सिर्फ केबरे नही करना मुझे – जय श्री.टी.

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jayshree-t

 

मायापुरी अंक 48,1975

रिचबुरू टी, लिप्टन टी, ब्रुक बांड टी के बाद जय श्री टी. का नाम सुना तो ऐसा लगा कि कोई नई चाय मार्केट में आई है। लेकिन बहुत जल्द यह गलतफहमी दूर हो गई कि जय श्री टी. किसी चाय का नहीं बल्कि नृत्यांगना कलाकार का नाम है। जब उनकी फिल्म देखी तो पता चला कि जिस तरह रिचबुरू टी जिस्म को गर्माती है। जय श्री टी भी उसी प्रकार अपने उत्तेजक नृत्य से देखने वालों को आंखो से शराबे हुस्न पिलाकर खूब गर्म तथा मादक कर देती हैं। यही कारण था कि उनके सामने पुरानी चाय (ओह! क्षमा करना पुरानी नृत्यांगनाएं) ठंडी पड़ गईं वरना फिल्म इंडस्ट्री में एक न एक नृत्यांगना छाई ही रहती थी। कभी कुक्कु का जमाना था। उनका दौर खत्म हुआ तो कुमकुम आ गई। कुमकुम की मांग बढी तो हेलन आ गई लेकिन फिल्मों की बढ़ती हुई संख्या के हिसाब से अकेली हेलन उसे पूरा नहीं कर सकती थी। इसलिए लोगों ने गोश्त की नई नई दुकानें खोजनी शुरू की। और इस तरह हेलन के मुकाबले में फरियाल, पद्मा खन्ना और जयश्री की दुकानें भी सज गई। और अब एक दूसरे को पीछे छोड़ने के चक्कर में अधिक से अधिक शारीरिक प्रदर्शन में व्यस्त हो गईं जय श्री.टी. ने कम से कम कपड़ों में ज्यादा से ज्यादा गर्मा गर्म नृत्य करके अपनी दुकान चला ली।

कुछ दिन पहले ‘मायापुरी’ के लिए एक लेख लिखने के संबंध में जयश्री.टी.के घर जाने का अवसर मिला कैबरे डांसर जयश्री.टी को मैं देखती रह गई। वह उस समय सिर से पैर तक साड़ी में छुपी हुई थी। और साई बाबा की पोथी का पाठ कर रही थी। उसके साथ ही मीना टी. भी थी दोनों को देखकर अंदाजा करना मुश्किल है कि कौन बड़ी है, कौन छोटी? कौन मीना है कौन जयश्री? मैंने उनसे कहा, आप दोनों को साथ देख कर अक्सर लोगों को धोखा होता होगा।

होता तो है लेकिन क्या करें?कभी कभार कोई मुझे ही बड़ी बहन बना देता है। हालांकि मैं छोटी हूं और मीना बड़ी है। जयश्री टी. ने कहा। आप दोनों की सूरतें इतनी मिलती हैं किंतु अभिनय में जमीन आसमान का अंतर है ऐसा क्यों है? मीना को सोशियल फिल्मों में अच्छी भूमिकाएं मिल रही हैं आप को केवल कैबरे डांसर के ही रोल मिलते हैं। मैंने उनसे कहा था।

यह लाइन ही ऐसी है। शुरू में जो कोई रोल कर ले, उस पर वैसी ही छाप लग जाती है। चंदा और बिजली ने कैबरे किया तो बस कैबरे की छाप लग गई। वरना मैं तो बचपन से डाक्टर बनने के सपने देख रही थी मजबूरन एजुकेशन बीच में ही अधूरी छोड़नी पड़ी। यहां आदमी सोचता कुछ है और होता कुछ है। फिल्मों में आने के बाद हीरोइन बनने की सोची तो कैबरे डांसर से आगे न बढ़ सकी। बड़ी मुश्किल से ‘आकरा’ लड़की में हीरोइन का रोल किया है। देखो फिल्म रिलीज़ हो तो पता चले कि मेहनत कहां तक सफल हुई है। और जनता नए रूप में कहा तक पसंद करती है? जयश्री टी ने बताया था।

उस दिन जयश्री.टी. से अधिक बातें नहीं हो सकी। ‘’आकाश मेरी मुट्ठी में’’ के लिए लेख डिस्कस किया और शूटिंग करने चली गई थी। इसके बाद एक दिन जुहू में ‘अजब तेरी सरकार’ की शूटिंग में मिल गई। उस दिन उनका लिबास अधिक सैक्सी न था। इसलिए मैंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए उनसे कहा था।

यह आज मै क्या देख रहा हूं? क्या कैबरे डांस करना बंद कर दिया है?

नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। इसमें रोल ही ऐसा है। जयश्री टी. ने बताया।

आपके नृत्य बड़े उत्तेजक होते हैं। आप की मेल में कौनलोग इस बारे में लिखते हैं? मैंने पूछा।

जो लोग ऐसे नृत्य पसंद नही करते, उनको शिकायत है कि मैं कम से कम कपड़े पहनकर शरीर प्रदर्शन क्यों करती हूं? हालांकि वास्तविकता यह है कि मैं शरीर की रंगत का एक दम टाइट लिबास बनवाती हूं। देखने वाले समझते हैं कि मैंने कम से कम कपड़े पहने हुए हैं। जयश्री ने कहा था।

लेकिन जिस चीज को आप पसंद नहीं करती तो इस प्रकार जनता को धोखा देने से क्या लाभ?

दरअसल यह सब निर्माताओं की मेहरबानी है। वह बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाने के लिए अधिक से अधिक सैक्सी दृश्य रखना अपना जन्म सिद्ध अधिकार मानतेहैं। इसलिए जब ऐसी सिच्यूएशन आती है तो उनकी मांग यही होती है कि ऐसा डांस करो कि तुम्हारी वाह-वाह हो जाए। फ्लां फिल्म में फ्लां ने क्या गर्मा गर्म डांस किया था। अरे वह तो बिल्कुल ही नग्न दिखती थी। उससे ज्यादा गर्म डांस होना चाहिए। और यहां चूंकि कम्पटीशन बड़ा सख्त है इसलिए निर्माता के कहने पर जनता को धोखा देना ही पड़ता है जयश्री टी. ने विनम्र स्वर में कहा था।

कभी आपको ऐसे रोल करने में शर्म या झिझक भी आई है जिससे शूटिंग रूकी हो! मैंने पूछा था।

अभिनय में जिसने की शर्म, उसके फूटे कर्म! यह तो लाइन ही ग्लैमर की है। बड़ी-बड़ी हीरोइनें नहीं शर्माती और किसी न किसी बहाने से अंग प्रदर्शन करती रहती हैं। तो भला हमें मिनी स्कर्ट, बाथिंग कास्यट्यूम आदि पहनने पर क्या आपत्ति हो सकती है? हां, जिस दिन हीरोइन बन जाऊंगी और अपना स्थान बना लूंगी तो ऐसे रोल करने छोड़ दूंगी। जयश्री ने बताया था।

उस दिन भी अधिक बातचीत न हो सकी थी। और दूसरे दिन जब में वहां पहुंची थी तो शूटिंग ही कैंसल हो गयी थी। अब इंटरव्यू करना चाहा तो पता चला कि वह हैं नहीं, बाहर गई हुई है। जयश्री घर से बाहर जरूर गयी हैं किंतु फिल्म इंडस्ट्री से बाहर नहीं हुई हैं। अपने गर्मागरम नृत्यों से दर्शक के दिमागों पर छा गई हैं। किंतु उनके दिलों पर कब्जा

नहीं कर सकी हैं। अब वह दिलों पर कब्जा करना चाहती हैं। ‘कैद’ में महमूद के साथ अभिनय करके उन्होंने शुरूआत तो कर दी है। देखें इसका अंत कहां होता है?और क्या होता है?


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Mayapuri

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