शबाना आज़मी ने पटरी क्यों बदली

1 min


Shabana-Azmi

 

मायापुरी अंक 20,1975

पहली बार शबाना से मैं तब मिला जब वह फिल्म्स डिवीजन आडिटोरियम में ‘अंकुर’ के प्रीव्यू के लिए आईं थी। ‘अंकुर’ में शबाना ने एक निर्धन किसान की पत्नी, लक्ष्मी, का रोल किया था। गांव के जमींदार का बेटा उनके पति को अपमानित करता है। पति गांव छोड़ देता है फिर जमींदार का बेटा लक्ष्मी को धमकाता है लक्ष्मी उसका शिकार हो जाती है। यहीं पर एक दृश्य है जिसमें जमींदार का बेटा लेटा हुआ है, लक्ष्मी उसकी ओर पीठ किए अपनी चोली बांधती है।

आम तौर पर ऐसे सीन को ‘हॉट सीन’ कहा जाता है जो दर्शकों की मानसिक लिप्स सतुंष्ट करने के लिए फिल्म में डाल दिये जाते हैं। मगर इस दृश्य को देख कर मन में एकदम विपरीत प्रतिक्रिया होती है। दर्शक बजाय उत्तेजना के लक्ष्मी के प्रति सहानुभूति अनुभव करता है और उसे जमींदार के बेटे पर क्रोध आने लगता है। कहना न होगा, यहां शबाना का अभिनय स्वाभाविकता की चरम सीमा को छू गया था।

शबाना ने बताया श्याम जी (फिल्म के निर्देशक) चाहते थे कि मैं जमींदार के बेटे की ओर मुंह कर के चोली बांधू मगर मैंने कहा, भारत के किसी भी गांव की कोई भी नारी ऐसी हालत में चोली नही बांध सकती। मैंने साड़ी का पल्लू मुंह में दबा कर जमींदार के बेटे की ओर पीट कर के चोली बांधी। अब देखिए, कितना नेचुरल दृश्य बना है”

और जब लक्ष्मी गर्भवती हो जाती है तब शबाना का अभिनय एकदम वास्तविकता के निकट लग रहा था। अन्त में लक्ष्मी का पति लौट आता है लक्ष्मी फूट-फूट कर रोने लगती है और तब मैंने नोट किया कि मेरी पलकों की कोरें भी भीग उठी हैं

जब शबाना पूना इंस्टीटूयूट से एक्टिंग का गोल्ड मेडल लेकर निकली तो उनसे कहा था मैं पैसा कमाने के लिए फिल्मों में काम नही करूंगी। मैं एक्टिंग करना चाहती हूं और सिर्फ ऐसे रोल लूंगी जिनमें मुझे अपना अभिनय दिखाने का चांस मिल सके।

इस पर नीलम मेहरा ने मुंह चिढ़ा कर कहा था ये सब कहने की बातें हैं जैसे ही बड़े बैनर वाले प्रोड्यूसर आयेंगे, शबाना उनकी फिल्में साइन कर लेंगी।“

एक-दो बड़े बड़े प्रोड्यूसर शबाना के पास आए मगर जब शबाना ने उनकी फिल्में ठुकरा कर लो बजट वाली ‘अंकुर’ साइन कर ली तो सभी भौंचक्के रह गये। निर्माता लोगों में वह बात फैल गई यह कैफी आजमी की बेटी अपने आपको जाने क्या समझती है? इतने अच्छे-अच्छे रोल छोड़ कर ‘अंकुर’ में काम करने चली हैं।“

मगर शबाना ने ‘अंकुर’ में रोल इसलिए किया था कि उन्हें इस रोल में अपना भविष्य नजर आ रहा था। उन्हें अपने ऊपर विश्वास था वह जानती थी कि ‘अंकुर’ में उनका अभिनय देखकर निर्माता स्वयं उनके दरवाजे पर लाइन लगायेंगे और तब वह अपनी पसन्द के रोल चुन सकेंगी शबाना में धीरज है और वह सफलता के लिए प्रतीक्षा कर सकती थी। ‘अंकुर’ के साथ ही शबाना ने ‘परिणय’ और ‘फासला’ में भी काम किया तीनों फिल्में लो बजट की थी।

‘अंकुर’ में स्पेशल शो हुए और शबाना रातों रात स्टार बन गईं। कोई कहता था, उन्होंने बीस दिनों में सोलह फिल्में साइन की हैं, कोई कहता था उन्होंने पंद्रह दिनों में बीस साइन की हैं और ये सारी फिल्में बड़े-बड़े निर्माता और स्टारों के साथ हैं। शशि कपूर, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, धर्मेन्द्र, फिरोज खान, किसके साथ हीरोइन नहीं आ रही है शबाना इनमें से एक भी लो-बजट कला या समांतर फिल्म में नही है क्या शबाना कला के लिए बड़ी-बड़ी फिल्मों के साथ छोटी फिल्मों में भी काम नही कर सकती हैं एकाएक यह परिवर्तन क्यों ?

हालांकि शबाना अब भी यही कहती हैं कि मैं अपना पूरा-पूरा ध्यान अपने करियर पर लगा रही हूं इसीलिए मैनें बैंजामिन से अपनी सगाई तोड़ दी और अपना करियर बनाने के लिए शबाना ठीक राह छोड़ कर परवीन बॉबी के रास्ते पर चल पड़ी हैं जबकि परवीन बॉबी की क्रेज कुछ महीने भी नही टिकी। आजकल शबाना शेखर कपूर के साथ अपना अधिकांश समय बिताती हैं। कहती इतना ही हैं “हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं और कुछ नही मुझे उनकी कम्पनी पसन्द है।“

शबाना का अभी कई वर्ष शादी करने का कोई इरादा नही है वह शादी की जरूरत भी महसूस नही करती और वुमेन्स लीव मूवमेंट की समर्थक हैं फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में मैं शबाना आजमी को देख थोड़ा चकित रह गया। अशोका होटल में शैम्पेन पीती शबाना और अंकुर के प्रीव्यू वाली शबाना में जमीन-आसमान का अंतर था जब मैं वहां से चला तो अपनी सहेलियों में घिरी शबाना बहकने लगी थी। कई हीरो, जो इस ताक में थे, शबाना के निकट आने की कोशिश कर रहे थे।

बाहर आकर मैं सोच रहा था कि शबाना पटरी बदल कर ऐसी लाइन पर आ गई हैं जिसके आगे की लाइन ब्लाक है। भले ही वह लांखो कमा ले मगर अभिनय में और ऊंचा उठ सकेंगी, मुझे संदेह है।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये