नवीनतम की तलाश में नवीन निश्चल

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Navin Nischol 2

Navin Nischol

मायापुरी अंक 7.1974

फिल्म कलाकारों में नई पीढ़ी और पूना संस्थान को मान्यता दिलाने का श्रेय नवीन निश्चल को है से अभिनय प्रशिक्षण लेकर आये युवकों में वह पहला चेहरा का मार्ग प्रशस्त किया। सावन भादों में मोहन सहगल ने सर्वप्रथम उसे परदे पर रेखा के साथ प्रस्तुत किया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस हिट साबित हुई फलत नवीन और रेखा चल निकले उन्हें फिल्में मिलने लगी लेकिन फिल्मों की भीड़ में नवीन खो गया और ऐसे रोल अपना बैठा जिनसे उसको इमेज बनने की बजाय बिगड़ने लगी। फिल्मों सावन भादो के बाद नवीन की परवाना ने परदे का मुंह देखा लेकिन असफल रही। फिर गंगा तेरा पानी अमृत में नवीन की अपनी गिरती साख को संभालने की कोशिश की लेकिन चमका विक्टोरिया न.206 से इस चित्र की आशातीत सफलता ने उसे कुशल अभिनेता प्रमाणित कर दिया आज नवीन के पास प्रस्तावों के ढेर है पर वह कहानी में नवीनता खोजता है ताकि उसे कुछ कर दिखाने का अवसर मिले। कलाकार को । ‘बहार टिकट’ खिड़की पर औसत रही जबकि ‘धर्मा’ हिट साबित हुई उमा फिल्मस् कृत मैं वह नही के सेट पर जब मैं नवीन से मिलने रूपतारा स्टूडियो पहुंचा तो वह अदालत के एक दृश्य में व्यस्त था शार्ट के बाद औपचारिक बातचीत के बाद मैंने उससे हिन्दी फिल्मों में बढ़ती हुई सैक्स व अपराघवृति की चर्चा की तो वह बोला, आज फिल्म निर्माण महंगा हो गया है और हर फिल्म में निर्माता को प्रतिष्ठा दांव पर लगी रहती है। वह कम से कम रिस्क लेना चाहता है, अत हर ऐसा मसाला भरता है जो फिल्म की व्यवसायिक कामयाबी में सहायक हो। फिल्म की कामयाबी का मानदण्ड टिकट खिड़की पर एकत्रित धनराशी है उसमें कितना सैक्स या मारघाड़ थी यह कोई नही देखता आज ‘विक्टोरिया न.206’ ‘जंजीर’ ‘जुगनू’ ‘दाग’ हिट हुई तो इस फिल्मों से सम्बन्धित हर व्यक्ति का भाग्य चमक गया अनिवार्यता सी बन गई। मात्र ब्वाय मीट गर्ल मार्को फिल्मों का युग लद गया। पर स्टार अब भी फिल्म के बिकने और चलने की गारंटी है चाहे कहानी कैसी भी हो। “आप अपनी कैसी इमेज बनाना चाहते है” अच्छा है मैं टाइपड हीरो नही हूं नवीन बोला, “मैं विभिन्न भूमिकाओं में आना चाहता हूं। किसी खास तरीके की इमेज मुझे पसन्द नही। भादो, गंगा तेरी पानी अमृत परवाना, हंसते जख्म, विक्टोरिया न.203 से लेकर पैसे की गुड़िया व वर्मा तक मैंने लगातार अलग-अलग रोल किये है अब भी मुझे कोई निर्माता कहानी सुनाता है तो मैं उस चरित्र का गम्भीरता से अध्ययन करता हूं जो मुझे निभाना है फिर सोचता हूं कितनी ईमानदारी बरत पाऊंगा उसके साथ। अब हामी भरता हूं क्या पूना इंस्टीट्यूट से आये चेहरों ने नग्मता को बढ़ावा दिया है “मैंने अगला सवाल किया। पूना इंस्टीट्यूट का फिल्मोधोग की जहां बहुत योगदान है वहां कुछ कलंक भी लगाया जाता है” नवीन ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहां “फिल्मों में नग्मता लाने की जिम्मेदारी कदापि इंस्टीट्यूट की नही। हां रेहाना सुल्तान व राधा सलुजा आदि कुछ छात्राओं ने प्रकाश में आने के लिए निर्वस्त्र सीन दिये और वे अपने मकसद में कामयाब रही लेकिन जया भादुड़ी भी तो है” यह किसी संस्था का दोष नही व्यक्तिगत रूचि का सवाल है कुछ कलानेत्रियों चुम्बन या उत्तेजक दृश्य देने में कोई परहेज नही करती हालांकि उन्होंने इंस्टीट्यूट में कभी कदम भी नही रखा। जब बड़ी तारिकाएं ही बदन से कपड़े कम करने पर उतारु है तो इन उदयमान तारिकाओं को क्या कहा जाये जिन्हे अभी संघर्ष करके जगह बनानी है। यह हकीकत है आज अगर आशा सचदेव इतनी उन्मुक्त न होती तो वह कभी इतनी जल्दी लोकप्रियता नही हासिल कर सकती थी। रीनाराय “जरूरत” में निर्वस्त्र न होती तो उसके पास आज इतनी फिल्में न होती- न प्रति फिल्म इतना पारिश्रमिक, रेहाना, राधा, रीना, आशा सचदेव और रेखा ने चुम्बन और नग्मता को बढ़ावा दिया है अत आज हर अगन्तुक कलानैत्री चर्चा का विषय बनने के लिए काम पाने के लिए रामबाण नुस्खा अपना रही है चाहे वह नीतूसिंह हो या सीमाकपूर “आपने मद्रास की किसी फिल्म में काम किया है। क्या अन्तर पाया मद्रास और बम्बई की कार्यपद्धति में” “मुझे तो कोई खास नही लगा” नवीन बोला, “गंगा तेरी पानी अमृत” मेरी मद्रास की फिल्म थी लेकिन यूनिट के ज्यादातर सदस्य बम्बई के ये थे अत फर्क नही महसूस हुआई लेकिन जो कुछ वहां देखने का अवसर मिला उससे यह जरूर कहा जा सकता है वहां का उद्योग फलफूल रहा है अहिन्दी भाषी होते हुए भी वहां के निर्माता हिन्दी फिल्मों में कहानियों में बड़ी रूचि लेते है वहां का करोबार अपेक्षाकृत व्यवस्थित है। एक कलाकार के पास एक साथ कितनी फिल्में होनी चाहिए। बड़े साहब भाव में नवीन ने जवाब दिया मैं छ से ज्यादा फिल्में रखने के पक्ष में नही हूं इससे कलाकार अपनी भूमिका के साथ न्याय नही कर पाता पर कभी-कभी न चाहने पर भी कई कारणों या सम्बधों की वजह से फिल्में साइन करनी पड़ती हैं वैसे मैं बड़ा धैर्यवान हूं न ज्यादा फिल्में साइन करता हूं न डबल शिफ्ट में काम करता हूं फिल्मों रविवार को छुट्टी जरूर मनाता हूं फिल्मों के बोझ से न निर्माता को हम अपेक्षित समय दे सकते है न सौपे गए चरित्र का सूक्ष्मता से अध्ययन संभव होता है नवीन की बरखा बहार पैसे को गुड़िया व धर्मा हाल में प्रदर्शित हुई राखी के साथ मेरे सजना तैयार है राजदेव को मोन्टो, बृज व जम्बू की एक-एक फिल्म जिसकी नायिका सुलक्षणा है। नारंग की नवोदित अमूला वाली फिल्म तथा प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बन रही संगम आर्ट की अनाम फिल्म सेट पर है जिसकी नायिका सायराबानो है

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