लोगों को बातों का बतंगड़ बनाने में क्या मज़ा आता है – ज़ाहिरा

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मायापुरी अंक 41,1975

मोहन स्टूडियो में ‘नौकरी’ के सैट पर ज़ाहिरा मिल गईं। हमने उनसे कहा। सुना है आप नौजवान हीरों से निराश हो कर असित सेन पर मेहरबान हो गई हैं। जिससे खुश होकर उन्होंने आपको अपना फ्लैट सौंप दिया है। क्या यह सही है?”

ओह नो! ज़ाहिरा ने तुरंत भावुक होकर कहा। पता नही लोगों को बातों का बतंगड़ बनाने में क्या मज़ा आता है बात सिर्फ इतनी है कि मुझें फ्लैट की जरूरत थी। उन्होंने वह फ्लैट खाली किया तो मुझें मिल गया जिसका मैंकिराया बाकयदा मकान मालिकर को अदा कर रही हूं। असित दा मेरे बाप के समान हैं। उनके बारे में लोग जो गलत सोचते हैं और जहां कहीं कोई मौका मिलता है लोग उल्टी सीधी बातें उड़ा देते हैं। ‘नौकरी साइन’ की थी तो लोगों ने राजेश खन्ना का नाम मेरे साथ जोड़ दिया था। मैं भारत में अपना करियर बनाने आई हूं। रोमांस लड़ाने नही।“ ज़ाहिरा ने खंडन करते हुए बहुत ही विनम्र स्वर में कहा। “आप कृपया अपनी पत्रिका में जोरदार शब्दों में इसका खंडन कर दें ताकि मेरी स्थिति स्पष्ठ हो सके।“

कहा जाता है ऋषि कपूर की गुडलिस्ट में वही लड़की आती है उनके कहने पर चलें। रीटा भादुड़ी ने उनकी नही मानी थी इसलिए जिंदादिल की कास्ट से अलग करके आपको रोल दिया गया आपका ऋषि के बार में क्या विचार है?” हमने पूछा।

“अगर ऐसी बात होती तो फिर रीटा भादुड़ी ऋषि के साथ ‘गुनहगार’ में क्यों काम करतीं? यह सब पीली पत्रकारिता वालों के कारनामे हैं जिन्हें फिल्म-स्टारों में सिवाये बुराईयों के और कुछ नज़र नही आता। हांलाकि ऋषि बड़े जिंदा दिल हीरो हैं। वह हर वक्त सबको हंसाते रहते हैं। और खुद भी हंसते रहते हैं। और शायद लोग किसी को हंसता खेलता देखना पसंद नही करते इसीलिए ऐसी उल्टी-सीधी बातें फैलाते रहते हैं। आदमी सड़क का में मैं शत्रुघ्न सिन्हा के साथ काम कर रही हूं। इसलिए कह सकती हूं कि वह मुंह फट या स्पष्टवादी जरूर हैं किंतु ऐसा नही जैसा कि अखबारों में लिखा जाता हैं।“ जाहिरा ने बताया।

आप इतने अच्छे और मिलनसार स्वभाव की हैं कि एक बार जो आप से मिल लेता हैं, प्रभावित हुए बिना नही रहता, इसके बावजूद आप फिल्मी पार्टियों में कम नज़र आती हैं इसका क्या कारण है?” हमने पूछा।

“मैं सबसे पहले अपने काम को प्राथमिकता देती हूं। इसलिए फिल्मी पार्टियों के लिए समय नही निकल पाती और कोई बात नही है।“ ज़ाहिरा ने कहा।

आप अपनी फिल्मों में जिस प्रकार के पात्र कर रही हैं, क्या आप समझती हैं कि आप उनकी बुनियाद पर ख्याति अर्जित कर लेंगी ?” हमने पूछा।

मैं अपने तौर पर बड़ी आशावादी हूं और मुझें अपनी फिल्मों और अपने पात्रों पर पूर्ण विश्वास है। काम के अवसर भी मिले हैं, समय आने पर आप स्वयं इस बात को महसूस करेंगे कि मुझमें कुछ कर दिखाने की लगन है। अब यह सिने दर्शकों पर है कि वे कहां तक मेरा काम पसंद करते हैं? उनके फैसले पर ही सारा करियर निर्भर है।“ ज़ाहिरा ने आह भरते हुए कहा।

ज़रीना वहाब से ‘एक और एक ग्यारह’ की शूटिंग के दौरान हमारी मुलाकात हुई हमने उनसे पूछा।

आपकी रिलीज फिल्मों में ‘इश्क इश्क इश्क’‘अनोखा’ से आपके बारे में सही इमेज कायम करने में आपको सफलता नही मिली। क्या आप बतायेंगे कि स्वयं आप किस प्रकार के रोल करना चाहती हैं?”

मैंने यह करियर वहीदा जी, तनुजा और जया भादुड़ी से प्रभावित होकर अपनाया है। इसलिए मेरी कोशिश है कि मैं उन्हीं की तरह ही ‘सीरियस’ और शोख व चंचल भूमिकाएं करना चाहती हूं। जरीना वहाब ने कहा।

आपके जैसी लड़की के पास जितनी फिल्में इस समय होनी चाहिए, उतनी नज़र नही आतीं इसका क्या कारण है जब कि लोग हीरोइनों के अकाल का रोना रोते हैं।“ हमने पूछा।

फिल्मों की ऑफर बहुत आते हैं किंतु मैंने जया को अपना आदर्श मान रखा है, इसलिए में बहुत सोच समझ कर फिल्में स्वीकार करती हूं। क्योंकि मैं ‘स्टार’ नही एक्ट्रेस बनना चाहती हूं। जरीना ने कहा।

आपके साथ वाली लड़कियां जिस प्रकार न्यूज में हैं और जितनी पब्लिसिटी पा रही हैं उतनी आप कम न्यूज में नजर आती हैं क्या आप नही चाहती कि आपकी भी उचित पब्लिसिटी हो? हमने पूछा।

पब्लिसिटी कौन नही चाहता? किंतु में उचित ढंग से ही न्यूज में आना चाहती हूं गॉसिप क्लास में चर्चा का विषय बनकर पब्लिसिटी नही चाहती। मैं अपने काम के लिए चर्चा का विषय बनना चाहती हूं। और दुर्भाग्य से मुझें अभी तक ऐसा कोई रोल नही मिला है। दरअसल हर काम के लिए एक समय होता है। मेरा समय आएगा तो मैं सिद्ध कर दिखाऊंगी के मुझसे जो आशाएं बंधी हैं, वह झूठी नही हैं।“ जरीना ने बड़े आत्म विश्वास के साथ कहा।


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Mayapuri

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