INTERVIEW!! मैं अनेक गलत फहमियों की शिकार हूं – जाहिरा

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मायापुरी अंक, 56, 1975

जाहिरा ने हमें मिलने का समय दिया था डेढ़ और दो बजे दोपहर के बीच का पर हम ‘मायापुरी’ के दिल्ली स्थित संपादक जे.एन.कुमार, स्थानीय प्रतिनिधि जैड.ए.जौहर और मैं, 2 मानिक मोती, मेन एवेन्यु सान्ताक्रूज (पश्चिम) उनके निवास स्थान एक घंटे पहले ही पहुंच गये।
समय से पहले ही वहां पहुंच जाने से जाहिरा पेशोपेश में पड़ गयी थी क्योंकि उन्होंने वह समय पहले ही किसी एक और प्रेस प्रतिनिधि को दे दिया था। पर उन्होंने स्थिति को संभालते हुए और शायद यह सोच कर कि ‘मायापुरी’ के कुमार साहब ठेठ दिल्ली से मिलने आये है, उन प्रेस प्रतिनिधि से कहा माफ करें, आप तो घर के आदमी हैं, किसी भी और दिन रख लेंगे इस तरह बिना किसी झंझट के जाहिरा से हमने वह समय भी बातचीत के लिए छीन लिया। जाहिरा हरे कुर्ते पायजामा में बिना मेकअप किये ही अपनी स्निग्ध देह की मादकता के साथ पंजाब के गांव की गौरी लग रही थी। पर हमें अफसोस है कि हम उनकी गहरी कजरारी आंखों का बहुचर्चित चांचल्य नही देख पाये क्योंकि उन्होंने आंखो पर धूपवाला काला चश्मा पहन रखा था। मुंबई में फैल रहे आंखो के रोग ने उनकी सलोनी आंखो को भी छू लिया था।

अनौपचारिक बातों के बीच में इंटरव्यू का सूत्र पकड़ने ही जा रहा था कि बाहर घंटी बजी नौकर ने बताया रेफ्रीजेटर ठीक करने वाला आया है। वे उसे कुछ समझाकर और चाय का आर्डर देकर फिर अपने तख्त पर आ कर बैठी तो फिर घंटी बजी नौकर ने बताया कीड़े मारने वाले आये है। वे फिर उठी और झुंझला कर बोली इन सब को आज ही आना था और इस वक्त…. वे फिर बाहर गयी और सबको अपना अपना काम बता कर फिर लौटी, तख्ते पर गहरी सांस खींचकर और अपने पैर फैला कर बैठ गयी।

तब तक चाय आ गयी थी। चाय की सिप लेते हुए मैं जाहिरा के बारे में सोचने लगा। कुछ ही दिनों पहले धरती की सौगंध के मुहूर्त के दिन तो वे बहुत मोटी लग रही थी। पर इस समय सामने बैठी जाहिरा उस दिन की तुलना में काफी स्लिम लग रही है। अचानक सात दिनों के भीतर ही उन्होंने अपने को इस तरह स्लिम कैसे कर लिया? मैंने जब यही सवाल किया तो वे एकाएक चौंक उठी और पल भर के लिए स्थिर हो उठी फिर उन्हें कुछ याद आया और बोली हां, मैंने उस दिन साड़ी इस तरह पहन रखी थी कि इस तरह का भ्रम हो सकता है। वैसे मैं इस बारे में बड़ी सावधान हूं न अधिक स्लिम होती हूं न अधिक मोटी।

जाहिरा के बारे में यह पहला ही भ्रम न था। मैंने कुछ और भी बातें सुन रखी थीं जो काफी सीरियस थी। मैंने सोचा क्यों नही, पहले उन्हीं का स्पष्टीकरण कर लिया जाये। मैंन सुना था कि जाहिरा फिल्मों में नंगेपन के खिलाफ है। यह भी सुना था कि सिद्धार्थ में जो रोल सिम्मी ने किया है, वही रोल पहले जाहिरा को दिया गया था पर उन्होंने उसे नंगा बता कर ठुकरा दिया। पर वही जाहिरा ‘आलिंगन’ ‘कॉलगर्ल’ क्षितिज जैसी फिल्मों में हीरोइऩ बनकर कुछ ऐसे सीन भी देती है जिन्हें हम पूर्ण नही तो ‘हाफन्यूड’ तो कह ही सकते है और फिर ये वही जाहिरा है जो ‘धर्मात्मा’ के बाद उसमें किये गये सीन के मुताबिक इसी तरह के सीनवाली फिल्मों के प्रपोजल भी ठुकार देती है। आखिर बात क्या है? आखिर जाहिरा किस तरह की भूमिकाएं चाहती है?

इसी संदर्भ में जब ‘धर्मात्मा’ की चर्चा चली तो जाहिरा ने बड़े खेद के साथ कहा कि यह फिल्म मैंने बड़े बजट की बड़े बैनर वाली फिल्म समझ कर और अपनी महत्वपूर्ण भूमिका सुनकर स्वीकार की थी। पर बाद में क्या हुआ आप देख ही रहे हैं ? केवल वे सीन रह गये हैं। रोल कहीं भी नही हैं। उससे भ्रम होना स्वाभाविक ही है। शायद इसी भ्रम से इस तरह के सीन वाली अनेक फिल्मों के प्रपोजल धर्मात्मा के बाद आये, पर मैंने ठुकरा दिये। उसके पहले ही अन्य फिल्मों में मैंने कहानी के अनुसार हीरोइन के रोल साहसिक और कुछ कुछ उत्तेजक दृश्यों के साथ पर उन फिल्मों में रोल तो जुड़े है।

पर गैम्बलर के बाद वैसी फिल्मों में आखिर काम करना स्वीकार ही क्यों किया ? मेरे इस सवाल पर जाहिरा ने गहरी सांस खींचकर, बड़ी उदासीनता और गहरे क्षोभ के साथ कहा यहां नये कलाकारों को उभरने के लिए सही मदद नही मिलती। कोई मदद नही करता। मैं भी हीरोइन बनने के बाद अकेली पड़ गयी मुझे कोई खास रेस्पॉन्स नही मिला। चूंकि फिल्मों में आ चुकी थी इसलिए अस्तित्व के लिए, संघर्ष करते हुए कुछ सीमा तक वेल्यूज के साथ, समझौता करना पड़ा भारत में आने के बाद फिल्मों में हीरोइन बनने के लिए मुझे जितना संघर्ष करना पड़ा वह मैं ही जानती हूं। यहां मुझे नर्गिस तथा चंद फिल्मवालों के अलावा जानता ही कौन था? और तो और मुझे ‘गैम्बलर’ से भी कोई अधिक लाभ नही हुआ।

जाहिरा के इस कथन के साथ उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें मेरी आंखो के सामने उभर उठी लंदन प्रवास के समय अपने कन्जर्वेटिव परिवार की इच्छा के खिलाफ उन्होंने टी.वी कामर्शियल प्रोग्राम में भाग लिया और चंद पत्रिकाओं के लिए मॉडलिंग की इन्ही दिनों वे पेरिस घूमने के लिए गयी थी। वहीं उनकी मुलाकात फिल्मों से संबंधित मैड मोइसिले सैपिंग नामक महिला से हुई जिन्होंने अपने प्रभाव से उन्हें ‘007’ गर्ल नामक फिल्म में काम दिलाया उस फिल्म में कार्य करने के बाद उन्हें कुछ संतोष मिला और आगे भी कार्य करने की प्रेरणा मिली। उसके बाद जब वे लन्दन लौटी तो वहीं एक समारोह में नरगिस से मुलाकात हुई। इसी मुलाकात का परिणाम था कि जब वे कोलंबो जाते हुए भारत आयी तो अचानक बिना किसी योजना के ‘गैम्बलर’ के लिए हीरोइन के रूप साइन कर ली गयी। पर दुर्भाग्य से फिल्म बनते-बनते वे साइड हीरोइऩ ही रह गयी।

मैंने कहा सुना है इस तरह की ट्रेजेडी आपके साथ मेरे सरताज और जिंदादिल में हुई। क्या यह सच है?
जाहिरा ने चौंक कर कहा आपको किसने बताया ? यह कह कर उन्होंने मेरी शंका की एक तरह से पुष्टि कर दी। पर उन्होंने फिर सतर्क होकर कहा जिंदादिल में उनके निर्देशक सिकंदर खन्ना के साथ किन्ही कारणों से कुछ गलतफहमी हो गयी थी, वह अब दूर हो गयी है। मेरे सरताज में शूटिंग की डेट्स को लेकर कुछ हंगामा हो गया था। मैं उस बारे में कोई बयान नही देना चाहती और न किसी का इगो हर्ट करना चाहती हूं।
कुछ भ्रम और भी थे। मैंने उऩके बारे में कई उलूल-जूलूल बातें सुन रखी थी। मैंने कहा सुना है ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में राजकपूर और राजेश खन्ना के साथ नौकरी में हीरोइन की भूमिका मिल जाने के बाद अब आपको कुछ घमण्ड हो गया है और आप लाखों रूपयों की डिमांड करने लगी हैं और शूटिंग डेट्स के लिए निर्माताओं को परेशान करती है… मैं अपनी बात पूरी भी नही कर पाया कि जाहिरा इस तरह चौंकी जैसे बिजली छू दी गयी हो। उन्होंने तपाक से कहा यदि लाखों रूपये लेने वाली बात होती तो आज मेरा घर ऐसा नही होता यह कहकर वे भीतर ही भीतर कुछ सजल हो उठी। वाकई मैं उसका छोटा-सा फ्लैट एक दम साधारण लग रहा था। किसी तरह की सजावट नही थी। एक तख्त था, चंद कुर्सियां दीवारें सूनी-सूनी थी कमरे के कोने मे पुराने डिजाइन ग्रामोफोन रखा था जो यह इंगित कर रहा था कि जाहिरा को संगीत का कितना शौंक है और आज नहीं तो कल इसी घर में हीरोइन जाहिरा की उपलब्धियों की खुशी में थिरकते संगीत के साथ पार्टियों भी होंगी। जाहिरा ने जब चोटी की हीरोइन की बात कही तो उसी सूत्र को पकड़ कर मैंने पूछा आखिर आप किस तरह की फिल्मों में किस तरह के रोल करना चाहती है?

जाहिरा ने बड़े उत्साह से कहा मैं कामर्शियल फिल्मों में काम करना चाहती हूं मेरी फेवरेट हीरोइन स्व. गीताबाली है आज तक उसका स्थान कोई न ले सका मैं वही जगह लेना चाहती हूं और हां, मुझे कुछ हल्के-फुल्के रोल अधिक पसंद है।

मैंने कहा मैं एक बात पूछ सकता हूं..?
शायद वे मेरा आशय समझ गयी और हल्का सा मुस्कुरा दी मैंने कहा सुना है इस फिल्म के निर्देशक अवतार भोगल के साथ इंग्लैण्ड से आपकी कन्टीन्युटी चली आ रही है क्या यह सच है?
जाहिरा ने बड़ी भावुकता से कहा हम दोनों दोस्त है और हमारी दोस्ती एकदम प्लेन दोस्ती है जिंदगी में क्या साफ सुथऱी दोस्ती एक पुरुष और स्त्री मे नही हो सकती है? इस तरह का सोचना ही गलत है।

इस वक्त आप की उल्लेखनीय फिल्में कौन-सी है जिनसे आपको उम्मीद है कि आपकी सही इमेज बनेगी?

जाहिरा ने कुछ याद करते हुए बताया, गोयल साहब की ‘आदमी सड़क’ का जिसमें मेरे साथ शत्रुघ्न सिन्हा और विक्रम है। ‘यारी दुश्मनी’ में मैं सुनील दत्त और विनोद मेहरा के साथ कार्य कर रही हूं। अन्य फिल्में है ‘मेरे सरताज’ ‘दोस्ती की कीमत’ ‘शत्रुता’ ‘दो बेशरम’ आदि हाल ही मैं मुझे निर्माता जुगल किशोर, एफ.सी मेहरा और सोहन लाल कंवर ने अपनी अगली फिल्मों के लिए साइन किया है। ‘आलिंगन के बाद मेरे फिल्मी जीवन ने जो नया मोड़ लिया है उसका वास्तिवक रंग तो नौकरी के बाद ही खिलने वाला है। मैं जिन-जिन गलत फहमियों का शिकार हुई हूं, वे सब अपने आप साफ हो जायेंगी। इस वक्त मैं अधिक कुछ नही कहना चाहती।

हमारा इंटरव्यू लगभग समाप्त हो चुका था फिर भी उठते-उठते मैंने पूछ ही लिया, फिल्मी पत्र-पत्रिकाओं की गॉसिपिंग आप पसंद करती है या नही?
जाहिरा ने मुंह बिगाड़ कर कहा, यह गॉसिपिंग नही गाली देने वाली बात है उसे कौन पसंद करेगा ? हां, यदि हंसी मजाक और दिल को गुदगुदाने वाली गॉसिपिंग हो तो उसे सब पसंद करेंगे यह कह कर उन्होंने ‘मायापुरी’ के ताजे अंक उठाये और शरारतें वाले कॉलम की और ध्यान दिलाते हुए कहा, इस पढ़ने में बड़ी मजा आता है। संयोग को बात देखिये कि पिछले एक अंक में इसी कॉलम पर मेरी फोटो छपी है और शरारत के बतौर मेरे मुंह से जो कहलवाया गया है। वह लगभग वही डायलॉग है जो फिल्म में मैंने बोला है। क्या ऐसी चीज पढ़ कर मज़ा नही आयेगा?
जाहिरा की बात पर हमें भी मजा आ गया और हमें इस बात की खुशी हुई कि फिल्म वाले अब ‘मायापुरी’ बड़े शौंक से पढ़ने लगे है।


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Mayapuri

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