मैं सुरैया जैसा हीरोइन बनना चाहती हूं सुलक्षणा पंडित

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मायापुरी अंक 7.1974
नटराज स्टूडियो में फिल्म “संकोच” की शूटिंग के बीच सुलक्षणा पंडित से मुलाकत हुई। हमने मौका पाकर उससे कहा।
“सब हीरोइनें मीनाकुमारी ,वहीदा रहमान, विम्मी आदि बनने की आकांक्षा लेकर फिल्मों में आती हैं किन्तु सुना है आप सुरैया बनने के लिए फिल्मों में आई। ऐसी क्या बात है?
“मैं सुरैया जैसी एक्ट्रैस नही सुरैया जैसी हीरोइन बनना चाहती हूं सुरैया एक्ट्रेस चाहे कैसी हो किन्तु उसकी आवाज लाज़वाब थी। और अपने गाने आप ही गाती थी। यह तो आपको मालूम ही होगा मैं भी अपनी फिल्मों के गाने आप ही गाना चाहती हूं सुलक्षणा
बताया। लेकिन हमने सुना था कि पिछले दिनों आप की फिल्म “बन्डल बाज” के लिए आशा भोंसले की आवाज में गाना टेप किया गया है। क्या यह सही है? हमने कहा।
“जी हां, यह सही है.” सुलक्षणा ने ठंडी सांस छोड़ते हुए कहा मैं कोशिश कर रही हूं कि पूरे नही तो कुछ गाने मुझे मिल जाएं। मैनें गाने की वाकायदा शिक्षा ली है।
मेरे पूरे परिवार का संगीत ओढ़ना-बिछौना रहा हैं मैंने बतौर प्लेबैक सिंगर’ अपना फिल्मी कैरियर शुरु किया था। अभिनेत्री के रूप में संकल्प’ पहली फिल्म थी। आज अभिनेत्री के तौर पर दर्जन भर फिल्में है किन्तु पार्शव गायिका के रूप में एक आधी फिल्में वह भी छोटे संगीतकारों की-जैसे “ईद का सलाम” सुलक्षणा ने बताया।
“आज जबकि किशोर कुमार टाप का प्लेबैक सिंगर है। क्या वह आप के लिए सिफारिश नही करता ? या आप सिफारिश नही चाहती? हमने कहा, “किशोर के साथ मिलकर आप अपना ग्रुप बना सकती है?
“इस सिलसिले में किशोर कुमार ने मेरी कभी भी सिफारिश नही की। दरअसल फिल्म इंडस्ट्री में भी बड़ी गंदी ‘पार्टी-पॉलिटिक्स’ चलती है। किसी नए सिंगर को लोग कदम जमाने से पहले ही उखाड़ फेंकते है। वे लोग कैसे ओछे हथकंडे इस्तेमाल करते हैं अगर मैं बताऊं तो शायद आप यकीन न करें, यही कुछ मेरे साथ हुआ है। अगर संगीतकारों से निर्माता मनवा सके तो मैं अपने बल पर सुरैया बनकर दिखा दूंगी, किशोर के साथ इतने दिन बरबाद किये किन्तु सिवाए बदनामी के कुछ न मिला, अब मेरे पास वक्त नही है कि पीछे की तरफ मुड़कर देखू.” सुलक्षणा ने कुछ इस तरह उत्तर दिया जैसे किशोर के जिक्र से कोई दुखती रग दब गई हो।
रणधीर कपूर सगंम आर्टस् की गई(बेनाम) फिल्म की फिल्मालय में शूटिंग कर रहा था। वह बातचीत के मामले में रिजर्व’ किस्म का आदमी है लेकिन हमने किसी तरह उसे घेर ही लिया और उससे पूछा, “लोग आपका नाम बार-बार किसी न किसी हीरोइन के साथ जोड़ते रहते है। इससे आपके वैवाहिक जीवन पर क्या कोई असर नही पड़ता ?
“अगर पत्नी फिल्म वाली न होती तो बड़ा असर पड़ता किन्तु वह खुद हीरोइन रह चुकी है। इसलिए जानती है कि ऐसी बातों पर यकीन करना नही चाहिए.” रणधीर बोला।
“अगर आप सन्सियरली अपना काम करें तो रोमान्टिक हो जाना स्वाभाविक है। लेकिन वह वास्तव मे दिखावा हो होता है। असली रोमांस के लिए तो किसी हीरो के पास वक्त नही होता.” रणधीर कपूर ने बताया।
“तब आये दिन नीतु सिंह, परवीन बॉबी रेखा आदि के साथ आप किस तरह रोमांस का समय निकालते है ?” हमने पूछा।
‘वे रोमांस नही करते। वह आपके पत्रकार भाई अपने पत्र-पत्रिकाओं में करवा देते है। अब मेरी रेखा के साथ सबसे ज्यादा फिल्में है तो भाई लोगों को यह लिखने में देर नही लगती कि मैं रेखा से प्यार कर रहा हूं.इसलिए किसी और हीरोइन की बजाए रेखा को ही फिल्म में हीरोइन लेने के लिए कहता हूं हालांकि भला हीरो की क्या हिम्मत है जो वह अपने लिए हीरोइन सजेस्ट करे। रेखा एक खुशमिजाज लड़की है. उसके साथ काम करने में सजा आता है। बस इससे अधिक और कुछ नही है.” रणधीर कपूर ने अपने रोमांस का खन्डन करते हुए कहा।
पिछले दिनों एक फिल्म के मुहर्त पर नरगिस से भेंट हो गई। हमने छूटते ही नरगिस से पूछा।
‘सुना है आप फिल्मों में दुबारा काम शुरू कर रही है क्या यह सही है ?
‘मैं पहले भी कहा था कि यदि मुझे कोई ऐसा रोल मिला जो बहुत असाधारण होगा और जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी का ताना-बाना बुना होगा तो ही काम करूंगी अभी तक मुझे ऐसा रोल नही मिला है। ऋषिकेष कह रहे है। जब ऐसी कोई बात होगी तो वह छुपी थोड़े ही रहेगी ? इतना जरूर है कि फिलहाल मैं किसी फिल्म में काम नही कर रही हूं. बस दत्त साहब का काम देख रही हूं। इसमें उनकी हेल्प करती रहती हूं। नरगिस ने बताया,
क्या आप अपने पुत्र और पुत्री को फिल्मों में काम करने के लिए प्रोत्साहित नही दूंगा किन्तु हताश भी नही करूंगी। वह उच्च शिक्षा लेने के बाद आजाद होंगे कि वह जो जी चाहे करें मैं दूसरों के पुत्र-पुत्रियों को भी अपने तौर पर कभी यह लाइन अपनाने को सलाह नही दूंगी,’ नरगिस ने कहा।
‘क्या आप भविष्य में अपनी मां की तरह निर्देशिका बनने का इरादा रखती हैं ? हमने पूछा।
‘नही मैं तो सिर्फ अभिनय करना जानती हूं’ नरगिस ने कहा।
‘आप अपनी फिल्मी जिंदगी का (अभिनय के हिसाब से) किस रोल को सबसे अधिक श्रेष्ठ मानती है’ हमने पूछा।
‘मैंने फिल्म-लाइन में पच्चीस-छब्बीस वर्ष काम किया है। इस अर्से में बनी ‘मदर इंडिया’ अभिनय के हिसाब से मेरी सबसे अच्छी फिल्म थी। इसी तरह मेरी आखिरी फिल्म ‘रात और दिन’ भी अभिनय और पात्र के हिसाब से एक बेहतरीन फिल्म थी’ नरगिस ने बताया।
आज की फिल्मों में अनावश्यक रूप से नयेपन के नाम पर सेक्स और नग्नता बहुत घुस आई है। यह हानिकारक है। अगर यह चीज कहानी में जरूर आए तो अच्छी लगती है जैसे चेतना’ चेतना’ में मुझे रेहाना का काम पसन्द आया और फिल्म भी। किन्तु जब तो केवल दर्शकों के जज्बात से खेल रहे है, नरगिस ने कहा।


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Mayapuri

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