देओल डे के इस मौके पर एक और देओल डे की यादें

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अली पीटर जॉन

मुझे अभी तक ये नहीं पता कि धर्मेंद्र जो कि मेरे  सबसे पुराने दोस्त है उन्होंने अपने परिवार जिसमें उनकी पहली बीवी प्रकाश उनके दोनों बेटे सनी और बॉबी और उनकी दो बहनें, इन सब को अपने कैरियर के शुरुआती दौर में फिल्मों की दुनिया से दूर क्यों रखा था. सनी इन सब में से पहले थे  जिनको धर्मेंद्र ने धर्मवीर में जूनियर धरम का किरदार निभाने के लिए  फिल्मी दुनिया से परिचित कराया. यह सुझाव भी उन्हें फिल्ममेकर्स ने ही दिया था. बाकी सब जुहू के बंगलें में बिल्कुल फिल्मी दुनिया से दूर रहते थे और लड़कों को बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया था.

जब सनी 18 वर्ष के हुए तो किसी ने धर्मेंद्र से कहा कि उनके बड़े बेटे सनी भी फिल्मों की दुनिया में सफल हो सकते हैं जैसे सुनील दत्त और राजेंद्र कुमार के बेटे हुए हैं.

सुझाव  देने वाले उस व्यक्ति को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और धर्मेंद्र जल्दी ही मान गए और उन्होंने कहा कि, ‘अगर रब की यही इच्छा है,तो यही सही’. फिर पिता और पुत्र जो बहुत दिनों से एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे उनकी तुरंत बात हुई और धर्मेंद्र ने अपने बेटे से पूछा कि क्या वह एक अभिनेता होने की सभी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए तैयार है. धर्मेंद्र ने सनी से यह भी कहा कि वो हर संभव कोशिश करेंगे कि सनी को उन सभी कठिनाइयों से नहीं गुजरना पड़े जिन कठिनाइयों को धर्मेंद्र ने एक अभिनेता बनने के सफर में देखा है.

सनी जो बहुत ही शर्मीले लड़के थे उन्होंने समय लिया अपने पिता को इसका जवाब देने के लिए पर जवाब अंकिता सकारात्मक ही आया. धरती से जुड़े इस पुत्र का पुत्र सब कुछ करने के लिए तैयार था जो उसे 1 स्टार बनने के लिए करना चाहिए. और फिर पिता निकल गये एक अच्छे डायरेक्टर, अच्छे स्क्रिप्ट, अच्छे म्यूजिक डायरेक्टर और सबसे महत्वपूर्ण एक अच्छी हीरोइन की तलाश में. सारी चीजें सही होती चली गई और राहुल रवैल जो कि अनुभवी  डायरेक्टर एचएस रवैल के पुत्र थे उनको  सनी की पहली फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी सौंपी गई.राहुल रवैल के पिता डायरेक्टर एचएस रवैल महबूब,संघर्ष और लैला मजनू जैसे फिल्मों के लिए जाने जाता है और वो राज कपूर के असिस्टेंट भी रहे थे और उन्होंने कुमार गौरव की सुपरहिट फिल्म लव स्टोरी को भी डायरेक्ट किया था. आरडी बर्मन संगीत निर्देशक चुने गए और अभिनेत्री के लिए अमृता सिंह को चुना गया है जो कि उस समय की बहुत ही विवादित हस्ती रह चुकी  रुखसाना सुल्ताना की बेटी थी. रुखसाना सुल्ताना के बारे में ऐसा माना जाता है कि वह संजय गांधी के बहुत करीब थी और उन्होंने ही देश में आपातकाल के दौरान संजय गांधी को नसबंदी  और साउथ दिल्ली  के झोपड़ पट्टियों को गिरवाने का सुझाव दिया था.

आर्य समाज और सिख समाज के सलाह मशवरा से मुहूर्त की तारीख तय कर दी गई. महबूब स्टूडियो जो कि बड़े-बड़े स्टार के बेटों के लिए लकी माना जाता था,सनी देओल के पहले शॉट के लिए भी महबूब स्टूडियो को ही तय किया गया. कुमार गौरव गौरव और संजय दत्त के भी मुहूर्त शॉट महबूब स्टूडियो में ही हुई  थी. चारों और धर्मेंद्र के शुभचिंतकों, फैंस और दोस्तों की भीड़ लगी हुई थी. धर्मेंद्र ने मुझसे कहा था कि वह बहुत ही है और वो इस समारोह में उपस्थित नहीं होना चाहते हैं. पर मेरे बहुत कहने पर वो मेकअप रूम में मुझे इंटरव्यू देने के लिए राजी हो गये. मुहूर्त के शॉट के लिए 3:00 बजे का समय तय किया गया. और सभी अतिथि आ चुके थे जिसमें दिलीप कुमार, राज कपूर और देवानंद भी शामिल थे पर धर्मेंद्र अभी तक नहीं आए थे. मैं उन्हें लगातार कॉल करते रहा क्योंकि इसमें मेरा भी फायदा था, मुझे उनकी इंटरव्यू 5:00 बजे शाम तक ज़मा करनी थी.

धरम जी महबूब स्टूडियो  शॉट से 20 मिनट पहले पहुंचे और उन्होंने मुझे अपने कार में बिठाया और अपने रूम पर ले गए जो भीड़ से बहुत दूर थी. वो लगातार यह कहते रहे कि,” बहुत अजीब लगता है, बहुत अजीब लगता है,और इस सब में तेरे को इंटरव्यू भी देना है. मैं क्या बोलूं यार मेरे तो आंखों में आंसू आ गए. तू लिख देना कुछ भी,मेरे से अच्छा तो तू जानता है कि ऐसे मौके पर एक बाप के दिल पर क्या गुजरती होगी. लिख दे लिख दे यार, धरम बन के,बाप बन के, कुछ भी बन के,तू लिख दे,मैं कुछ नहीं कहूंगा”. और मैं असमंजस में पड़ गया. दिलीप कुमार और राज कपूर नेम मुहूर्त शॉट को निर्देशित किया और फिर सनी देओल और अमृता सिंह ने अपना पहला शॉट दिया. सब कोई यह जानना चाहते थे कि धर्म जी का बेटा कैसा दिखता है और अमृता सिंह को जाने के लिए भी सभी उत्सुक थे. पर फिर सारा ध्यान एक औरत पर जाकर केंद्रित हो गया और वह महिला थी रुखसाना सुल्तान. बड़े-बड़े स्टार के होते हुए भी उन्होंने सारा ध्यान अपनी और केंद्रित करवा लिया.  उनके बारे में यह कहा जाता है कि वह संजय गांधी की सलाहकार थी.

2 दिन बाद मेरे आर्टिकल आए  और मैंने अपना सौ प्रतिशत  दे दिया था  धरम जी बन के उनके बेटे के बारे में लिखने में. मैंने वही लिखना चाहा जो एक पिता अपने पुत्र के बारे में लिखेगा जो इस स्टारडम की दुनिया में अपना पहला कदम रख रहा है. और उसी दिन फ्राइडे को दोपहर के लंच के टाइम धरम जी का कॉल आया. मैं जूनियर रिपोर्टर था . मुझे वो काला फोन उठाने में बहुत डर लग रहा था,मेरे हाथ काँप रहे थे. क्योंकि मैंने सुना था कि धरम जी बहुत ही ज्यादा खतरनाक हो जाते जब उनको गुस्सा आता है. पर ये सब मेरी कल्पनाएं निकली. धरम जी बहुत ही ज्यादा खुश थे मेरे लिखे को पढ़ कर. उन्होंने मुझसे कहा कि,” मैं तेरे को थैंक यू कैसे बोलूं? तूने मेरे से अच्छा मेरे फीलिंग्स को समझा है. आज शाम को घर पे आ जाओ,दारु पीते है.”

वो मेरे जीवन में अत्यधिक शराब पीने वाले दिनों की शुरुआत थी क्योंकि मुझे उस दिन उस इंसान से बराबरी करनी थी जिन्होंने एक बार कहा था कि लोगों ने गिलासों से शराब पी होगी, बाल्टियों से पी होगी, हमने तो ड्रमों के हिसाब से पी है . उन्होंने मुझे एक नया नाम भी दिया, “मेरा दारू भाई”.

अब लगभग 30 साल हो चुके हैं और बहुत कुछ बदल चुका है. राज कपूर और देवानंद, दोनों ही इस दुनिया में नहीं रहे. दिलीप कुमार 98 के हो चुके हैं और बहुत बीमार रहते हैं. धरम जी ने भी इस चकाचौंध की दुनिया से खुद को सेवानिवृत्त कर अपनी मिट्टी की ओर वापस चले गए हैं और अब किसान का काम करते है,जो वो हमेशा से चाहते थे. बस इस बार उनका खेत खलिहान लोनावला में है ना कि उनके गांव सनिवार, पंजाब में. और सबसे रुचिकर बात यह है कि सनी अब खुद एक पिता है. और उनके बेटे करण सिंह देओल की अभिनेता के रूप में पहली परीक्षा सितंबर 20 को थी.उनकी पहले फिल्म ‘पल पल दिल के पास’ जिनको उनके पिता ने ही निर्देशित किया हा रिलीज हो चुकी है.

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Mayapuri