मूवी रिव्यू: एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है – ‘फोबिया’

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रेटिंग***

निर्देशक पवन कृपलानी की फिल्म ‘ फोबिया’ भी उनकी पिछली फिल्मों ‘रागिनी एमएमएस’ तथा डर एट द मॉल की तरह एक थ्रिलर फिल्म है लेकिन उसमें डरने की वजह भूतप्रेत नहीं बल्कि एक बीमारी ‘फोबिया’ है इसलिये इसे साइकोलॉजिकल थ्रिलर कहना बेहतर होगा।

कहानी

राधिका आप्टे यानि महक को न जाने किस तरह का फोबिया है क्योंकि उसे हर वक्त न जाने क्यों ऐसा लगता रहता है कि या तो कोई आने वाला है या फिर कोई उसके आस पास है। उसकी इस हालत को देखते हुये उसकी बहन और उसका ब्वायफ्रेंड सत्यदीप मिश्रा यानि शान उसे किसी दूसरे घर में शिफ्ट कर देते हैं। लेकिन वहां भी उसकी वही हालत रहती है। एक वक्त तो ऐसा भी आता है जब उसका बाहर तक निकलना बंद हो जाता है। क्या महक इस अजीबो गरीब बीमारी से निजात पा पाती है ?

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निर्देशन

पवन कृपलानी इस तरह की थ्रिलर फिल्में बनाने में पूरी तरह से माहिर हैं। यहां भी उन्होंने रोमांच और डर का माहौल बनाये रखा। उस डर और रोमांच को बैंकग्राउंड म्यूजिक और ज्यादा प्रभावशाली बना देता है। एक ही घर में लिये गये कितने ही शाट्स अच्छे लगे।

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अभिनय

इससे पहले भी अपनी फिल्मों से राधिका आप्टे साबित कर चुकी हैं कि वे एक बेहतरीन अदाकारा हैं। लेकिन ये रोल उनके लिये काफी चुनौतीपूर्ण था जिसे उन्होंने पूरी तन्मयता से निभाया। उनके अलावा सत्यदीप मिश्रा ने अपनी भूमिका को बेहतर तरीके से अंजाम दिया ।

क्यों देखें

थ्रिलर फिल्मों के शौकिन दर्शकों के लिये फिल्म में वो सब कुछ है जो वे देखने के आदी हैं।


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Mayapuri

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