में अफवाहों से बचना चाहती हूं – डिंपल खन्ना

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मायापुरी अंक 45,1975

इस बात को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ। जब फिल्म ‘बॉबी’ के रिलीज के आस-पास फिल्मी जगत के अंदर और बाहर यह खबर बड़े जोरों से उड़ी कि ‘’बॉबी” कि हीरोइन डिम्पल राजकपूर की बेटी हैं।

तथाकथित कहानी को लोगों ने बढ़ा चढ़ाकर यहां तक बयान किया कि फिल्म “बरसात” के निर्माणकाल में चल रहे नरगिस से राजकपूर के प्रेम ने एक बच्ची को जन्म दिया था जिसे सारी दुनिया से गुप्त रख कर यह बच्ची राजकपूर ने अपने एक मित्र चुन्नी लाल कपाड़िया को सौंप दी। जो बाद में जवान होकर डिम्पल के नाम से पहचानी गयी।

इस अफवाह का खंडन राजकपूर, चुन्नी लाल कपाड़िया और खुद डिम्पल भी आज तक कई बार कर चुके हैं। उस रोज जब हम राजेश खन्ना से मिलने “आशीर्वाद” पहुंचे तो डिम्पल से भी मुलाकात हो गयी। इधर-उधर की बातचीत के बीच जब अचानक उस अफवाह का जिक्र भी आ गया तो हमने एक बार फिर डिम्पल से स्पष्टीकरण पा लेना चाहा।

उत्तर में डिम्पल के चेहरे पर एक नटखट मुस्कुराहट फैल गयी। उन्होंने किसी शरारती बच्चे के से अंदाज में जवाब दिया, अजी साहब मैं एक राजकपूर की ही नही प्राण की भी बेटी हूं।

डिम्पल के इस अटपटे उत्तर पर हम चकित रह गये कि आखिर यह कहना क्या चाहती हैं? हमारे विस्मय को डिम्पल तुरंत भांप गयीं, और अपनी बात स्पष्ट करते हुए बोलीं।

मैं सच कहती हूं प्राण मेरे पिता हैं और राजकपूर भी बल्कि एक नही मैं तो तीन पिताओं की एक पुत्री हूं।

लीजिये साहब, अब हमारी हैरत और भी बढ़ गयी। पल भर को लगा कहीं इस लड़की का दिमाग तो नही चल गया है। हमने बात साफ करने को डिम्पल से अनुरोध के लहज़े में कहा, प्लीज, पहेलियां ना बुझाईये साफ-साफ बताइये कि आप कहना क्या चाहती हैं?

मेरे इस वाक्य ने डिम्पल को कुछ गंभीर कर दिया। वह अपनी कुर्सी पर ठीक ढंग से बैठते हुए बोलीं जिस नजरिये से मैंने अपने को तीन पिताओं की एक पुत्री बताया है, वह बिल्कुल सही है लीजिये आप भी सुनिये।

तीन पिताओं में से मेरे एक पिता है श्री चुन्नी लाल कपाड़िया। उन्होंने तो वास्तव में मेरी मां से विवाह किया था और मेरा जन्म भी इस विवाह के ठीक निश्चित समय के बाद हुआ। इस तरह स्वाभाविक रूप से श्री चुन्नी लाल मेरे वास्तविक पिता हैं।

यह बात गलत है कि मैं नरगिस और राज की प्यार की निशानी हूं। फिर भी यह सच है कि मैं राजकपूर की बेटी हूं। यह जरूरी नहीं कि सिर्फ जन्म देने वाले को ही पिता कहा जाए। इस संसार में ऐसे लोग भी बहुत मिलेंगे जो अपने जन्म देने वाले पिता को पिता कहना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं।

जब से मैंने होश संभाला है राजकपूर जी को अपने घर आता जाता देखा। वह मुझे उस उमर से प्यार करते हैं जबकि मैं नन्ही मुन्नी बच्ची थी।

इसी प्यार ने मेरे मन में उनके प्रति एक श्रद्धा, एक प्यार का एहसास भर दिया। और इसी कारण में कभी उनको अपने वास्तविक पिता से कम न समझ सकी और वे भी मुझे अपनी बेटी ही मानते हैं। सब जानते हैं कि मेरे विवाह में उन्होंने मेरा कन्यादान अपने ही हाथों से किया था।

अच्छा, डिम्पल जी राजकपूर आपके पिता हैं, यह तो हम मान गये। मगर प्राण साहब से आपका किस तरह से पिता का नाता है?

इसके पीछे भी एक कहानी है। प्राण साहब को देखा तो कई बार था फिल्मों में भी और फिल्मों के बाहर भी। मगर पहली बार निकट आने का अवसर मिला ‘बॉबी’ के निर्माण काल में पहले पहल तो मुझे वे कुछ अच्छे नहीं लगे, मगर फिर धीरे-धीरे उनके प्रति मेरी धारणा बदलती गयी। और बहुत जल्द ही मैंने यह महसूस किया कि पर्दे की दुनिया से बिल्कुल अलग अपने निजी जीवन में वे एक बेहद नेक, शरीफ और खुले-दिल के इंसान हैं।

शुरू-शुरू में वे भी मुझ से ज्यादा बोल-चाल नही करते थे। लेकिन जब हमारा परिचय घनिष्ठ हो गया तो कुछ ही दिनों में मुझसे ऐसे घुल-मिल गये कि हंसी-मजाक भी करने लगे।

समय के साथ-साथ एक अज्ञात भावना के कारण प्राण जी के प्रति मन में एक प्यार से जन्म ले लिया और इसी तरह एक दिन न जाने किस भावना से प्रेरित होकर मैंने उनसे कहा कि वह मुझे अपनी बेटी बना लें। और उन्होंने मुझे अपना बना लिया और अब भी मानते हैं। इस प्रकार प्राण साहब भी मेरे लिये एक पिता से कम नही होसकते।

चंचल परंतु भावुक डिम्पल के इस अनूठे तर्क ने हमें यह मानने पर विवश कर दिया कि वह सचमुच एक नही, तीन-तीन पिताओं की बेटी हैं।

संभव था हम इस मुलाकात में डिम्पल से कुछ अन्य प्रश्न करते लेकिन उनकी इस रोमांचकारी बातचीत के चक्कर में न पड़ते हुए वहां से अपने घर चले आये।


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Mayapuri

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