महमूद कैद में नही रह सकता

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mahmood

मायापुरी अंक 7.1974

हॉराइजन होटल में आत्मा राम की फिल्म ‘कैद’ की शूटिंग चल रही थी। मेहमूद खाकी कमीज, सफेद पाजामा और सिर पर खाकी टोपी लगाए बिल्कुल ही बैरा लग रहा था। लंच का टाइम खत्म हो गया था। शॉट की तैयारी चल रही थी। मेहमूद गप्पें मारने के मूड में था। हमने उसे बातें करने के लिए जा घेरा। दुनिया का मेला’ और ‘पाकेट मार’ में आपके काम की बड़ी तारीफ है। क्या इसके बाद आप पर अनुबधों की वर्षा शुरू हुई? हमने पूछा। वर्षा होने के लिए जानी मेरा नाम, अमीर गरीब, बॉबी, गीता मेरा नाम की तरह मेरी किसी फिल्म की सुपर हिट होना जरूरी है। कुछ फिल्में मिली भी हैं किन्तु नये हीरोज के साथ हालांकि राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, फिरोज आदि चाहते तो मेरे पास कभी काम की कमी नही होती। लेकिन इन लोगों ने कभी अपने निर्माताओं से काम के लिए कहा नही और अगर कहते तो उनकी बात टाली नही जा सकती थी, मेहमूद ने किसी कदर निराशा भरे स्वर में कहा।
आखिर वे लोग आपको सिफारिश करने से क्यों कतराते है? क्या आप से संबंध ठीक नही है? हमने पूछा।
“नही यह बात नही हैं। वे लोग ऐसा समझते हैं कि मैं उनके साथ काम करते हुए सीन उड़ा ले जाता हूं। इसलिए शायद यह काम नही करना चाहते.” मेहमूद ने कहा।
“क्या आप ऐसा समझते है कि हर फिल्म में कॉमेडी होनी चाहिये?” हमने पूछा। मैं ऐसा नही समझता किन्तु कॉमेडी के बिना फिल्म अधूरी समझी जाती है। खाने में जिस तरह मसाला चार चांद लगा देता है। उसी तरह फिल्म की सफलता में कॉमेडी भी अपना योगदान करती हैं और इसको आप भी मानते होगें “दुनिया का मेला” इस की ताजा मिसाल है.” मेहमूद ने कहा। आपका साथी कॉमेडियन आई. एस जौहर अभिनेता, निर्माता, निर्देशक के बाद इम्पा का अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते है? हमने पूछा।
“अध्यक्ष या ऐसे किसी पद पर चिपकने की मेरी कभी इच्छा नही हुई। मैं तो अभिनय के सिवा कोई ओहदा नही चाहता। मैं तो बस अन्तिम सांस तक अभिनय करते करते मरना चाहता हूं?” मेहमूद ने कहा।
‘लेकिन हमने तो सुना था कि आप अभिनय से अधिक घोड़ो की रेस में लेते क्या यह सच है ? हमने पूछा।
“रेस तो मेरी जिंदगी है ? मेहमूद तुरंत बोला।
“जिंदगी तो कभी अरुणा ईरानी भी थी किन्तु अब वह आपके साथ नजर नही आती इस अलहदगी का क्या कारण है ? हमने पूछा।
“हर लड़की शादी करके अपना घर बसाना चाहती है, गोद में बच्चे खिलाना चाहती है। अरुणा भी यह सब चाहती थी और मैं अपनी पत्नी की आज्ञा बिना अरुणा को नही दे सकता था। अपनी पत्नी के प्रेम के कारण अरुणा से संबंध विच्छेद करने पड़े लेकिन अरुणा के लिए मेरे दिल में जो मुहब्बत और इज्जत पहले थी वही आज भी है.” मेहमूद ने भावुक स्वर में कहा।


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