रणधीर कपूर कल आज और कल

1 min


gum-hai-kisi-ke-pyar-mein-03

मायापुरी अंक 7.1974

रणधीर कपूर को प्यार से लोग डब्बू कहते है और इसीलिए जब उनकी पहली फिल्म कल आज और कल प्रदर्शित हुई तो दर्शकों ने प्यार से कहा। डब्बू कि नही डब्बा है है ऐसा डब्बा जिसमें अभिनय की एक भी किरन नही है बावजूद इसके अभिनेता के तौर पर डब्बू का डिब्ब गोल नही हो सका क्योंकि उससे पहली ही फिल्म में एक साथ दो जिम्मेदारियों को निभाया था, एक अभिनेता की और निर्देशक की सच तो यह है कि डब्बू निर्देशक के रूप में अपने अभिनेता पर भारी रहा एक निर्देशक के तौर पर उससे अपनी पहली ही फिल्म में एक अछुते विषय को छुआ एक पीढ़ी के गैप को उसने बड़े अच्छे ढंग से उतारा एक नये निर्देशक के लिए दो पीड़ितों के संघर्ष की कहानी को जहां तक उसके अभिनय का प्रश्न है वह अगर अच्छा नही था तो बुरा भी नही था सबसे प्रशंसनीय बात तो यह थी कि दूसरे अभिनेताओं की तरह निर्देशक होने के बाद भी उसने पूरी फिल्म में (हर फेम में) खुद को द जबरदस्ती इन्वाल्व करने की बेवकूफी नही की अभिनेता के तौर पर रणधीर पर हास्यप्रधान भूमिकायें ही ज्यादा सूट होती है यह बात कल आज और कल के उन दृश्यों से साफ झलकती थी जहां वह तेजवाऩ पीढ़ी के एक शरारती और गैर जिम्मेदार मस्तमौला युवक की भूमिका में पुरानी पीढ़ी के प्रतिनिधि (पृथ्वीराज कपूर) को सताता है यू इस फिल्म की कहानी में रोल सबसे अधिक जरूरी था वह एक ऐसे आदमी को भूमिका में था जिसके एक तरफ बेटा (नई पीढ़ी) है और दूसरों तरफ पिता (पुरानी पीढ़ी) है लेकिन रणधीर कपूर ने अच्छे निर्देशक के रूप में दोनों पीड़ितों के टकराव को बड़ी खूबी के साथ फिल्म के पर्दे पर उतार दिया उसने कलाकार या परफार्मेस के लिए दिग्गज अभिनताओं की कही भी सिफारिश नही की न किसी तरह के समझैते हुए अपने बेटे में प्रतिमा देख कर ही राजकपूर ने खुद कही भी उसे डिस्टर्ब नही दिया हमरही की शूटिंग के दौरान एक बार छायाकार वीरेन्द्र किशन ने मुझे डब्बू से मिलवाया था। इंटरव्यू के लिए वह फौरन तैयार हो गया था लेकिन मैं कभी उसके पास इंटरव्यू के लिए नही जा पाया। अब मैं बिना इंटरव्यू लिए ही कह सकता हूं कि जो कुछ भी होता है चुलबुला नटखट, खुशमिजाज़। शर्त यह है फिल्म की कहानी उसकी आदतों को एक्सप्लेन करने लायक हो हमराही की सफलता का सबसे प्रमुख कारण यह भी है कि इस फिल्म में उसकी जो भूमिका है वह उसकी अपनी पर्सनल लाइफ से जो प्रतिमान मेल खाती है यही वजह रही कि हमराही का नायक असलियत में पूरे तौर पर पर्दे पर उजागर हो सका रणधीर कपूर की आप गंभीर नही देखेंगे यहां तक कि अपनी शादी पर भी वह कतई गंभीर नही रहे एक बच्चे होने के बावजूद उसमें बेहद बचपना है और इसीलिए लोग पर्दे पर उसकी शरारातें देख कर उसे बच्चा महसूस करते है आज उसके पास काफी फिल्में है। अपनी मेहनत से उसने यह साबित कर दिखाया है कि जिसे लोग डब्बा समझते है वह खाली नही है उसमें अभिनय का एक बहुत बड़ा कोष है इसी कोष के सहारे कहा जा सकता है कि फिल्मों में उसका कल (भविष्य) सुरक्षित है डब्बू की खास आदत यह है कि उसे उसके पिता राजकपूर पर गर्व है जिससे वह सिर्फ मेहनत में विश्वास रख देता है कल चाहे जो भी हो अपने से छोटों को वह कभी छोटा महसूस नही करता इसीलिए आज भी वह अपने पिता के स्टूडियो कर्मचारियों के बीच उतना स्नेह पाता है जितना तब पाता था जब उसके पांव नन्हें थे और वह स्टूडियो की मिट्टी में खेला करता था


Mayapuri