जानिए ‘ओम जय जगदीश हरे’ भजन किसने लिखा था?

1 min


बहुत पॉपुलर आरती है- आज भी सभी जगह गाई जाती है फिर भी पुरानी नहीं हुई या इसका स्बसीच्यूट नहीं कोई लिख सका। ‘ओम जय जगदीश हरे’ स्वामी जय जगदीश हरे’ भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट क्षण में दूर करे…।’’

8 अंतरों में लिखी गई इस आरती का मूल रचयिता कौन है? यह जानकारी बहुत कम लोगों को है। ज्यादातर लोग इसे मनोज कुमार लिखित (उनकी-फिल्म ‘पूरब-पश्चिम’ में यह गीत है) मान लेते हैं या कुछ लोग तुलसीदास का लिखा बता देते हैं। मगर सच यह नहीं है। अपने पाठकों को हम बताना चाहेंगे कि यह गीत लिखा था पं.श्रद्धाराम शर्मा फिल्लौरी ने, सन् 1877-1888 के बीच में। पं. श्रद्धाराम को रामचंद्र शुक्ल ने भारतेन्दु हरिशचंद्र के साथ हिन्दी साहित्य के पहले दो लेखकों में माना है। शर्मा जी का लिखा एक उपन्यास ‘भाग्यवती’ सन 1888 में प्रकाशित हुआ था और ऐसा माना जाता है कि यही पहला उपन्यास भी रहा है हिन्दी साहित्य का। यह भी माना जाता है कि अंग्रेजों द्वारा उनको उनके गांव-शहर से निष्कासित किया गया था और वह घूम-घूम कर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ व्याख्यान देते थे उस दौरान यह गीत गा कर लोगों को जुटाया करते थे। जो भी हो, प्रचार-प्रसार से दूर रहने की प्रवृत्ति वाले पं. श्रद्धाराम शर्मा को ‘ओम जय जगदीश हरे…’ गीत के लिए जहां अमर हो जाना चाहिए था, वहां पूछने पर कोई नहीं बता पा रहा कि इस अमर कृति का रचयिता कौन है। काश! मनोज कुमार उन्हें फिल्म में क्रेडिट दिये होते!


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये