सरकारी तमाशा

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kanoon_rajendrakumar

 

मायापुरी अंक 20,1975

फिल्म फेस्टीवल के एक उत्सव में जब मंत्री, सरकारी अधिकारी समेत समस्त मेहमान-मेजबान अशोका होटल के कनवेंशन हाल में मुफ्त की चढ़ा रहे थे, तब एक वृद्धा अपने हाथ में पकड़ी छड़ी के सहारे लिफ्ट के पास खड़ी थी। सहसा राजेन्द्र कुमार उधर से गुजरे तो उन्होंने बड़े सम्मान से उस वृद्धा का हाथ पकड़ कर कहा मैडम आप

वृद्धा ने मुस्कुरा कर कुछ उत्तर दिया। इसके पश्चात राजेन्द्र कुमार उसे अत्यन्त आदर से अपने होटल सूट में ले गये। किसी भी सरकारी अधिकारी ने उस वृद्धा का स्वागत ना किया, न उसे पहचाना। वह वृद्धा थी जपान की सबसे बड़ी फिल्म निर्माता मैडम क्वाकिता जिसके नाम से पूर्वी एशिया में फिल्में चलती हैं। मैडम क्वाकिता अपनी मेहमान नवाजी के लिए प्रसिद्ध भारत के फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने आई थी मगर यहां पर उनका जो स्वागत हुआ उससे वह कभी भूल कर भी दुबारा यहां कदम नही रखेंगी। राजेन्द्र कुमार से उनकी पहचान ‘अमन’ फिल्म के निर्माण के दौरान हुई थी। ईश्वर का शुक्र ही मनाइये कि समय रहते राजेन्द्र कुमार ने उन्हें पहचान लिया और भारत की नाक थोड़ी बहुत बच गई। सुना जाता है कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने फिल्म फेस्टिवल के कुप्रबन्ध के लिए श्री आई. के. गुजराल को आड़े हाथों लिया है।

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Mayapuri