परवीन बॉबी संजय की बहन या प्रेमिका

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Parveen Babi-9

 

मायापुरी अंक 5.1974

“सफलता तो बड़ो-बड़ों का दिमाग पलट देती है, परन्तु कुछ लोग ऐसे भी होते है जिनका दिमाग सफलता पाने से बहुत पहले ही पलट जाता है। ऐसे लोगों में एक नाम संजय का भी है।

“सजय नई-नई लड़कियों से दोस्ती करने के लिए पागल रहता है संजय अपना गुस्सा काबू में नही रखता। संजय बदतमीज है….!

इन सब उड़ती बातों के घेरे में खड़ा संजय एकाएक रहस्य के गहरे दायरे में खोता चला जाता है। ऐसा लगता है मानो संजय एक बहुत ही गिरा हुआ इन्सान है। बम्बई की मायानगरी का ऐसा बदनुमा दाग है जिसकी कालिमा ने सारे फिल्म उद्योग को काले रंग में रंग दिया है।

अभी कुछ ही दिन हुए हवा उड़ी थी संजय और परवीन बॉबी को लेकर। कई जगह इनके रोमांस को चटकारे ले-ले कर लिखा-पढ़ा’ कहा और सुना गया। यहां तक कहा गया कि परवीन बॉबी का सहारा ले कर संजय अपने गिरते नाम को उठाना चाहता है। परवीन को काम में ला रहा है अपनी व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धि के लिए।

‘आप भी क्या बात करते है ? इसकी प्रतिक्रिया में संजय कहता है ‘परवीन के लिए तो मैं ऐसा सोच भी नही सकता। वह तो मेरी बहन की तरह है और मुझे अब्बास भाई कहती है। अगर वह मेरी फिल्म ‘चाँदी’ ‘सोना’ में रोमांटिक रोल करती है तो इसका मतलब यह नही कि वह मेरे व्यक्तिगत जीवन में भी वही करेगी।

अब जरा संजय की महिला मित्रों को भी देखिए। एक लड़की है जो अपने-आप को संजय की भूतपूर्व प्रेमिका बताती है। आजकल वह अपना राशन-पानी पीठ पर बांध कर सारी बम्बई में घूम रही है और केवल एक ही काम कर रही है, संजय की बुराई। पुरानी बातों को खोद-खोद कर काला जामा पहना रही है।

संजय ऐसे लोगों द्धारा की गई अपनी बदनामी के बारे में ज्यादा नही सोचता। उस का तो एक उसूल है, अगर कोई लड़की दस लोगों के सामने उसे गाली देती है तो वह बीस लोगों के सामने उसे दो गालियां देगा। उस समय वह इस बात की चिंता नही करता कि लड़की से उसकी दोस्ती दस दिन को है या दस मास की। लगता है यह लड़की भी संजय के इसी उसूल की मारी हुई है।

संजय इस बात को मानता है कि शुरू की कुछ सफल फिल्मों ने उसका दिमाग पलट दिया था। इस का नतीजा भी उसे तुरन्त मिल गया। उसने पलटे दिमाग को लेकर कई ऐसी फिल्में साइन कर ली जो टिकट की खिड़की पर लाइन लगा कर पिटी। खुदा की इस खामोश मार ने संजय को सीधा कर दिया। इस सारी बात को वह इस रूप में लेता है “इन्सान वही है जो गिरकर सम्भल जाए,

हीरो से फिल्म निर्माता तक की छलांग लगाने वाले संजय को स्वनिर्मित फिल्म ‘चाँदी-सोना’ पर बहुत नाज है, बहुत आशाएं है।

“भारतीय फिल्म इतिहास में पहली बार मेरी फिल्म ‘चाँदी-सोना’ की इतनी बड़ी यूनिट (43 सदस्य) विदेश (मॉरीशस) में शूटिंग के लिए गई.पहली बार हॉलीवुड के प्रसिद्ध युद्ध संयोजक विलियम सेवयर, जिसने ‘फ्राम रशिया विद लव, ‘व्हेयर ईगल्स डेयर’ और ‘कैसीनो रॉयले’ जैसी फिल्मों में लड़ाई संयोजन किया है, मेरी फिल्म में युद्ध निर्देशन देने मॉरीशस आया इसी के साथ मॉरीशस पहुंचा इंग्लैण्ड का विशेष प्रभाव विशेषज्ञ जसजीत सिंह मेरी फिल्म में काम करने (पहली बार)”

लगता है संजय अपनी फिल्म ‘चाँदी-सोना से बम्बई के सारे हीरो भाइयों को प्रसिद्धि के मैदान में पीटना चाहता है (पहली बार)

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Mayapuri