सुनहरी जिल्द में बंधी रहस्यमय किताब – हेमा मालिनी

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मायापुरी अंक 41,1975

“उहू मैं कोई इंटरव्यू नही दूंगी”

“वह क्यों ?”

“मैं बोर हो चुकी हूं।“

“किन से?”

“मनगढ़न्त अफवाहों से, झूठी बातों से और आप लोगों की गॉसिपिंग से।“

“आप इंटरव्यू नही देंगी तो हमें कुछ न कुछ लिखना तो पड़ेगा. सम्पादक जी ने कहा है कि 48 घंटे के भीतर-भीतर आपका इंटरव्यू लिख कर भेज दूं।“

“तो लिख कर भेज दीजिये, मेरी बला से। आप वही लिखने वाले हैं जो आपको लिखना है और एडीटर को भी वही छापना है जो उसे छापना है। फिर इंटरव्यू दूं या न दूं, क्या फर्क पड़ता है।“

यह कह कर आंखे मटकाती हुई, मदमाती चाल से अपने सौन्दर्य की महक फैलाते हुए जिस तरह वह बैठक में आईं, उसी तरह चली गईं। उनकी मां जया चक्रवर्ती अपनी बेटी के भोलेपन पर मुस्कुरा उठीं और कहने लगीं किसी और दिन जब उनका ‘मूड’ ठीक होगा तब बातें कर लेना।

तब तक कॉफी आ चुकी थी। मैं ठेठ मद्रासी कॉफी का स्वाद लेता हुआ ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी के बारे में सोचने लगा सुनहरी जिल्द में बंधी रहस्यमय किताब

सुनहरी जिल्द में बंधी इस किताब में मन को बहलाने वाली एक कहानी दूसरी कहानी से जुड़ कर नई कहानी बनती है और उन तमाम कहानियों के ताने बाने से एक मोहक चरित्र निखर उठता है उस का नाम है हेमा मालिनी।

प्यार से तराशा हुआ इकहरा शरीर, सूर्योदय की ताली में नहाया गेंहूआ वर्ण, सपनों में डूबी मृगनयनी सी आंखे, होठों पर शहद भरी मुस्कान, मादकता से कसमसाता यौवन, हिरणियों की सी चंचलता, अंग-प्रत्यंग में घुंघुरुओं की थिरकन इसी रूप लावण्य का नाम स्वप्न सुन्दरी हेमा मालिनी।

28 फरवरी 1969 को स्पप्न सुन्दरी हेमा मालिनी की पहली हिन्दी फिल्म “सपनों का सौदागर” प्रदर्शित हुई। इस फिल्म के निर्देशक थे स्व. महेश कौल, नायक थे राज कपूर और निर्माता थे बी.अनन्त स्वामी. इस फिल्म से पूर्व हेमा मालिनी दो तमिल फिल्मों में नृत्य पेश कर चुकी थीं जिसे बहुत कम लोग जानते थे।

इस फिल्म के प्रदर्शन से पूर्व सन् 1967 में वह अपनी मां के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर गईं थी। उन्होंने काफी देर तक ध्यान मग्नं होकर अर्चन पूजन किया। जब वह वहां से चलने लगी तो पुंजारी जी ने आशीर्वाद देते हुए पूछा “क्यों बेटी विश्वनाथ बाबा से सब कुछ मांग लिया ना?”

हां, जो कुछ मांगा वह मिल गया तो फिर प्रसाद चढ़ाने आऊंगी।“

विश्वनाथ बाबा सबकी मानोकामना पूरी करते हैं। पर हेमा अब तक दुबारा उन्हें प्रसाद चढ़ाने नही गईं। तो क्या वह शूटिंग्स की डेट्स की व्यस्तता में विश्वनाथ बाबा को भूल गईं या फिर उनकी मनोकामनाएं पूरी नही हुई?

यह सोचते ही, कुछ ही दिनों पहले नटराज स्टूडियोज में एक संक्षिप्त इंटरव्यू देते हुए हेमा ने जो कुछ बताया वह याद आ गया। उन्होंने कहा, “देखिये मुझें किस बात की कमी है। बंगला है, सुन्दर सी मोटर है, धन है, दौलत है, इच्छानुसार पहन सकती हूं, खा सकती हूं, मन पसन्द के जेवर खरीद सकती हूं।“

“तो और आपको क्या चाहिए ?”

“मेरे साथ खेलने के लिए छोटे भाई बहन होते तो कितना अच्छा रहता”

“तो क्या अब खेलने की उम्र है आपकी?”

खेलने की उम्र जिन्दगी भर रहती है। आप आदमी हम औरतों की बातें नही समझ सकते। मैं क्या बताऊं पिछले दिनों जब मेरे बड़े भाई की शादी हो गई और घर में भाभी आ गयी तो मेरा मन भारी हो गया। मुझें बड़ा गुस्सा आया जैसे किसी ने मेरा भाई मुझसे छीन लिया हो। कई दिनों तक मैं उससे बोली तक नही और सो भी नहीं सकी।“

“ओह आपको कम्पनी चाहिए आपने कुछ कुत्ते पाल रखे हैं न।“

“हां छोटे छोटे पिल्ले मुझे बहुत प्यारे लगते हैं। जब भी छुट्टी मिलती है मैं उनके साथ जी भर कर खेलती हूं। पर मुझें एक चीज से बड़ा डर लगता है।“

“घर की एक नौकरानी से। जब कभी उसकी मनहूस शक्ल मैं देख लेती हूं, कोई न कोई आफत आ ही जाती है। पर बेचारी है ही अच्छी। बड़ा काम करती है। इसलिए जब मैं बाहर निकलती हूं, उसे कमरे में बंद कर दिया जाता है। ताकि मैं उसकी शक्ल न देख सकूं।“

“तो आप इन बातों में विश्वास करती हैं?”

क्यों नही, मैं पूजा पाठ, भाग्य शकुन, ज्योतिष आदि सभी बातों में विश्वास रखती हूं।“

“जादू टोनों में थी ?”

हां उनकी बातों को सुनती हूं तो दिल कांप उठता है।“

16 अक्टूबर 1948 को प्रात: काल के शुभ मुहूर्त में जन्मी हेमा मालिनी की कुंडली यह बताती है, कि वह विश्व प्रसिद्ध कुशल, नर्तकी बनेंगी यश और धन दोनों कमायेंगी और 40 साल तक की उम्र यानि शादी के बाद भी फिल्मों में काम करती रहेंगी। इस वक्त उनकी उम्र 27 वर्ष की है।

हेमा 6 वर्ष की छोटी उम्र से ही नृत्य सीख रही हैं। उसकी मां अजय चक्रवर्ती का कहना है कि नृत्य के प्रति उसका झुकाव देखकर लगता है जैसे वह नर्तकी होने के लिए ही पैदा हुई हैं। आज भी वह फिल्मों से ज्यादा नृत्य के पीछे पागल हैं। वह तो यह चाहती हैं कि अपनी नृत्य मंडली लेकर देश के कोने-कोने में जाये और सारे संसार का भ्रमण करें। नृत्य के बड़े-बड़े गुरुओं से उन्होंने शास्त्रीय नृत्यों का सूक्ष्म ज्ञान प्राप्त किया है। फिल्मों में व्यस्त रहते हुए भी नृत्य का अभ्यास क्रम जारी है। 1964 में मद्रास के एक सांस्कृतिक समारोह मे उन्होंने ऐसा शानदार नृत्य पेश किया कि मैं खुद चकित रह गयीं। उन्होंने उसी समारोह में ‘नृत्य ज्योति’ की उपाधि से विभूषित किया गया। वह साम्राज्ञी एलिजाबेथ, स्व. राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू, स्व. भारत रत्न सर्वपल्ली राधाकृष्णन, स्व.नेहरू जी तथा देश की अनेक विभूतियों के सामने छोटी उम्र में ही नृत्य प्रस्तुत कर चुकी है। पं. नेहरू तो उनके नृत्य से इतने खुश हुए कि उन्होंने उन्हें अपने पास बुला कर आशीर्वाद दिया और भविष्यवाणी की कि तुम बड़ी होकर देश का नाम रोशन करोगी।

हेमा जियापुरम (त्रिचन पल्ली) में जन्मी, वही पली और वहीं के स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने मैट्रिक पास की और जब उन्होंने कॉलेज में भर्ती होने का स्वप्न देखा तो अचानक दक्षिण के प्रसिद्ध निर्माता बी.अनन्त स्वामी ने उनकी मां के सामने ऐसे आकर्षक प्रस्ताव रख दिये कि वह फिल्मों में आकर अपनी पहली फिल्म के साथ ही ‘स्वप्न सुन्दरी’ के नाम से विख्यात हो गयीं।

हाल ही की बात है। नटराज स्टूडियोज में फिल्म ‘चरस’ की शूटिंग चल रही थी। मैं हिम्मत करके हेमा के मेकअप-रूम में घुस गया। उस वक्त उनकी मां पास नही थी और नौकरानी भी कहीं कुछ लेने के लिए बाहर गयी हुई थी। मौका पाकर मैंने पूछा “आज मां जी साथ नही हैं क्या? इस पर उन्हें कुछ गुस्सा आ गया। थोड़ी ही देर बाद शांत होकर उन्होंने कहा “आप सब लोग यह समझते हैं जैसे मेरी मां ने मुझे कैद कर दिया है और मैं उनकी मर्जी के बगैर सांस भी नही लेती। है न यही बात ? यह सब सफेद झूठ है। मां के प्यार से तो मैंने वह पाया है जो बहुत कम लोगों को मिल पाता है। मैं सारी दुनिया छोड़ सकती हूं पर अपनी मां को नही।“

मैंने एक दिलचस्प बात पूछी “शादी के बाद भी नही ?”

हेमा ने तपाक से कहा “तो क्या शादी के बाद बेटी मां से सदा के लिए अलग हो जाती है?”

इसी बीच नौकरानी बर्फ के टुकड़े लेकर आयी। अपने मेकअप को दुरुस्त करते हुए हेमा ने बात कही मैं एक भारतीय लड़की हूं, भारतीय परम्पराओं में मेरा विश्वास है इसलिए हीरोइन बन कर भी मैं आज की लड़कियों की तरह मॉडर्न नही हूं और न कभी बनूंगी। मैं समझती हूं कि एक्टिंग का ताल्लुक इमोशनल एक्सप्रेशन्स से ज्यादा है, कपड़े उघाड़ कर अंगों का प्रदर्शन करने से नही। मैं इन्टीमेट सीन में भी भाग लेती हूं पर कोई यह नही कह सकता कि मैंने किसी नग्न या अश्लील सीन में भाग लिया है। मैं ऐसा कभी कर ही नही सकती।“ उसके बाद मेकअप की कुछ डब्बियां दिखाती हुए बोलीं देखिए न, सौन्दर्य-प्रंसाधन की ये विदेशी चीजें अच्छी नही लगती। मजबूरी से मैं इनका इस्तेमाल कर रही हूं। मैं हाल ही में विदेश गयी तो केवल बालों के शैम्पू की, एक खास किस्म के शेम्पू की, जो भारत में उपलब्ध नही हैं कुछ बोतलें लेकर आयी वर्ना मैं देशी चीजों का ही इस्तेमाल करती रही हूं। मुझें देशी उबटन, आंवला शिकाकाई, अरेठा, चंदन, मेहंदी बस ऐसी ही चीजें अच्छी लगती हैं। जहां तक होता है मैं उन्हीं का प्रयोग करती हूं।“

मैंने मजाक में पूछा “और बीमार होने पर दवाई भी देसी?”

हेमा ने मुंह बिगाड़ कर कहा “उस समय की तो बात ही न पूछो। थोड़ा-सी बीमार पड़ती हूं कि मां डॉक्टरों पर डॉक्टर बुला लेती हैं और इंजेक्शन पर इंजेक्शन और दवाइयां लेनी पड़ती हैं। न बाबा-सब कुछ हो जाये पर मैं बीमार न पड़ूं।“

नटराज की उपासिका हेमा सीता और गीता का प्रदर्शन होने तक दूध में धुली एकदम निर्मल हीरोइन रही हैं। पर उस फिल्म के प्रदर्शन के बाद उनके मीठे और मंद-मंद रोमांस के ऐसे चर्चे छिडे कि अब वह बेदाग नही रही। अब यह राज किसी से छुपा नही रहा कि वह संजीव कुमार के जादू भरे प्रेम में पिघल कर उससे शादी करने को तैयार हो गयी थी।

खंडन के अनेक पर्दे डालने के बाद भी अब इस खबर में सच्चाई लगती है कि ‘दूल्हन’ की शूटिंग के दौरान वह जितेन्द्र की दूल्हन बनने की तैयारी कर बैठी थी। जितेन्द्र को तो उनकी मां ने पसन्द कर लिये थे पर अचानक बीस से अधिक फिल्मों में उनके साथ रोमांटिक जोड़ी बनाने वाले धर्मेन्द्र ने जितेन्द्र की प्रेमिका शोभा सिप्पी को उनके सामने लाकर खड़ा कर दिया तो मां-बेटी दोनों चौंक उठी।वह मामला भी रफा-दफा हो गया। कुछ लोगों ने अफवाह फैला रखी है। कि हेमा को हेमा बनाने वाले धर्मेन्द्र के साथ उसका रोमांस काफी अर्से सेचल रहा है पर धर्मेन्द्र के विवाहित होने के कारण उनकी आग भीतर ही भीतर सुलग रही है, शोले नही भड़क रहे हैं। कहते हैं हेमा के जीवन में हलचल पैदा करने वाले धर्मेन्द्र, संजीव कुमार और जितेन्द्र के अलावा गैर फिल्मी लोग भी हैं पर उनकी मां ने अब तक किसी को भी पसन्द नही किया है। हेमा के निकटतम सूत्रों से यही पता चला है कि हेमा की मां अब उसके हाथ पीले कर देने के लिए तेजी से योग्य वर की तलाश कर रही हैं जिसके लिए विश्वनीय दूत भी सक्रिय हो उठे हैं।

हेमा खुद अपने भावी पति के बारे में किस तरह के सपने देख रही हैं? इस स्वप्न सुन्दरी के सपनों का राज कुमार कौन होगा? यह सवाल वाकई बड़ा दिलचस्प है। जब मैंने हेमा से यही सवाल किया तो उन्होंने चौंक कर, जैसे किसी ने उसे नींद से जगा दिया हो, मंद-मंद मुस्कुराहट से कहा “जरा आप ही बताइये ?”

मैं धर्म संकट में पड़ गया। अचानक मुझें एक हल्के-फुल्के लेख ही याद आयी। मैंने उसी लेख की कुछ पंक्तियों याद करते हुए कहा “आपके सपनों का राजकुमार धर्मेन्द्र जैसा ही मैन, दिलीप कुमार जैसा भावुक, संजीव कुमार जैसा आशिकी, जितेन्द्र जैसा चंचल, देव आनंद जैसा बाल सुलभ हंसी वाला, राजेश खन्ना जैसा जादुई आवाज़ वाल, शशि कपूर जैसा नम्र, राज कुमार जैसा सख्त, राजेन्द्र कुमार जैसा भोला भाला, राजकपूर जैसा नीली आंखो वाला, डब्बू की तरह मजाकिया और चिंटू की तरह सपनोंवाला होना चाहिए।“

मेरे इस कथन पर वह ठहाका मार कर हंस पड़ीं और बोलीं“आह क्या सचमुच होगा कोई ऐसा आप ही ढूंढ़ लाइये ना। ठहरों, मैं मां को बुलाती हूं।“

मैं मां के डर से भाग छूटा।

इस घटना के कई दिनों बाद जब फिल्मिस्तान स्टूडियोज में मेरी उनसे मुलाकात हुई तो मैंने इस बार जान बूझकर उनकी भूमिकाओं की गम्भीर चर्चा छेड़ दी। मैंने पूछा “क्यों आप अपनी भूमिकाओं से संतुष्ट है?”

हेमा ने तपाक से कहा “संतुष्ट नही हूं, फिर भी मेरी फिल्में हिट हो रही हैं। धर्मेन्द्र के साथ ‘नया ज़माना’‘राजा जानी’‘जुगनू’’सीता गीता’’दोस्त’ आदि सभी फिल्में कामयाब रहीं और एक तरह से अब उन्हीं फिल्मों का दौर आ गया है। अब मैं उनके साथ ‘प्रतिज्ञा’’शोले’‘रजिया सुल्तान’‘आखिरी मुगल’ तथा और भी अनेक फिल्मों में आ रही हूं जो अभिनय की दृष्टि से अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण है। देव आनंद के साथ मैंने ‘शरीफ बदमाश’ और ‘छुपा रुस्तम’ में कार्य किया और अब उनके साथ ‘जानेमन’‘साहब बहादुर’ जैसी उनकी खास टाइप की फिल्मों में खास किस्म के रोल कर रही हूं। राजेश खन्ना के साथ भी हाल ही में ‘प्रेम नगर’ में कार्य करने के बाद तीन नयी फिल्मों में आ रही हूं। शत्रुघ्न सिन्हा के साथ मेरी उल्लेखनीय फिल्म हैं‘दो ठग’ राजेन्द्र कुमार के साथ ‘काला गोरा’ मे कार्य करने के बाद मैं ‘सुनहरा’ संसार में भी आई, जिसे आप लोगों ने पसन्द किया होगा। जितेन्द्र के साथ मेरी फिल्म ‘दुल्हन’ प्रदर्शित हो चुकी है और अब आ रही है मेरे अभिनय से जिंदगी की बेहतरीन फिल्म ‘खुश्बू’ जिसका निर्देशन गुलजार ने किया है। ‘शोले’ में मैं धर्मेन्द्र, अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी और संजीव कुमार के साथ आ रही हूं जिसमें मेरा जिप्सी टाइप थ्रिलिंग रोल है। ‘सीता और गीता’ में मैंने संजीव कुमार के साथ कार्य किया था और अब उनके साथ कई दिनों से बीचरूकी ‘धूप छांव’ तेजी से पूर्ण होने जा रही हैं। शशि कपूर के साथ ‘अभिनेत्री’ में, फिरोज खान के साथ ‘धर्मात्मा’ में आपने मुझें देखा होगा। ऐसा कहकर वह चुप हो गईं और कहने लगी कि फिल्मों के नाम गिनाने से आप भी बोर होंगे और आपकी ‘मायापुरी’ के पाठक भी. पर, हां एक बात अवश्य कहूंगी कि ‘लाल पत्थर’ जैसी फिल्मों में मैं आज भी खुशी-खुशी अभिनय करने को राजी हूं। यदि दिलीप कुमार के साथ ऐसी किसी एक फिल्म में भी अभिनय करने का मौका मिल जाता तो मेरे सपनों की जिंदगी संवर जाती। (मुशीर रियाज की आगामी फिल्म में दिलीप कुमार के साथ काम करने से उनकी यह तमन्ना भी पूरी हो जाएगी।)”

हेमा की अब तक कुल मिलाकर 30 फिल्में प्रदर्शित हो चुकी हैं और 12 निर्माणाधीन हैं।

अंत में, अचानक मुझें फिर विश्व नाथ बाबा की याद आयी। शायद वह दुबारा इसलिए नही गयी कि उन्हें अब तक अपने सपनों का राजकुमार नही मिला है।

तो क्या उन्होंने आज के आठ साल पहले अपने सपनों में राजकुमार की कामना की थी

इसे कहते है सुनहरी जिल्द में बंधी रहस्मय किताब


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Mayapuri

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