“अकेला तीन ग्रेट के बराबर” महमूद

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मायापुरी अंक 42,1975

प्रसिद्ध निर्देशन मनमोहन देसाई अब निर्माता बन गये है। उन्होंने अपनी पहली फिल्म का नाम रखा है ‘अमर अकबर एंथॉनी’ जिसके लिए उन्होंने थ्री ग्रेट एक्टर्स साइन किये हैं अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर और विनोद खन्ना।

कॉफी हाउस में बैठा मैं उस फिल्म का इश्तिहार पढ़ रहा था तो फिल्मों के एक दलाल ने आकर बातों ही बातों में बड़ी मार्के की बात कही यार थ्री ग्रेट एक्टरों को लेने का क्या मतलब क्या ये थ्री कैरेक्टर एक ग्रेट आदमी में नही हो सकते? ग्रेट तो वही होगा जिसके भीतर अमर, अकबर एन्थॉनी ये तीनों होगें।

वह दलाल मामूली-सा आदमी था पर वाकई उसने बड़े मतलब की बात कह दी थी। मैं उसकी बातों पर हंसने लगा तो अचानक मेरा ध्यान हास्य अभिनेता महमूद की ओर गया जो अपनी वास्तविक जिंदगी में ‘अमर अकबर एंथॉनी’ तीनों हैं।

आज से नही, मैं महमूद को बीस बाइस साल से यानि तब से जानता हूं कि जब वह मलाड़ में रहते थे और पैदल फिल्मिस्तान स्टूडियो में जाया करते थे और रोज निराश होकर भारी पैरों से थक हार के घर लौट आते थे।

जिस दिन वह अधिक उदास होते, मैं उन्हें स्टूडियो के सामने एक कैंटीन में पकड़ कर ले जाता, उन्हें चाय, भजिया पाव खिलाता और कहता, यार इतने गमगीन क्यों होते हो?

वह मेरी और तेज निगाहों से देखते और कहते, क्या करूं मुझें अपनी जिंदगी से डर सा लगने लगा है बड़ी खौफनाक जिंदगी है। मैं केवल एक चीज़ देखना चाहता हूं।

“वह क्या”

महमूद दार्शनिक-भाव से कहते, खुदा भगवान यानि गॉड वह किधर हैं? यदि एक बार मिल जाये तो मैं उन्हें सदा के लिए बांध कर रख लूंगा। यह कला मुझें आती है। मैं नाचना जानता हूं, गाना जानता हू, हंसना जानता हूं, और रोना भी जानता हूं। इनके अलावा और कौन-सी कला है, किसी को वश में करने की ?

महमूद के उस भोलेपन पर मैं खुद भीतर से सहजल हो उठता और यही प्रार्थना करता कि उनका नाम जल्दी से जल्दी न जाये।

मुझे भी डर लगने लगा था कि कहीं ऐसा न हो कि वह खुद, भगवान और गॉड से साक्षात हाथ मिलाये बगैर ही दुनियां से कूच कर जायें। पर कुछ ही दिनों बाद महमूद का भाग्य जागा। उन्हें काम मिलने लगा। फिल्मी गीतकार भरत व्यास की मोटर का क्लिनिक बनने के बजाय वह फिल्मों के हंसोड़ अभिनेता बने और देखतें-देखतें उनकी वह खौफनाक जिंदगी खुशियों से जगमगाने लगीं।

पर मुझे आश्चर्य इस बात का हुआ कि उनकी जिंदगी तो बदल गई पर वह नही बदले।

बहुत दिनों के बाद जब उससे मुलाकात हुई तो उन्होंने बताया कि गोरे गांव के एक फकीर साई बाबा ने उनकी जिंदगी बदल दी है। वह उनसे कुछ रुपये कर्ज के लिए मांगने गये थे पर उन्होंने उन रुपयों के साथ दुआएं भी दी जिसका फल आज भी उन्हें मिल रहा है। इस घटना के बाद तो उन्हें लगा जैसे खुदा, भगवान और गॉड उनका डियर फ्रैंड बन गया है।

मैं महमूद की पूरी पोथी बांचने के बजाय इस लेख के शीर्षक के अंतर्गत विषय पर ही चर्चा करूंगा। अमर के रूप में महमूद पूरे आस्तिक हैं। वे पूरे धर्मिका व्यक्ति हैं और इतना सहिष्णु कि वह हिंदुओं के सभी देवी देवताओं का आदर करते हैं। उन्होंने अपनी फिल्म निर्माण संस्था का नाम भी ‘बाला जी’ के नाम पर रखा है और हर फिल्म शुरू करने पर और उसका निर्माण कार्य पूरा हो जाने पर ‘बालाजी’ के मंदिर जाते हैं। उनके इस संकल्प में आज तक किसी तरह को अड़चन नही हुई। हाल ही में वह ‘कुंवार बाप’ बनाने से पहले वैष्णो देवी भी हो आये थे। उनके घर का एक कोना मक्का मदीना है, तो दूसरा चर्च और तीसरा मथुरा-वृंदावन।

एक और रूप देखिये। महमूद अगर दुनिया में हैं तो वह किसी जगह पर हो, किसी भी स्थिति में हो, कुरान का पाठ करना नही भूलेंगे। तेज से तेज बुखार में भी वह उसका ध्यान लगा कर पाठ करेंगे।

महमूद अकबर रसिक भी कम नही हैं। उन्होंने चार शादियां की हैं और सब को जीवन की सारी सुख-सुविधाएं दे रखी हैं। वह एक औरत की बात दूसरी औरत से नहीं छुपाते, शायद इसीलिए वह अमेरिका बीबी को खुश रखने के लिए अरूणा ईरानी से निकाह न कर सकें। आज भी उन्हें मन पसंद लड़की मिल जाये तो वह उस पर कुर्बान हो जायेंगे। वह मोहब्बत को पाक समझते हैं क्योंकि उनका कहना है कि सच्ची मोहब्बत पाक दिल से ही हो सकती है।

महमूद अकबर को औरतों की तरह घोड़ों, कुत्तों और मोटरों से भी बेहद मोहब्बत है। वह कहते हैं कि घोड़ों से मुझे इश्क है। इन घोड़ो से उन्होंने लाखों रुपये कमायें और लाखों खोये भी हैं। महमूद के घोड़ो ने मद्रास और मुंबई की घुड़ दौड़ो में महमूद की तरह ही नाम और पैसा कमाया है।

वह कभी-कभी चुटकी लेकर कहते हैं मैं इनकी रखवाली करता हूं पर कभी कभी लगता है कि खुदा ने अपने इन बंदो को मेरी रखवाली के लिए भेजा है। जब मैं बीमार पड़ता हूं तो अचानक घोड़ो का ख्याल आने पर मैं बिस्तर पर से उठ खड़ा होता हूं और अपने आप ठीक ही जाता हूं। इतना ही नही, इन घोड़ो से मैंने बहुत कुछ सीखा है। इनका गुस्सा, इनका प्यार इनका हिनहिनाना, इनका दुलती मार कर उछलना दौड़ना, क्या यह सब मुझें जैसे हंसोड़ अभिनेता के लिए जरूरी नही है,

घोड़ों की तरह वह कुत्तों से भी बेहद प्यार करते हैं। कहा जाता है कि घोड़ें और कुत्ते को दूर से ही देख कर वह उसकी नस्ल तक बता देता हैं। हवाई यात्रा के समय यदि किसी यात्री से उनकी दोस्ती हो जाती है तो वह यह पूछे बिना नही रहते कि उनके पास कुत्ता है या नही? है तो किस जात का है, किस रंग का आदि? इस बारे में वह दिलचस्प बयान देते हैं कि जो आदमी कुत्ते से प्यार नही कर सकता, वह भला इंसानों से क्या प्यार करेगा ? शायद इसीलिए वह अपने प्यारे कुत्तों को हाथों से खाना खिलाते हैं, नहलाते हैं और उनके गले में घुंघरू वाले शानदार पट्टे बांध कर उनके साथ खेलते हैं और नाचते हैं।

और अब मिलिए, महमूद एन्थॉनी से। बड़े मजेदार हैं। उन्हें मोटर रखना बड़ा मजेदार लगता है। उन्हें मोटरें रखने का बड़ा शौक है। वह अपनी मोटर से इस तरह प्यार करते हैं, जैसे एक प्रेमी अपनी प्रेमिका से करता है। महमूद एंथॉनी हमेशा एक-सी कार में नही घूम सकते है। वह बोर हो जाते हैं पर जब वह अपनी कार बदलते तो उनकी आंखे सहजल हो उठती हैं जो भी मोटर उनके पास रहती है, वह से खूब सजा धजा कर रखते हैं।

महमूद एंथॉनी को तरह-तरह की टोपियां पहनने का बड़ा शौक है। नई टोपी आते ही उसे हाथ से उछाल कर पहनते हैं और खुशी में जोर से उछल कर, बड़ी अदा के साथ नाचते हैं

महमूद एंथॉनी ने अपने बच्चों को खुश रखने के लिए तरह-तरह के खिलौने घर में जमा कर लिये हैं दुनियां के किसी कोने में कोई नया खिलौना मुंबई आता है तो वह सबसे पहले महमूद के घर पहुंचते हैं।

महमूद एंथॉनी का जीवन हिप्पियों की तरह बनता जा रहा है। मानसिक तनाव मिटाने के लिए उन्हें मेंडल की गोलियां लेनी पड़ती हैं। नशा किए बिना उन्हें चैन नही पड़ता। मूड होता है तो वह मद्रास में बैठे टेलीफोन से मुंबी के किसी निर्माता से अपने सीन सुनते हैं, और मुंबई में होते हैं तो मद्रास के किसी निर्माता से सीन सुनते हैं। यात्रा के समय वह खुद अपना सीन तैयार कर लेते हैं। अपने डॉयलाग खुद गाते हैं, नाचते हैं उन्हें दुनियां भर के डांस आते हैं, कई गाने तो वह खुद कम्पोज कर लेते हैं

अब तो आप समझ गये होगें कि हास्य अभिनेता महमूद अकेले हैं अमर, अकबर और एंथॉनी यदि नही है तो मन मोहन देसाई ने अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर और विनोद खन्ना को साइन किया भला महमूद को साइन कर लेते तो क्या गलत था?वह अकेला ही तीन ग्रेट के बराबर हैं।


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Mayapuri

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