‘‘ हमारी फिल्म परिवार को लेकर बहुत माॅडर्न सीख देती है’’- स्वानंद किरकिरे

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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से फिल्म डिजाइनिंग और निर्देशन में डिप्लेामा हासिल करने व दिल्ली में थिएटर करने के बाद मुंबई पहुॅचे स्वानंद किरकिरे ने अपने कैरियर की शुरूआत बतौर सहायक निर्देशक सुधीर मिश्रा के साथ की थी. उन्होने सुधीर मिश्रा के साथ तीन फिल्में की. मगर बालीवुड में उनकी पहचान बनी गीतकार के रूप में. पर उन्होंने गीतकार के साथ साथ गायक, संगीतकार, अभिनेता व लेखक के रूप में भी काम किया. पर इन दिनों उनकी चर्चा प्रकाश झा निर्मिता व रितेश मेनन निर्देशित काॅमेडी फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’’ में अभिनय करने को लेकर हो रही है. जिसमें उन्होेेने मुख्य भूमिका निभायी है.

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आपके घर में संगीत का माहौल था. पर आपने ..फिल्म निर्देशन की बात सोची?

-आपकी बात सही है. पर मेरे साथ बहुत बड़ी दिक्कत रही है. मेरे पिता कुमार गंधर्व के शिष्य रहे हैं. मेरे घर में क्लासिकल संगीत का माहौल रहा. जबकि मुझे थिएटर रास आता था. जब मैं थिएटर से जुड़ा, तो मुझे वह शास्त्रीय संगीत की दुनिया कुछ अजीब सी लगी. क्योंकि शास्त्रीय संगीत की दुनिया में गुरू शिष्य परंपरा होती हैं. गुरू ने जो कह दिया, वही परम सत्य होता है. मगर हमें नाटक की दुनिया में समझ में आया कि सभी एक समान है. कोई छोटा बड़ा नहीं. मैंने देखा कि एक बैंक का मैनेजर और चपरासी दोनों एक साथ नाटक करते हैं. उस दौरान यदि उनके पात्र ऐसे हैं कि चपरासी मैनेजर को थप्पड़ भी मार देता है. तो मुझे लगा कि नाटकों की दुनिया डेमोके्रटिक दुनिया है. यहां काम के दौरान छोटे बडे़ का कोई लिहाज नहीं करना होता है. मुझे नाटकों की दुनिया की लोकतांत्रिक प्रणाली बहुत रास आयी. इसलिए मैं संगीत की दुनिया में नहीं गया. पर संगीत की दुनिया घूमकर मेरे पास आ गयी. तो मुझे लगा कि मैने गलती की. मुझे संगीत की भी ट्रेनिंग ले लेनी चाहिए थी.

अब तो आप सारा ध्यान अभिनय की तरफ ही दे रहे हैं?

-ऐसा कुछ नही है. मैं यहां अच्छा रचनात्मक काम कर रहा हूँ. कुछ दिन पहले निर्देशक राज कुमार हिरानी की फिल्म ‘‘पी के’’ के गीत भी लिखे, जो काफी चर्चा में हैं. पर जब भी मुझे अभिनय करने के आॅफर मिले, मैं मना नहीं कर पाया. आखिर मुंबई आने से पहले दिल्ली में नाटकों से जुड़ा हुआ था. मैंने दिल्ली में रहते हुए कई नाटकों में अभिनय किया था. इन दिनों मानव निर्देशित नाटक ‘‘ब्लाइंड कलर’’ में भी अभिनय कर रहा हॅूं. अब तक कुछ फिल्मों में दोस्तों के कहने पर छोटे छोटे पात्र निभाता रहा. पर पहली बार मुझे फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फेमिली’’ में फुल फ्लेज्ड पात्र निभाने का मौका मिला है.

फिल्म ‘‘के्रजी कुक्कड़ फैमिली’’ के साथ बतौर अभिनेता जुड़ने की क्या वजह रही?

-सबसे पहले तो किरदार मुझ पर फिट हो रहा था. मुझे लगा कि इस किरदार को मैं बहुत अच्छी तरह से निभा सकता हूं. पूरी फिल्म में मेरा किरदार है. इसके अलावा इसमें जो परिवार है, वह बहुत माॅर्डन और आज का परिवार है. मुझे लगा कि इस तरह के परिवार के साथ हर कोई रिलेट करेगा. यह तीन भाई और एक बहन का परिवार है. जो कभी एक दूसरे से मिलते नहीं है. चारों एक दूसरे के संपर्क में नहीं है. चारों अपनी अपनी दुनिया में व्यस्त है. जब मां उन्हें संदेश भेजती है कि तुम्हारे पिता की मौत तय हो गयी है, वह कोमा में चले गए हैं. तब सभी अपने माता पिता के घर इसलिए आते हैं कि उसके पिता ने वसीयत में उनके नाम पर कितनी प्राॅपर्टी दी है. यानी कि यह बहुत ही रीयल पात्र हैं, रीयल परिवार है और रीयल कहानी है.

फिल्म के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

-एकदम चालाक, जुगाड़ू, तिकड़मी इंसान का किरदार है. इस तरह के पात्र अक्सर नजर आते हैं. यह ऐसा पात्र है, जो बार बार अपना काम बदलता रहता है. असफल होने पर भी यही कहते है कि मेरी टाॅंग तो उपर है. इस तरह के पात्र हमारे समाज में काफी हैं. मैं तो इंदौर से आता हूँ. इंदौर में मैंने हजारों ऐसे पात्र देखे हैं.

फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’’ के निर्देशक रितेश मेनन की यह पहली फिल्म है. आपने उन पर किस आधार पर यकीन किया?

-दो वजहें. पहली बात तो फिल्म का निर्माण प्रकाश झा कर रहे थे. प्रकाश झा यूॅं ही किसी फिल्म का निर्माण करने से रहे. उन्होने रितेश में कुछ तो देखा होगा. फिर जब मैं रितेश मेनन से मिला, तो हमारी बात हुई, तब लगा कि यह काम कर सकता है. तीसरी वजह उसका अनुभव रहा. वह आठ साल तक संतोश शिवन के साथ काम कर चुका है.

फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’’ एक परिवार की कहानी है. पर बाॅलीवुड में पिछले बीस साल से परिवार गायब है. तो आपको लगता है कि इस फिल्म के बाद एक बार फिर सिनेमा में परिवार वापस आएगा?

-जब मैंने इस फिल्म की स्क्रिप्ट सुनी, तो मेरे दिमाग में भी यही बात आयी थी कि अब मेरी इस फिल्म के साथ सिनेमा में फिर से परिवार वापस आएगा. पिछले बीस साल से फिल्मकार परिवार की कहानी बना ही नहीं रहे थे. जब मैंने इसकी स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मुझे लगा कि यह तो एक माॅडर्न परिवार की कहानी है. फिल्म ‘‘के्रजी कुक्कड़ फैमिली’’ में

किसी ट्रेडिशनल परिवार की कहानी नहीं है. लोग भूलते जा रहे थे कि परिवार क्या है या परिवार कैसा होना चाहिए?

-यह सब भूलते जा रहे हैं.लोग सिर्फ इतना जानते हैं कि यह मेरा पिता है और इसकी प्राॅपर्टी मेरेे हाथ में किसी तरह आ जाए.आज हालात यह हैं कि किसी भी इंसान को अपने भाईयों या बहनों की चिंता नहीं है. सिर्फ प्राॅपर्टी के लालच में उनसे संबंध बनाए रखता है. हमारी फिल्म का अंत लोगों को सिखाएगा कि परिवार भी कुछ होता है. तो हमारी फिल्म परिवार को लेकर बहुत माॅडर्न सीख देती है. मुझे भी लगा कि एक लंबे समय बाद परिवार की कहानी आ रही है.

निर्देशक कब बन रहे हैं?

-कोशिश चल रही है. इस साल फिल्म शुरू करने की सोच रही हॅूं.

गीतकार या गायक के तौर किसके साथ काम करना पसंद करते हैं?

-मेरे दो पसंदीदा संगीतकार हैं अमित त्रिवेदी व शांतुन मोइत्रा.

 

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Mayapuri