मैं किसी से कम नही – पद्मा खन्ना

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मायापुरी अंक 51,1975

लोकप्रिय और आकर्षक व्यक्तित्व एवं सुंदर रंग रूप वाली नृत्यांगना अभिनेत्री पद्मा खन्ना से मिलने का सौभाग्य हमें पिछले दिनों ही हुआ।

प्राय: किसी कलाकार से मिलने के लिये उसके घर या स्टूडियो के कई कई चक्कर लगाने और दर्जनों फोन करने पड़ते हैं। मगर पद्मा खन्ना एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिससे मिलने में कोई खास असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। पद्मा के सेकेट्री मल्होत्रा जी से इस के लिए पहले से सीध संपर्क कर लिया था।

यह मल्होत्रा जी के सहयोग का ही नतीजा था कि सिर्फ दो-एक फोन के बाद एक सुबह हम पद्मा में ड्राइंग रूम बैठे थे।

अभी कुछ पल भी ना बीते थे कि एक मासूम-सी सूरत वाली नवयौवना होठों पर मृदुल मुस्कान लिये अपने दोनों हाथ नमस्ते की मुद्रा में जोड़े हमारे सम्मुख खड़ी हुई। विस्मित मुद्रा में हम उसे पहचानने का प्रयास कर रहे थे। विश्वास नहीं हुआ कि यह पद्मा खन्ना हो सकती है। कभी सोचा भी न था कि फिल्म के पर्दे पर सैक्स और ग्लेमर की इमेज रखने वाली पद्मा को निजी जीवन में इस कद्र सीधी-सादी और मामूली सी लड़की के रूप में देखना पड़ेगा। उसके बाल भी किसी घरेलू लड़की की तरह साधारण ढंग से बने हुए थे। चेहरे पर किसी प्रकार का कोई मेकअप नहीं था। काले रंग का साधारण-सा लम्बा फ्रॉक पहन रखा था।

पद्मा के इस सीधे-साधे रंग रूप में भी हमें बला का आकर्षण नज़र आया। पर्दे वाली पद्मा से यह घरेलू पद्मा कहीं अधिक सुंदर लगी। खिलखिला कर हंसते हुए शरारती लहजे में पद्मा ने कहा, रंगीला जी, किस सोच में पड़ गये?

हां, कुछ नहीं.. कुछ नहीं हड़बड़ा कर सचेत हो गये। पद्मा हमारे सामने वाली कोच पर बैठी थी।

इस बीच हमारे लिये कॉफी आ चुकी थी। कॉफी की चुस्की के साथ हमने पहला प्रश्न किया।

“जॉनी मेरा नाम” के बाद कई दिनों तक आपकी चर्चा बड़े जोरों पर चलती रही, लेकिन क्या कारण है कि बाद में वह बात बनी नहीं?

पल भर पद्मा ने ऊपर छत की ओर भरपूर देखा। जैसे प्रश्न की गहराई को समझने का प्रयास कर रही हो। फिर अपने गले पर हाथ फिसलाते हुए बड़े ही नाटकीय अंदाज़ से बोलीं।

“जॉनी मेरा नाम” में मेरे द्वारा जिस पात्र को पेश किया गया था, वह फिल्म दर्शकों के लिये एक अनोखी और नयी ही नहीं बल्कि रोमांचक एवं उत्तेजक था। इसमें उनके लिये एक अछूता आकर्षण था। शायद यही कारण था कि मुझे इस फिल्म ने अपार पब्लिसिटी प्रदान की। और चूंकि इस फिल्म के बाद मैं ऐसे अन्य किसी असामान्य रोल में नहीं आयी, इसलिए मेरे बारे में चली चर्चा का स्थायी रूप से बना रहना असंभव सा हो गया।

“जॉनी मेरा नाम” में आपना सैक्सी डांस दिखा कर तो हंगामा मचा दिया था, उस वक्त आपके मुकाबले में कोई और इस तरह की अभिनेत्री नहीं थी, लेकिन फिल्म जगत में सैक्सी इमेज वाली अनगिनत लड़कियां कदम रख चुकी हैं, इसका आप पर क्या प्रभाव हुआ है?

मुझ पर इसका क्या असर हो सकता है। मैं फिल्मों में केवल सैक्स के बल पर ही आयी हूं, ऐसी बात नहीं मुझमें अभिनय प्रतिभा की भी कोई कमी हो, ऐसा भी नहीं और ‘जॉनी मेरा नाम’ में मेरा रोल सैक्सी था।

मैं यह मानने को तैयार नहीं मेरी नज़र मे मेंरे उस रोल को सैक्सी का नाम देना गलत है। भला मजबूरी की हालत में कोई भी लड़की अपना सैक्सी रंग किस तरह दिखा सकती है। फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ में मैंने जो कुछ किया, वह कोई भी मजबूर लड़की कर सकती है।

लेकिन आजकल सैक्सी इमेज रखने वाली दूसरी अभिनेत्रियां रोल और उसकी आवश्यकता की ओर बिल्कुल ध्यान न देते हुए बिना जरूरत ही कपड़े उतारने पर तैयार हो जाती है। यह कोई ठीक बात नहीं।

आज की फिल्मों के बारे में आप के क्या विचार हैं?

आज की फिल्मों के बारे में मेरे ही नहीं हर दर्शक का यही विचार है कि हमारी फिल्में वास्तविकता से कोसों दूर हैं। फिल्म के पर्दे पर जो कुछ दिखाया जाता है वह हमारे जीवन में कहीं नज़र नहीं आता। यदि वास्तविक जीवन में सिर्फ चार आदमी भी दारा सिंह पर भी हमला कर दें तो वह शायद ही मुकाबला कर पाएं। परंतु हमारी फिल्मों में अकेला हीरो पूरी फौज को भी मार भगा देता है। मुझे अपनी फिल्मों की यह सारी बातें बहुत खटकती है।

तो क्या आपने कभी अपनी और से फिल्मों में सुधार लाने का प्रयत्न किया?

फिल्मों में सुधार लाना एक अकेली पद्मा के बस का रोग नहीं। और फिर वह यह काम अभिनय करने बालों का नहीं हम तो कठपुतली मात्र हैं।

फिल्मों में सुधार लाने के लिये आप अकेली कोई कदम नहीं उठा सकती हम मानते हैं, परंतु शूटिंग के दौरान अपनी मर्जी से आप कोई सीन या डायलॉग तो अवश्य बदल देती होंगी?

जी नहीं निर्देशक के आगे अपनी अक्लमंदी जताना मैं उचित नहीं समझती। हां, यदि किसी सीन या किसी डायलॉग को अदा करते हुए कुछ कठिनाई हो रही हो तो मैं निर्देशक का ध्यान इस ओर दिलाना गलत नहीं समझती।

तो इस का मतलब है पद्मा जी, आपको किसी प्रकार के हस्तक्षेप करने की आदत नहीं है।

मैं हमेशा मिल-जुल कर आनंद के साथ काम करना पसंद करती हूं।

अच्छा पद्मा जी, अब यह बताइये, आपकी आउटडोर शूटिंग बहुत भाती है।

हमने सुना है कि फिल्मों में आप अपनी नर्तकी और सैक्सी गाने वाली इमेज को तोड़ कर नायिका की भूमिका करना चाहती हैं। आपकी यह तमन्ना कहां तक पूरी हुई।

फिल्मों में हीरोइन बनने की तमन्ना अभी आधी-अधूरी ही है। अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘सौदागर’ में मैं नायिका की भूमिका निभा चुकी हूं। इस वक्त मेरे पास नायिका के रूप में और भी कई फिल्में हैं, जिनमें ‘निशाना’ ‘चेतना’ दोराहे पर और एफ.सी. मेहरा की एक फिल्म भी है। लेकिन नायिका के रूप में मुझे अभी वह अवसर नहीं मिला जो मैं चाहती हूं।

नए कलाकारों के बारे में आपका क्या कहना है?

नए कलाकारों के आगमन पर मैं बहुत खुश हूं। जमाने को नए खून की हमेशा से ही जरूरत रहती है। लेकिन मजा तब है कि यह नया खून कोई नई बात पेश करें, तेजी से उभरना कुछ अच्छा नहीं। फिर भी दो-एक आर्टिस्ट ऐसे हैं जिन्हें वाकई आर्टिस्ट कहा जा सकता है जैसे जया भादुड़ी और राखी। लेकिन आज इन दोनों अभिनेत्रियों ने अपने को फिल्मों से काफी दूर-सा कर लिया है।

इसी तरह मैं अमिताभ बच्चन को भी अच्छा एक्टर मानती हूं

हमने तुरंत दूसरा प्रश्न करना चाहा, परंतु तभी सामने टेबल पर रखा टेलिफोन पर गयी और हमारी नज़र अचानक दीवार पर टंगी वाल क्लॉक से जा मिली। और तुरंत हमें अहसास हुआ कि पद्मा का काफी समय ले चुके है।

पद्मा ने टेलीफोन पर जैसे ही अपनी बात खत्म की, हम भी उठ खड़े हुए। धन्यवाद करते हुए पद्मा से आज्ञा ले कर चले आए।


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Mayapuri

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