‘‘हमारी फिल्म बरसों से गायब रहे परिवार की बात करती है..’’- शिल्पा शुक्ला

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फिल्म ‘‘चक दे इंडिया’’ में बिंदिया नाइक का किरदार निभाकर शोहरत बटोरने से काफी समय बाद शिल्पा शुक्ला 2013 में फिल्म ‘‘बी ए पास’’ को लेकर चर्चा में आयी थी. जबकि इन दिनों वह प्रकाश झा निर्मित और रितेश मेनन निर्देशित काॅमेडी फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’’ को लेकर चर्चा में हैं. शिल्पा शुक्ला का दावा है कि थिएटर ने उन्हे हर तरह के किरदार निभाने की ट्रेनिंग दी है.

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फिल्म ‘‘चक दे इंडिया’’ ने आपको जबरदस्त शोहरत दिलायी थी. लेकिन उस हिसाब से आपको काम नहीं मिला, जिस हिसाब से मिलना चाहिए था?

-मैं इस बात को सोचती ही नही हूं. मैं बहुत यात्राएं करती हूं. जहां भी जाती हूं, हर जगह लोग मुझे एक कलाकार के तौर पर पहचानते हैं. इससे बड़ी उपलब्धि क्या हो सकती है. तमाम कलाकार आते जाते हैं, उन सबके बीच यदि मेरी पहचान बनी हुई है, तो यह मेरी उपलब्धि है. अब तो मैं फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’’ को लेकर उत्साहित हूँ.

‘‘बीए पास’’ के बाद ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’’ का जब आफर आया, तो आपके दिमाग में क्या आया?

-मै इश्वर का शुक्रिया अद कर रही थी कि मेरे पास इमेज से विपरीत हास्य किरदार निभाने का आफर आया. प्रकाश झा के प्रोडक्शन से यह फिल्म बन रही है. ईमेज में फंसने की मेरी भी इच्छा नहीं थी. एक कलाकार या इंसान के तौर पर भी में कोई भी ईमेज लेकर चलना पसंद नहीं करती. मैं हर बार अपनी ईमेज ब्रेक करना पसंद करती हूं. मैं इतना कहूंगी कि इस बार टाइमिंग बहुत अच्छी थी. बालीवुड में बैठकर इतने बड़े बैनर ने मुझे काॅमेडी फिल्म आफर करने के बारे में सोचा. मैं इसे सौभाग्य की बात मानती हूँ.

जब आपने फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’’ की स्किप्ट सुनी होगी, तो फिल्म का कौन सा हिस्सा या किस सिरे ने आपको इस फिल्म से जुड़ने के लिए प्रेरित किया?

-फिल्म का क्लायमेक्स ऐसा है, जिसने मुझे इस फिल्म से जुड़ने के लिए सबसे अधिक उत्साहित किया. क्लायमेक्स ही पूरी फिल्म का सार है. स्क्रिप्ट सुनाते समय जैसे ही निर्देशक रितेश मेनन ने मुझे यह बताया, मेरा दिल भर आया. उसी वक्त मुझे लगा यह फिल्म करनी चाहिए.

फिल्म के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

-मैने अर्चना का किरदार निभाया है, जो कि अपने तीन भाईयों के बीच अकेली बहन है. उसके पिता ने कम उम्र में ही पढ़ाई छुड़वाकर उसकी शादी कर दी थी. जिद्दी किस्म की है. अपनी मनमानी करती है. बड़े भाई से ठनी हुई है. वह किसी भी हालत में अपने बड़े भईया को जीतने नहीं दे सकती. वास्तव में बचपन की कुछ कड़वाहट है, बचपन की कुछ बातें हैं, जिन्हे अर्चना अभी तक दिल्ली से लगाए बैठी है.

क्या आप मानती हैं कि बचपन की घटनाएं इंसान को कुंठाग्रस्त बना देती हैं?

-इंसान की जिंदगी में  बचपन में घटी घटनाओं का बहुत बड़ा हाथ होता है. बचपन की घटनाएं हम भूल जाते है या ध्यान नहीं देते है. लेकिन बचपन के जो अनुभव हैं, वह कभी न कभी इंसान की जिंदगी में अहम भूमिका निभाते ही हैं. इस वजह से ही वह दोनों ऐसी सोच रखते हैं. सच कहूॅं तो बचपन से ही सोच रख लेते हैं.

इस फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है वह..?

-मैं कहूंगी कि समाज में जो कुछ हो रहा है, वही दिखाया है. पर फिल्म है, तो उसका प्रतिशत थोड़ा ज्यादा हो सकता है. हम देखते है कि समाज में प्राॅपर्टी को लेकर बहुत झगड़े होते है. मैं जब भी दिल्ली जाती हूँ, तो हमें प्राॅपर्टी को लेकर ही परिवार के सदस्यों के बीच झगडे़ की कहानियां सुनने को मिलती हैं. भाई भाई से लड़ रहा है. घर के अंदर कोई औरत आयी है, तो वह चाहती है कि जल्दी से बंटवारा हो जाए. पूरी दुनिया प्राॅपर्टी को लेकर ही झगड़ती नजर आती है. प्राॅपर्टी का जिक्र हुए बगैर कोई बात खत्म नहीं होती. यह हमारी जिंदगी का हिस्सा हो गया है. तो फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’’ में भी प्राॅपर्टी के लोभ में ही यह चारो भाई बहन आए हैं.

फिल्म‘‘क्रेजी कुककड़ फैमिली’’ की कहानी के केंद्र में एक परिवार है. मगर आपको नहीं लगता कि लंबे समय से सिनेमा से परिवार गायब हो चुका है?

-परिवार आता है, वह अपने तरीके से आता है. कुछ फिल्में षादीयों पर बनती है. पर इंसानी ज़िन्दगी व परिवार के अंदर की छोटी मोटी, खट्टी मीठी चीजों पर फिल्में नहीं बनती. इसलिए मुझे यह फिल्म खास लगती है, कि इसमें यह सब है. हमारी फिल्म ऐसे परिवार की बात करती है, जो कई बरसों से गायब है. भाई बहन नजर नहीं आते. यदि नजर भी आते हैं, तो उन्हे बड़े टिपिकल रूप से पेश किया जाता है. मुझे लगता है कि फिल्मों में ऐसा परिवार होना चाहिए, जिसमें भाई बहन हों. क्योंकि उससे हर इंसान का बचपन जुड़ा होता है. यह बहुत अनूठी कहानी है.

कोई दूसरी फिल्म कर रही हैं?

-जी हां! सुजाॅय घोष की फिल्म ‘‘दुर्गा रानी सिंह’’ कर रही हूं. यह फिल्म मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

निर्देशन में जाने की कोई योजना है?

-कुछ समय पहले हमने अपने वैशाली के स्कूल के लिए एक डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्देशित की थी. फिलहाल एक पटकथा पर काम कर रही हूं. यदि सब कुछ ठीक रहा, तोे निर्देशक बन सकती हूं.

 


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Mayapuri

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