि हमारी ये रोमांटिक हरकतें चर्चा का विषय बन जाए। हमें यह सोच कर डर लगता था, शर्म आती थी कि दुनिया यह सब जान लेगी तो क्या कहेगी हमारी इमेज बिगड़ेगी मगर आजकल के सितारों ने तो तमाम शर्मो-हाय को ताक पर रख दिया है। इससे पब्लिक की नजर में फिल्म इंडस्ट्री की इज्जत दिनों दिन गिरती जा रही है। मै कहता हूं कि आप सांय छ: बजे तक जो गुलछर्रे उड़ाते हैं, उड़ाइयें मगर उसके बाद यह मत भूलिए कि पाछे आपका घर हैं, पत्नी हैं, बच्चे हैं।“

हम अशोक कुमार की बात से असहमत होने वाले कौन हैं ?


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Mayapuri

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