INTERVIEW!! ‘‘ यहां हमें इरान ‘मुंबई सलाम’ कह रहा है’’ – पहलाज निहलानी

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विवादित सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी इन दिनों बतौर को-प्रोड्यूसर इंडो इरान कोलेब्रेशन की फिल्म ‘सलाम मुबंई’ कर रहे है। हाल ही में इस फिल्म की फस्र्टलुक लांचिंग होटल सन एंड सन में हुई। वहीं पर उनसे फिल्म के अलावा भी और कई मुद्दों पर बात हुई।

इस फिल्म से कैसे जुड़ना हुआ ?

ये लोग पिछले साल यहां आये थे, लोकेशन देखने। सब्जेक्ट इनके पास था। उसी दौरान मेरी इनसे मुलाकात हुई। हमारी फिल्म को लेकर बातचीत हुई। इसके बाद मैं इरान गया और वहां इस फिल्म का अनुबंध हुआ। इसके बाद वहां प्रैस कांफ्रेंस भी हुई जिसमें फिल्म के साथ बतौर को-प्रोडयूसर मेरे अनुबंध की घोषणा भी की गई थी।

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मुंबई में शूटिंग करने से सभी कतराते हैं ?

दरअसल मुंबई में शूटिंग को लेकर इतने प्रतिबंध हैं कि अलग अलग परमिशन लेने में ही नानी याद आ जाती है। हर बार यहंा वन विंडो सिस्टम की घोषणा तो होती हैं लेकिन आज तक लागू नहीं किया गया। हर साल कितने सेमिनार लगते हैं कितने लोग बाहर कन्ट्री से अपना सामान बेचने आते हैं और अपने देश की सुंदर लोकेशन दिखाते हैं वन विंडो परमिशन के तहत अपनी लोकेशन फ्री देते है। कितने देश कितने प्रतिशत कन्शेसन देते हैं। अगर हमें यहां किसी अस्पताल में शूटिंग करने के लिये तीन चार लाख खर्च करने पड़ते हैं जबकि वहां हमें ये अस्पताल जैसी लोकेशन फ्री में मिल जाती हैं। जबकि पता नहीं क्यों हमारी सरकार इन बातों को नजरअंदाज करती रहती है। दूसरे हमारी वर्कर यूनियनें भी तानाशाह हैं। जबकि बाहर का कू्र पूरी तरह सपोर्ट करता हैं।

बावजूद इसके सलाम मुंबई की शूटिंग यहां हुई ?

मेरी खुश किस्मती हैं कि मेरी जान पहचान की बदौलत यहां फिल्म की शूटिंग बिना किसी प्राॅब्लम के शांति से पूरी हुई। यानि किसी इरानी कोलोब्रेशन की इंडिया में पहली बार किसी फिल्म की शूटिंग हुई। मैं आपके जरिये ये बात महाराष्ट्र सरकार तक पहुंचाना चाहता हूं कि जिस प्रकार विदेशी हमें प्रोत्साहन देते हैं हमें भी उनके साथ वहीं सब करना चाहिये। मुंबई में लोगबाग यहां सिर्फ शूटिंग देखने आते हैं वरना यहां टूरिज्म के नाम पर कुछ नहीं हैं इसलिये सरकार को इस बात का फायदा उठाते हुये बाहरी लोगों को सारी सहुलियते देनीे चाहिये।

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आपने हमेशा कमर्शियल फिल्में ही बनाई हैं सलाम मुंबई किस तरह की फिल्म है?

एक वक्त था बासू भट्टाचार्य या बासू चटर्जी की फिल्में वसई विरार से आगे नहीं चल पाती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं हैं आज इन फिल्मों का स्वरूप बदल गया है लिहाजा आज ये फिल्में भी मल्टी प्लैक्स में अच्छा बिजनेस करती है लेकिन इंटीरियर में आज भी मसाला फिल्में ही चलती हैं। आज अक्षय कुमार की फिल्में बेबी पिचासी प्रतिशत धंधा करती है तो शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले दो सौ प्रतिशत धंधा करती है सलाम मुंबई बीच की फिल्म है। इसमें दो देशों का कल्चर दिखाया है।

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सेंसर बार्ड का अध्यक्ष बनने के बाद आपकी बतौर प्रोड्यूसर ये पहली फिल्म आ रही है?

मैं जब सेंसर चीफ नहीं था मैंने तब भी जो फिल्में बनाई उनमें किसी में कोई सेंसर ट्रबल नहीं था। मैं जैसी कल फिल्में बनाता था आज भी वैसी ही साफ सुथरी फिल्में बना रहा हूं। इसलिये मुझे किसी बात की कोई चिंता नहीं है।

सलाम मुंबई शीर्षक क्या कहता है?

हम वहां जा रहे हैं तो और इरान हमें मुंबई सलाम कह रहा है।

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Mayapuri