मैं कमजोर नही हूं – शशि कपूर

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मायापुरी अंक 14.1974

शशि कपूर ने मुझे अपने एटलास आपार्टमेंट पर मिलने को बुलाया था ठीक सुबह आठ बजे। उनका फ्लैट मुम्बई के किनारे हार्कनस रोड़ पर स्थित है। मैं मन ही मन सोच रहा था-कौन बड़ा हीरो सुबह आठ बजे तैयार मिलता है। पर जब मैनें वहां पहुंच कर शशि कपूर बाबा को एकदम तैयार देखा तो बड़ा आश्चर्य हुआ।

शशि कपूर ने मुझे अपनी बैठक में बिठाया और ‘अभी पांच मिनट में आता हूं कह कर भीतर चले गये तब तक उनका नौकर गरम-गरम चाय ले आया था। मैं चाय के घूंट लेते हुए बैठक की सजावट देखने लगा। भारती और पाश्चात्य सभ्यता का बड़ा सुन्दर मिलाप था। सामने रखा था। सुन्दर पियानो। बांयी ओर खूबसूरत अल्मारी में अंग्रेजी उपन्यासों और काव्य पुस्तकों के साथ नाटक और फिल्म संबंधी कई बड़ी बड़ी पुस्तकें तरतीव से रखी हुई थी। दीवार पर एक खूबसूरत मुगलकालीन पैंटिग चमक रही थी कीमती कालीन थी और कीमती ही दीवान था। दीवान पर भारतीय लोक कला के स्टाइल में रंगी हुई चादर थी। सामने एक तिपाई थी जिस पर मसाला पीसने के इमाम दस्ता की शक्ल का एशट्रे था।

मैं कुछ सोच ही रहा था कि ठीक पांच मिनट के भीतर शशि बाबा बैठक में आ गये। जब मैंनें उनके हाथों मायापुरी का ताजा अंक दिया तो कहने लगे “मैनें इसके और भी अंक देखे है। लगता है, अब दिल्ली वाले मुंबई से होड़ लेने वाले है। पर एक बात कहूं।

मैंने कहा “कहिए

शशि कपूर ने पास ही बैठते हुए कहा “मायपुरी’ का हमेशा ऐसा ही ट्रेडिशन रहना चाहिए जैसा अब है। मैनें उन्हें विश्वास दिलाया कि हम इस ट्रेडिशन को और भी ऊंचा उठाने की कोशिश करेगे।

इन औपचारिक बातों के साथ ही मैनें अपने मतलब की डोर पकड़ते हुए कहा “पिछले तीन महीनों से आप धड़ाधड़ फिल्में साइन करते चले जा रहे है। क्या कही आप आंखा मूंद कर फिल्में साइन करने की गलती तो नही दोहरा रहे है ?

शशि कपूर ने जरा गम्भीर हो कर कहा ‘नही अब में खूब ठोक बजा कर। पहले कहानी को अच्छी तरह तोल कर, अपने रोल को गहराई से समझ कर और निर्देशक तथा बैनर को देख कर ही फिल्में ले रहा हूं। पहले लिहाज में फिल्में साइन करके गलती की पर अब इस मामले में पूरा बिजनेस-लाइफ हो गयी हूं सच तो यह है कि जितनी फिल्में साइन की है करीब उतने ही लोगों को मैंने ना करके निराश भी किया है।

मैनें एक नाजुक प्रश्न किया “कुछ लोग कहने लगे है कि आप दूसरे नम्बर की भूमिकाएं करने को राजी है। क्या यह सच है?

शशि कपूर ने तपाक से कहा” बिल्कुल गलत। पर हां, मैंने बड़े पैमाने पर बनने वाली फिल्मों में महत्वपूर्ण रोल स्वीकार किये है वे भी कुछ खास शर्तों के साथ। जैसे ‘प्रेम कहानी’ में मैं राजेश खन्ना के साथ आ रहा हूं। यह फिल्म शीघ्र ही प्रदर्शित होने वाली है। आप इसमें देखेगें कि मेरी भूमिका राजेश जितनी ही महत्वपूर्ण है। मैंने ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में मनोज कुमार और अमिताभ बच्चन के साथ अभिनय किया है। यह फिल्म आपने देखी होगी। यद्दपि मेरी भूमिका में ज्यादा विस्तार नही है पर जितना भी है वह मेरी नजर में महत्वपूर्ण है। इसी तरह ‘चोर सिपाही’ में मैं विनोद खन्ना के साथ भूमिका करने जा रहा हूं। ‘आ गले लग जा’ में मैं शत्रुघ्न सिन्हा के साथ था। हम दोनों में से किसी ने भी एक दूसरे को ‘खोने’ की कोशिश नही की। ‘दो हीरे’ में मेरे साथ शत्रुघ्न सिन्हा फिर आ रहे है। एस.के. फिल्म्स कृत प्रोडक्शन्स नं। 1 में शम्मी कपूर के निर्देशन में मैं धर्मेन्द्र के साथ भी आ रहा हू। और हां ‘कौन किसका’ में मैं जितेन्द्र के साथ और ‘दुनिया मेरी जेब’ में मैं ऋषि कपूर के साथ आ रहा हू।

मैंने कहा “तो इसका मतलब यह है कि आप को किसी भी बड़े आर्टिस्ट से किसी तरह का खतरा नही है।

शशि बाबा ने हल्की मुस्कुराहट के साथ कहा “जनाब खतरा उसे रहता है जो खुद कमजोर होता है। भले ही कुछ फिल्में मेरी कमजोर रही हों पर मैं कमजोर नही हूं। देखें आगे क्या होता है ? फिर उन्होनें उंगली छत की ओर उठा दी याने जो नीली छतरी वाला करेगा, वही होगा। भाग्य में पूरा भरोसा करते है शशि कपूर। इसी कारण अपने जीवन के उतार चढ़ाव में वह एक जैसे रहते है।


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Mayapuri

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