बोल्ड हीरोइन परवीन बॉबी

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मायापुरी अंक 9.1974

1973 में फिल्म इन्डस्ट्री में दो धमाके हुए। पहला धमाका फ्लाप शोमेन राजकपूर की फिल्म ‘बॉबी का था और दूसरा बी. आर. इशारा की खोज परवीन बॉबी का लोगों का ख्याल है कि परवीन ने बॉबी की सफलता से प्रभावित होकर अपने नाम के साथ ‘बॉबी’ बढ़ाया है। किन्तु दुरूस्त नही है. परवीन बॉबी जूनागढ़ शाही घराने से संबंध रखती है, उसी के कारण वह अपने को बॉबी लिखती है।
परवीन बॉबी इस लिहाज से बड़ी भाग्यशाली है कि वह बिना किसी फिल्म के रिलीज हूए ही ‘स्टार’ बन गई थी। और मजे की बात यह है कि उसकी पहली फिल्म ‘चरित्र’ बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रही किन्तु इसके बावजूद उसपर नई फिल्मों की वर्षा बन्द नही हुई वरना हमारे यहां अगर किसी की पहली ही फिल्म न चल तो उस पर इन्डस्ट्री के दरवाजे बन्द से हो जाते हो (आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा कि ‘बाजार बन्द करो’ की नायिका मधु मांजरेकर को सुबोध मुखर्जी शशीकपूर के साथ हीरोइन लेना चाहता था, किन्तु मधुकर बी. आर. इशारा का जादू बोल रहा था क्योंकि उसकी खोज परवीन बॉबी एक ही फिल्म से स्टार बन गई थी। उसने सुबोध मुखर्जी की ऑफर ठुकरा दी और इशारा के ‘बाजार बन्द करो के साथ उसका बाजार भी बन्द हो गया).
परवीन बॉबी ने इन्डस्ट्री में आने से पूर्व एक आजाद ख्याल लड़की की तरह जीवन बिताया था। उसने एम.ए. करने के पश्चात रंगमंच पर काम किया और साड़ियों के लिए मॉडलिंग भी की।
जीनत अमान और परवीन बॉबी की आपस में शकले बड़ी मिलती है। और इस बात का भी परवीन को बड़ा फायदा हुआ है। जो लोग जीनत को ध्यान में रख कर फिल्म का स्क्रिप्ट तैयार करते थे उन्हें जीनत के बजाए परवीन को लेने में हिचक महसूस नही करते थे। परवीन जीनत के मुकाबले मे डॉयलाग अच्छी तरह अदा करती है और भाषा जानती है। इसलिए भाव-भंगिमा का प्रदर्शन भी भली-भांति जानती है।
यह तो सभी जानते है कि यह फिल्म लाइन शो बिजनेस है। और शो बिजनेस के लिए कुछ न कुछ ऐसा करते रहना चाहिये जिस से फिल्म वाले आकर्षित हुए बिना न रहें। और इस संबंध में वह रेखा की उन्नति को देख चुकी थी। और यह बात। उसके मास्तिष्क में बैठ गई थी कि फिल्म इन्डस्ट्री में रहने के लिए न्यूज मे रहना जरूरी है। इसलिए उसने ऐसी बातें की जिन्हें समाचार पत्र और फिल्म-पत्रिकाएं खूब उछाला करते है।


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Mayapuri

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