मूवी रिव्यू: औरत की विवशता भरी लाइफ का प्रभाशाली चित्रण ‘पार्च्ड’

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शब्द और तीन पत्ती जैसी फिल्में डायरेक्ट कर चुकी लीना यादव की फिल्म ‘’पार्च्ड’ तीन ऐसी आरतों की कहानी है जो फिल्म के टाइटल ‘पार्च्ड’ की वास्तविकता दर्शाती हैं टाइटल का मतलब सूखा होता है। फिल्म में इन तीनों की जिन्दगी भी एक सुखे के तरह ही है।

कहानी

कहानी राजस्थान और गुजरात के बार्डर के ऐसे गांव की है जंहा रह रही तीन ओरतें जिनकी जिन्दगी में ऐसा कुछ भी नहीं जिनके सहारे वो कोई खुशी मना सके। रानी यानि तनिष्ठा चटर्जी का विवाह बहुत कम उम्र हो गया था लिहाजा महज पंद्रह वर्ष का आयु में वो मां बनने के बाद विधवा भी हो गई। आगे उसने अपने आपको नजरअंदाज कर अपने बेटे गुलाब को पाला। और उसके बाद भारी कर्ज उठाकर उसकी शादी जानकी नामक पंद्रह वर्ष की लड़की से की। लेकिन गुलाब सतरह साल की उम्र में ही अपनी मर्दानगी दूसरी औरतों को दिखाने में ही व्यस्त रहा। रानी को एक अज्ञात शख्स शाहरूख खान बन मोबाइल कर उसकी भावनाओं को जाग्रत करता है क्योंकि सास बन चुकी रानी अभी सिर्फ बत्तीस साल की है। लाजो यानि राधिका आप्टे एक ऐसी औरत है जिसे समाज और उसके पति ने बांझ करार दे रखा है मां बनने को लालियत लाजो अपने शराबी पति के जुल्मों का शिकार है। बिजली यानि सुरविन चावला नोटंकी में नाचने गाने के अलावा अपना शरीर भी बेचती है और रानी और लाजो को सपने दिखा कर उन्हें उनके बुरे हालात के बाद भी खुशी देने की कोशिश करती है। एक वक्त ऐसा भी आता है जब रानी अपने बेटे से बेजार हो अपनी बहू जानकी को उसके प्रेमी के साथ भेज सुकून का एहसास करती है वहीं लाजों भी बिजली के सौजन्य से किसी दूसरे शख्स के साथ शारिरिक आंनद लेते हुये मां बनने का सुख भी प्राप्त करती है।  एक वक्त ऐसा आता है जब तीनों सामाजिक बंधनों और विवशता भरी जिन्दगी से निजात पा लेने का निर्णय ले लेती हैं।parched-movie-image

डायरेक्शन

लीना यादव ने इस बार राजस्थान के एक गांव की तीन औरतों के माध्यम से दिखाने की कोशिश की है कि आज के आधुनिक समाज में जंहा मोबाईल और टीवी जैसी चीजों के रहते भी औरत पारंपरिक विषमताओं और पुरूषों के अहम को सहन करते रहने को मजबूर है। बाद में किस प्रकार तीन ओरतें उन मान्यताओं को तोड़ बहार निकलने का फैसला करती हैं। निर्देशक ने गालीयों भरी भाषा और राधिका आप्टे तथा सुरवीन द्धारा दिये गये बोल्ड दृश्यों के साथ स्वाभाविक तौर पर अपनी बात कहने की सार्थक कोशिश की है।surveen-chawla

अभिनय

तनिष्ठा चटर्जी अभी तक दर्जनों अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों का हिस्सा रह चुकी है। उसने अपनी भूमिका को स्वाभाविक तरीके से निभाया है। वहीं राधिका आप्टे ने मां बनने को तरसी और बांझ होने का दंश झेलती अपने पति के जुल्मों का शिकार ओरत को बड़ी कुशलता से अंजाम दिया है। इसक अलावा उसके बोल्ड सीन उत्तेजना पैदा न करते हुये उसकी विवशता को दर्शाते हैं। वहीं सुरवीन चावला ने समाज से तिृस्कृत औरत बिजली के रोल में बोल्ड नेस के चलते गालियों और अपने शरीर का कुछ इस तरह इस्तेमाल किया है कि दर्शक उससे हमदर्दी रखने लगता है। इसके अलावा नाबालिग बहू के रूप में लहर खान भी ध्यान आकर्षित करती है।parched-movie

क्यों देखें

अभी तक करीब दो दर्जन फिल्म फेस्टिवल्स में प्रशंसा प्राप्त फिल्म आधुनिक समाज के एक ऐसे पहलू का प्रदर्शन करती हैं जंहा आज भी औरत की बेबसी सोचने पर मजबूर करती है। तीन औरतों की सूखी और विवशता भरी जिन्दगी से निजात पाने के प्रभावशाली चित्रण देखने के लिये फिल्म देखी जा सकती है।

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Mayapuri

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