INTERVIEW: ‘‘मैं जमीन से जुड़ी हुई लड़की हूँ’’ – पिया बाजपेयी  

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लिपिका वर्मा

पिया बाजपेयी तमिल एवं तेलुगु फिल्मी दुनिया में खूब धूम मचा कर अब बॉलीवुड का रुख किए हुए हैं। फिल्म ‘लाल रंग’ में रणदीप हुड्डा के अपोजिट एक बेहतरीन किरदार में नजर आयी पिया। और अब उनकी दूसरी फिल्म ‘मिर्जिया जूलीएट’ बहुत जल्द बड़े पर्दे पर अपना जलवा दिखाने आ रही है। पिया का  मानना है कि यदि आप के अंदर मेहनत  करने की और सही डायरेक्शन में काम करने की हिम्मत हो तो जीत आपको जरूर मिलेगी। अपना भाग्य बनाने की पिया ने जो ठानी तो पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखा।.. तमिल से तेलुगु और अब बॉलीवुड में अपना परचम फहराने पिया बहुत ही सोच समझ कर फिल्में साईन कर रही हैं।

पेश है पिया के साथ लिपिका वर्मा की बातचीत के कुछ अंश

अपनी जर्नी तमिल से तेलुगु और अब बॉलीवुड फिल्म्स कैसे देखती हैं?

देखिये मैं इटावा से बिलोंग करती हूँ। मेरी माताजी अध्यापिका रही है और उन्होंने मेरी  परवरिश बहुत ही बेहतरीन ढंग से की है – हमारे अंदर ढेर सारा कॉन्फिडेंस जो भर दिया। उनकी शिक्षा के कारण ही मुझे अपनी मंजिल तक पहुँचने की ताकत मिली है। मेरे पिताजी  कंप्यूटर से जुड़े काम काज करते है और मैं पढ़ाई में बहुत ही कमजोर रही हूँ। लेकिन मुझे यह मालूम हो गया था कि इटावा में मेरा कोई भी काम नहीं है। सो उनसे बहाना किया और कंप्यूटर की पढ़ाई करने की गुजारिश कर मैं दिल्ली पहुँच गयी। तब मैं काफी छोटी थी अपनी पढ़ाई खत्म कर जब पापा ने मुझे घर वापस इटावा आने के लिए कहा तो मैंने उनसे कुछ दिन की मौहलत मांग ली। और दिल्ली में ही काम करने लगी। कुछ टूशन्स देने लगी और रिसेप्शनिस्ट का काम भी करने लगी। मुझे कुछ दिनों बाद मुंबई आने का मौका मिला और यहाँ आकर मैंने डबिंग शुरू की। कुछ कमर्शियल्स में भी काम किया।C7fDjzOWkAQeoCc

साउथ फिल्म्स में आपकी एंट्री कैसे हुई ?

प्रियदर्शन के साथ एक कमर्शियल्स में काम  किया था उसके बाद उनकी प्रोडकशन हाऊस तले बन रही फिल्म ‘पोइ सोला पोरं’ मिल गयी कुछ ऑडियंस के बाद, उसके निर्देशक ए अल विजय रहे और आज वह साउथ इंडस्ट्री के जाने माने निर्देशक है। बस फिर क्या था मुझे तमिल और तेलुगु फिल्म्स के अॉफर मिलने लगे।

और बॉलीवुड में ?

बॉलीवुड में इस वर्ष गाना . कॉम की वजह से में बहुत ही फेमस  हो गयी और मुझे ‘गाना . कॉम ’ गर्ल के नाम से भी लोग बुलाने लगे। बॉलीवुड में मुझे, ‘यह लाल रंग’ से एक पहचान मिली, हाँ फिल्म फ्लॉप हो गयी इसका मुझे खेद नहीं है। आप फिल्म देखें बहुत अच्छी कहानी है, किन्तु आप जिस प्रोडक्ट को लोगों तक पहुँचाना चाह रहे हैं उसके बारे में लोगों को यदि ज्ञान ही न हो तो कौन भला पिक्चर देखने आएगा। प्रोडूसर्स ने इस फिल्म का प्रोमोशन्स कुछ अच्छे से नहीं किया सो फिल्म बॉक्स अॉफिस पर अपना जलवा दिखाने में नाकामयाब रही।Julie shukla

अब फिल्ममिर्जाजूलिएटमें नजर आने वाली है क्या कहना चाहेंगी इस फिल्मकारों के बारे में?

सीधी सी बात है शेमारू ‘मिर्जा जूलिएट’ को प्रेजेंट कर रहे हैं। और इस फिल्म का सोशल मीडिया पर और अन्य चैनल्स इत्यादि में जम के प्रोमोशन्स किए  जा रहे हैं। हम लोग सिटी टूर भी कर रहे हैं। फिल्म में मेरा अच्छा खासा किरदार है। इस फिल्म में मुझे बहुत सारे भाई  मिल गए हैं। मैं एक अकेली  लड़की थी इस फिल्म में तो सबने मेरा बहुत ख्याल भी रखा है। मुझे बहुत लाड़  भी मिला है। किसी भी चीज की कमी मुझे  कभी नहीं रही है।

अपने कभी कोई टैंट्रम नाटक, नहीं किया?

हंस कर बोली -मैं  बहुत ही सिंपल लड़की हूँ मेरी कुछ बुनियादी बेसिक, जरूरतें होती हैं और यदि वह सब सेट पर मिले तो नाटक करने का सवाल ही नहीं होता है। अपने हक के लिए मैं जरूर लड़ना चाहूंगी। लेकिन यदि सब कुछ मिल रहा हो तो बेफिजूल  क्यों लड़ूंगी या नाटक दिखाऊँगी। मैं  जमीन से जुड़ी हुई लड़की हूँ। मेरी माँ जो की टीचर है मुझे बहुत ही अनुशासित तरीके से बढ़ा किया  है। मुझे बेफिजूल डिमांड करना पसन्द नहीं है लेकिन  अपने हक के लिए मैं जरूर बोलती हूँ।rajesh_pia bajpai_amit singh

आप इतनी बोल्ड और स्पष्टवादी है और काफी समझदार भी है, इसका श्रेय किसे देना चाहेंगी आप?

जैसा की मैंने कहा  है कि मेरी माँ अयापिका रही , मुझे आज भी याद है स्कूल में जब डिबेट या कुछ भी कल्चरल प्रोग्राम हुआ करते तो मेरी माँ मुझे इन सब के लिए तैयार किया करती। एक समय ऐसा भी आ गया कि मुझे कोई भी तैयारी  नहीं करनी पड़ती थी। मैं सामने वाले की भाषण से कुछ महत्वपूर्ण पॉइंट लिया करती और उस पर बोल जाया करती। मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने स्टेट लेवल में भी भाग लिया है डिबेट इत्यादि में। हंस कर पिया कहती है, ‘मैं इटावा में खुद एक सेलिब्रिटी ही रही।’ सो मैं अपनी पर्सनालिटी व्यक्तित्व, डेवेलपमेंट का श्रेय अपनी माँ को ही देना चाहूँगी। उनकी वजह से आज में मुम्बई में अकेले जीवन निर्वाह कर रही हूँ।

पिया कौनसी बायोपिक करना पसन्द करेंगी?

वैसे तो मेरा रानी लक्ष्मी बाई का किरदार पर्दे पर करने का बड़ा मन है, किन्तु यह फिल्म कंगना कर रही है। अब यदि कोई स्पोर्ट्स से जुड़े किसी व्यक्ति की जीवनी को पर्दे पर उतारने का मौका मिले तो मुझे बहुत खुशी होगी।C8D6ysYXgAADE2V

क्या आप साउथ फिल्म्स में अब काम नहीं करेंगी?

 ऐसा नहीं है। उस दौरान भी मैंने अपना बेस मुम्बई ही रखा था। चेन्नई जाया करती और शूटिंग खत्म करके वापस यहाँ आ जाया करती। फिलहाल बॉलीवुड में इस फिल्म की प्रोमोशन्स में जुटी हुई हूँ। आगे की आगे देखी जाएगी।

अंतत: क्या पिया कभी कास्टिंग काउच का शिकार हुई है ?

देखिये, मैं  एक सिंपल परिवार से बिलोंग करती हूँ और मेरा यह मानना है यदि आप अपना काम सही  ढंग से करते हैं और अनुशासित हो कर आगे बढ़ते हैं तो आप से कोई भी बत्तमीजी नहीं करेगा। मुझे पता ही नहीं है यह कास्टिंग काउच क्या होता है। बहुत ही साधारण ढंग से लगभग रोजाना अॉडिशन देने पहुँच जाती हूँ। और जितना काम अॉडिशन  द्वारा मिल जाये वह मेरे सर आँखों पर। मुझे पार्टी या फिर कॉफी शॉप में जाकर बेफिजूल समय बर्बाद करना बिल्कुल भी पसन्द नहीं है। घर पर बैठ कर मैं अक्सर किताबें पढ़ना पसन्द करती हूँ। मेरे फ्रैंडस भी काम काजी ही होते हैं जो मुझे सही सलाह भी देते हैं फिर वह क्यों न फिल्म  का असिस्टेंट डायरेक्टर या अन्य कोई व्यक्ति हो।


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Mayapuri

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