अधर में लटकती राखी

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Gulzar_Rakhee

 

मायापुरी अंक 20,1975

राखी जितनी अच्छी एक्ट्रेस हैं, उससे कही अच्छी पी.आर.ओ. बन सकती हैं। यदि आप उनसे कभी गुलजार के बारे में बात करें तो उनके उत्तर कुछ इस तरह के होंगे “तोबा तोबा मैं तो गुलजार से यह पूछने की हिम्मत नही कर सकती जो गुलजार जी कहेंगे, वही होगा।“ राखी पब्लिक में गुलजार की इमेज ऐसी पेश करती हैं मानो गुलजार कोई भेड़िया हैं और राखी बेचारी एक निरीह मेमना

मगर क्या वास्तव में ऐसा होता है? जी नही, गुलजार राखी की घरेलू जिंदगी इतनी शांत नही, जितनी दिखती हैं।

जब गुलजार ने राखी से शादी की थी तो उन्होंने फिल्मी शादी धारा नंबर एक के अनुसार राखी से यह वचन ले लिया था कि हे मेरी धर्म पत्नी, तुम्हें कसम खानी होगी कि शादी के उपरांत तुम किसी फिल्म में काम नही करोगी।

तब राखी ने पूछा था “मगर पति देव, मेरी उन फिल्मों का क्या होगा जो अभी अधूरी पड़ी हैं।“

इस पर गुलजार ने सीना तानकर उत्तर दिया था “ठीक है देवी, तुम अपनी अधूरी फिल्मों को पूरा कर सकती हो। मगर उसके बाद तुम्हारी बंगाली जुबान पर फिल्म का नाम भी आया तो मैं तुम्हें यही छोड़कर पंजाब चला जाऊंगा।“

बंगाली लड़कियां और बंगाली लेखक अपनी भावुकता के लिए प्रसिद्ध तो हैं ही। राखी ने भी विवाह के मंडप पर बलि चढ़ने से पहले गुलजार को फिल्मों में काम ना करने का वचन तो दे दिया। मगर इसके बावजूद आज वह ‘कभी कभी’ में काम कर रही हैं क्यों भला ?

राखी से यह सवाल पूछकर देखिए। वह बताने लगेंगी “हुआ यह कि एक दिन यश चोपड़ा जी हमारे घर आये उन्होंने मुझे ‘कभी कभी’ की कहानी सुनाई इसमें उन्होंने मुझे एक रोल ऑफर किया इस रोल में मैं अमिताभ बच्चन से प्रेम करती हूं। शशि कपूर से शादी करती हूं और ऋषि कपूर की मां बनती हूं बहुत गजब का रोल था। गुलजार जी भी साथ बैठे कहानी सुन रहे थे मैंने उनकी ओर देखा वे चुपचाप उठकर भीतर चले गये। मैंने भी यश चोपड़ा को बैरंग लौटा दिया। जब यश जी बजाय मेरे पीछे पड़ने के गुलजार जी के पीछे पड़ गये। जब गुलजार जी को विश्वास हो गया कि फिल्म में तमाम शरीफ आदमी काम कर रहे हैं तो उन्होंने मुझे फिल्म में काम करने की अनुमति दे दी।“

सुनकर यूं लगता है जैसे धर्मपति ने अनुमति न दी होती तो राखी बेचारी उसी तरह अपनी मुन्नी बोस्की की नेप्पी बदलने का काम करती रहती। मगर ठहरिये, यह आइसबर्ग का ऊपरी भाग है जो साफ साफ नजर आता है मगर इसका तीन-चौथाई हिस्सा तो पानी के भीतर छिपा है।

इस छिपे हिस्से पर प्रकाश डालने से पहले हमें कुछ शब्द गुलजार साहब के बारे में बताने होंगे वह पक्का शिकारी हैं और बंगाली शेरनियों को काबू करने की कला में तो उनका कोई जवाब ही नही। उन का शिकार करने का तरीका आम शिकारी से जरा हटकर है। सबसे पहले तो वह अपना शिकार चुनते हैं जो बिना अपवाद बंगाली होता है।

(उदाहरण, शर्मिला, सुचित्रा बेटी मुनमुन, जया, सुमित्रा सान्याल) फिर वह शिकार पर अपने जीनियस होने का रौब डालता है। उनसे विभिन्न विषयों पर डिस्कशन करता है। एक तरह से वह शिकार से प्लेटोनिक संबंध जोड़ लेते हैं इससे आगे बढ़ने का साहस गुलजार जुटा पाते हैं या नही इस विषय पर रिसर्च होना बाकी है।

बहरहाल हमारी चर्चा सिर्फ गुलजार और शर्मिला को लेकर है। शर्मिला के गालों पर हंसते समय जो गड्ढे पड़ते हैं वे गुलजार को बहुत अच्छे लगते हैं। (हमें भी अच्छे लगते हैं) गुलजार साहब ने शर्मिला जी पर अपनी विद्वता का रौब झाड़ा और उन्हें ‘खुश्बू’ में एक गेस्ट अपियरेंस देने पर राजी कर लिया।

इस गेस्ट रोल में गुलजार ने बंगाली शेरनी को अपना जीनियस पन दिखाया और लो, ‘मौसम’ में शर्मिला हीरोइन बन बैंठी। अब गुलजार साहब शर्मिला के साथ और अधिक समय रहने लगे।

आप क्या समझते हैं कि इस दौरान श्रीमती गुलजार बैठी रसोई में रोटियां पका रही थी? जी नहीं, वह गुलजार की एक-एक हरकत पर नजर रखे थी। यू तो राखी को अपने पतिदेव पर बहुत भरोसा है मगर उनका कहना है कि मैंने जबसे ‘दाग’ में शर्मिला की छुट्टी की है वह मुझसे खार खाए बैठी है और मौका आने पर कुछ भी कर सकती हैं। अब राखी अच्छी तरह जानती हैं कि लोहे को लोहा काटता है बस उन्होंने गुलजार और शर्मिला को ‘सबक’ सिखाने के लिए ‘कभी कभी’ मे रोल ले लिया। यदि राखी इस रोल को मना कर देती तो यह शर्मिला के पास ही जाता। ‘कभी-कभी’ का रोल एक तरह से राखी के हाथ में कंट्रोल लीवर है। जिससे वह गुलजार की हरकतें कंट्रोल कर सकती हैं।

इस समय हालत यह है कि गुलजार तो मुंबई में शर्मिला को डायरेक्शन दे रहे हैं और राखी कश्मीर में यश चोपड़ा से डायरेक्शन ले रही हैं। दोनों ही अपने-अपने काम में बेहद रुचि ले रहे हैं। राखी की इस रुचि का उद्देश्य यह नही है कि वह कोई बहुत अविस्मरणीय अभिनय करना चाहती हैं नहीं, वह तो गुलजार को यह जताना चाहती हैं कि तुम करोगे तो मैं उससे एक कदम आगे जा सकती हूं। तू डाल-डाल मैं पात-पात पति-पत्नी की इस तनातनी के कारण राखी पुन फिल्मों में लौट आये, ऐसा असम्भव नहीं है। इतना तो आप भी जानते ही होंगे कि जैसे ही राखी ने हरी झंडी दिखाई उनके पास कांट्रेक्टों का ढेर लग जाएगा।

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Mayapuri