पद्मविभूषण अमिताभ बच्चन एक शुरूआत बिना अंत के साथ

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ये पहली बार हुआ है मेरे साथ कि मैं लिखता ही जा रहा हूं। एक बहुत बड़ी कहानी उनके बारे में जो कल को भगवान बनने वाले हैं। वह   उम्र के पढ़ाव के शानदार स्कोर बना रहे हैं और वो भी बिना आउट हुए। उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत संघर्ष किया साथ ही बहुत बार निरादर का सामना भी किया है। लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। वो जो बनना चाहते थे वो बने, सच वो उस समय भगवान थे और आज भी भगवान हैं और आगे भी रहेंगे। वो जितने लंबे हैं उतना ही महान बनना चाहते थे। इस लीजेंड को बिग बी के नाम से जाना जाता है। मेरी तो बस भगवान से यही प्रार्थना है, कि ये जरूर सेंचूयरी बनायेंगे। इन कुछ सालों में मैंने देखा है संघर्ष करने वाले आसमान छू रहे हैं और कुछ जमीन पर ही है।

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अमिताभ बच्चन को पद्मविभूषण मिलने के उपलक्ष्य में मैं उनके बारे में कुछ बताना चाहूंगा। वो पढ़े-लिखे एक आम लड़को थे और बेटे थे महान कवि हरिवंश राय बच्चन के। उनकी माता का नाम तेजी बच्चन था। कलकत्ता के बर्ड एण्ड कंपनी में उनकी आरामदायक नौकरी थी। वो हमेशा अभिनेता बनना चाहते थे और इसलिये वो जुड़े एक टैलेंट कॉन्टेस्ट से जिसे संगठित किया था टाइम्स ग्रुप के दो फेमस पत्रिका ने। उनके इस फॉर्म को अमिताभ के भाई अजिताभ ने भरा था। एक हफ्ते के बाद उन्हें सूचना मिली की उनके फॉर्म को रिजेक्ट कर दिया गया है। उनकी मां ने अपने मुन्ने के सपने को सकार करने की कसम खाई थी। आखिरकार अमिताभ बच्चन की मां ने अपने सबसे अच्छी दोस्त और उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बात की जोकि सुनील दत्त और नर्गिस दत्त के करीबी थी और उन्होंने भी मदद करने के लिए इंदिरा गांधी से वादा किया।
वो बहुत मेहनत से काम कर रहे थे जब उनकी उम्र 20 थी और आज भी जबकी वो 70 साल के हो चुके हैं। उनकी सफलता की अनेक कहानियां हैं। मैं याद करता हूं जब मैं अपनी प्रेमिका से मिलने कलिमपोंग जाया करता था तब एक बार दत्त साहब मुझे अपने साथ कलकत्ता ले गए। मुझे कुछ पता नहीं था कि वो क्या कर रहे हैं फिर उन्होंने मुझे कॉल करके दुसरे दिन एक अतिथि से मिलने के लिए बुलाया और वो अतिथि थी तेजी बच्चन। उन्होंने दत्त साहब से पूछा कि वो कैसे उनके बेटेकी मदद हीरोबनने में करेंगी। दत्त साहब ने कहा आप चिंता मत किजिए मैं ध्यान रखूंगा।

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उन दोनों की मुलाकात उसी दिन शाम 5.30 बजे की तय हुई। पहली बार मैं अमिताभ बच्चन से मिला और उनसे बात की। वो उस समय बिल्कुल वैसे ही थे जैसे वो अभी हुआ करते हैं। मैंने उनसे उनकी सारी परेशानियों को पूछा जो उनके साथ मुंबई में हुई जब कपूर्स, कुमार्स, खान्स और खन्नास राज किया करते थे। मैंने उनसे वादा किया कि मैं उन्हें सारे बड़े फिल्म मेकर से मिलवाऊंगा। मैं उनसे मिलकर बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि वो बेहद शालीनता से बात कर रहे थे। वो 1967 को बोम्बे पहुंच गए। मुझे उनकी वो तस्वीरें मिली जो पत्रिका के टैलेंट कॉनटेस्ट के लिए रिजेक्ट कर दी गई थी। मैं मिसेज नर्गिस दत्त के साथ इस नये लड़के को लेकर उस जमाने के जानेमाने फिल्म मेकर बी.आर चोपड़ा के पास गया। मैंने मिस्टर चोपड़ा से इस लड़के के बारे में कहा कि जिसकी सिफारिश देश की प्रधानमंत्री ने भी कि है, लेकिन इस बात का भी उन पर कोई खास असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि ये लड़का थोड़ा अलग है तुम किसी दुसरे फिल्म मेकर से सिफारिश करो और स्क्रिन टेस्ट करवाओ। मैं एक बार अमिताभ बच्चन को पार्टी में ले गया वहां किसी ने ये कह दिया कि तुम बिन बुलाये मेहमान को कहां से ले आये। इस बात को अमिताभ बच्चन ने सुन लिया और उन्हें बहुत बुरा लगा पर क्या कर सकते हैं इंडस्ट्री में ऐसे लोग भी होते हैं जो मानवता भूल जाते हैं।एक बार मैं इन्हें सेठ तारा चंद बड़जात्या के पास ले गया जो की राजश्री के हेड थे उन्होंने इनसे पूछा कि आप क्यों नहीं लिखते हो कविता अपने पिता जी कि तरह और फुटबॉल खेलते हो क्योंकि आपके पैर लंबे हैं। उसके कुछ दिन के बाद उन्होंने अमिताभ बच्चन को अपनी राजश्री के फिल्म सौदागार के लिए अभिनेत्री नूतन के साथ फिल्म में साइन किया।

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हमारे अगले पड़ाव थे उस जमाने के सबसे बड़े फिल्म मेकर मोहन सहगल जोकि अपनी फिल्म साजन की शूटिंग कर रहे थे। उस फिल्म में मनोज कुमार हीरो थे जोकि बहुत दयालू थे और उन्होंने अमिताभ बच्चन की मुलाकात सेहगल से करवायी। वो अमिताभ बच्चन से मिलकर बहुत खुश तो नहीं थे पर हां उन्होंने स्क्रिन टेस्ट के लिए बोला था। उस वक्त मेरे हाथ में मेरी मंगेतर का प्रेम पत्र था जो कि बहुत ज्यादा रोमांटिक था मैंने वो लेटर अमिताभ बच्चन को दिया और कहा इसके कुछ लाइन्स को पढ़ दो। लेकिन इससे भी बात नहीं बनी क्योंकि उन्होंने अमिताभ को ना लेने का मन बन लिया था। हमने एक साथ काफी समय बिताया कभी स्टूडियो के कम्पाउंड में तो कभी आॅफिस के कॉरिडोर में। मैं हमेशा याद करता हूं शशी होटल के बारे में जो राजश्री के पास है जहां हम अक्सर जाया करते थे और चाय पिया करते थे। वो दौर बहुत उबाउ था पर इस लड़के ने हार नहीं मानी। कुछ दिन बाद इनकी दोस्ती हो गई एफटीआइआइ के जया भादुड़ी, शत्रुघ्न सिन्हा, असरानी और डैनी से। वो इन्हे ले गए स्टूडियो और उसके बाद इन्होंने फिल्म साइन की सात हिंदुस्तानी।, रेश्मा और शेरा, परवाना और नमक हराम भी।

इन्होंने जया भादूडी के साथ बहुत सारी फिल्में की जिसमें ज्यादातर फिल्में फ्लॉप होगई।फिल्म मेकर इन दोनो के जोड़ी को नहीं देखना चाहते थे भविष्य में पर अमिताभ बच्चन ने जया भादूड़ी का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने अंतिम बड़ी फिल्म बंधे हाथ साइकी मुमताज के साथ पर ये फिल्म भी फ्लॉप हो गई उसके बाद इन्होंने तय किया कि वो कलकत्ता वापस जाकर बर्ड एण्ड कंपनी दुबारा ज्वाइन करेंगे। मुझे उनके लिए बहुत बुरा लग रहा था मैंने उनके लगन को देखा था और फिर वो जादू काम कर गया। दिग्गज अभिनेता ओम प्रकाश और प्राण अमिताभ से मिल कर बहुत ज्यादा खुश थे और जब जजीर में विजय के किरदार के लिए देव आनंद, धर्मेंद्र, और राज कुमार फेल हो गए तब इन दिग्गज अभिनेताओं ने मेहरा से इस नये लडके को लेने के लिए कहा। फिल्म में इनके साथ जया भादूड़ी अभीनेत्री थी और फिल्म की कहानी मशहुर लेखक सलिम-जावेद ने लिखी जिन्होंने फिल्म बॉम्बे टू गोवा। उन्होंने एक जिरो हीरो को विजय के किरदार के लिया साइन किया। फिल्म में एक कड़कदार पुलिस आॅफिसर के भुमिका को करना था जिसमें उन्हें प्राण जोकी विलेन के किरदार में थे उनपर कुर्सी फेकना था इस सीन को देखते ही दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी कि बॉलीवुड को एक नया सुपरस्टार मिल गया। मैं बहुत खुश होता हूं ये देखकर की उन्हें शुरूआती दौर में जितनी रिजेक्शन मिली थी उतने ही वो प्यारे और इजतदार हैं मिस्टर शहंशाह और अब पद्मविभूषण।े

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