वहीदा रहमान की शादी

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waheeda rehman husband shashi rekhi

 

मायपुरी अंक 3,1974

वहीदा रहमान की शादी भी एक समस्या बन कर खड़ी हो गई थी। लोग कहने लगे थे कि वहीदा क्या कुंवारी ही रह जाएगी ! फरीद अहमद सिद्दीकी के बाद उसे अब वर नही मिलेगा। लेकिन अचानक समाचार पत्रों से वहीदा रहमान की शादी की खबर पढ़ कर लोग हैरतजदा रह गए क्योंकि वहीदा रहमान की शादी एक ऐसे हीरो से हुई थी जो फिल्मों में फ्लॉप होने के पश्चात लाइन छोड़कर चला गया था वह है ‘शगुन का फ्लॉप हीरो कमलजीत ! (जिसका नाम कभी कुमकुम और कल्पना कार्तिक श्रीमती देवआनंद से जोड़ा गया था).

हम शादी की खबर पढ़ कर वहीदा से फोन पर समय लेकर मिलने गए। वहीदा रहमान अपने नये-नये पति कमलजीत के साथ कही जाने की तैयारी कर रही थी। हमने उससे कहा, आपने यह अचानक बैठे बिठाये शादी का प्रोग्राम कैसे बना डाला ? इसमें किसी प्रकार के फ्रस्ट्रेशन की तो दखल नही ?

फ्रस्ट्रेशन काहे की ? फरीद अहमद को मैं नही जानती थी। दूसरों की बातों पर विश्वास करके धोखा खा गई थी। कमलजीत और मैं ‘शगुन’ के समय से एक दूसरे को जानते थे। पिछले दिनों वह बम्बई आए तो बातों-बातों में शादी का प्रस्ताव रख बैठे। मैंने बहनों से मशवरा किया और शादी का फैसला कर लिया। मैं वैसे भी शोर और हंगामे को पसन्द नही करती इसलिए खामोशी से शादी कर डाली। आखिर एक न एक दिन शादी तो करनी ही थी। वहीदा रहमान ने अपने विचार जाहिर करते हुए कहा।

‘अब आगे आपका क्या प्रोग्राम है? क्या आप फिल्मों में काम जारी रखेंगी ?हमने पूछा।

‘मैं अपनी निर्माणाधीन फिल्मों को पूरा करने के पश्चात् लाइन छोड़ दूंगी और कनाडा में सैटल हो जाऊंगी। इस समय मैं नडियाडवाला की एक फिल्म (हीरो अमिताभ) ‘पतझड़’ (हीरो अमिताभ ‘आजकी राधा’ (महेन्द्र सन्धु) और यश चोपड़ा की फिल्म ‘कभी कभी’ में भी काम कर रही हूं ‘कभी कभी’ की शूटिंग मैं अक्तूबर में करूंगी, वहीदा रहमान ने बताया।

‘अपने फिल्मी कैरियर में आपने बेशुमार फिल्मों में काम किया होगा। क्या आप बताएंगी कि आप अपने कैरियर की बेहतरीन फिल्म कौन-सी मानती है और किस फिल्म ने आपको सबसे अधिक निराश किया है ? हमने सवालों के सिलसिले को समेटते हुए पूछा।

‘मैं अपने कैरियर की बेहतरीन फिल्म ‘गाइड’ को समझती हूं उसे मैं कभी न भूल सकूंगी और हां ‘साहब बीबी और गुलाम’ भी एक अविस्मरणीय फिल्म थी। वहीदा रहमान ने कहा और ‘फागुन’ वह फिल्म है जिसने मुझे बेहद निराश किया। मुझे बेदी साहब से ऐसी उम्मीद नही थी। लेकिन क्या करें, बेदी साहब अच्छे फिल्म मेकर नही है इसलिए ‘फागुन’ में निराशा हुई. हालांकि वह एक बेहतरीन फिल्म बन सकती थी, वहीदा ने बताया।


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Mayapuri

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