चीन का सिनेमा-बाजार भारत में छा जाने के लिए बेज़ार

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‘हिन्दी-चीनी भाई-भाई!’ का स्लोगन एक कदम आगे बढ़कर अब सिनेमा के पर्दे पर उच्चारित होने के लिए तैयार है। खबर है चाइना का सिनेमा मार्केट अब भारत को टार्गेट बनाने की तैयारी में है। यही वजह है पिछले दिलों भारत में रिलीज कुछ नई हिन्दी फिल्मों का चीन में जोरदार स्वागत किया गया है। अमिताभ बच्चन की ‘पीके’, कंगना रनोट की ‘तनु वेड्स मनु’ और भट्ट कैम्प की फिल्म ‘अधूरी कहानी’ ने वहां बेहतरीन बिजनेस-रिकाॅर्ड बनाया है। खबर यह भी है कि चीनियों ने अक्षय कुमार की दो फिल्मों को फाइनेन्स भागीदारी देने की तैयारी की है तथा कुछ और स्टार प्रोडक्शन उनकी तफ्तीस में हैं।
यह सिक्के का एक पहलू था। दूसरा पहलू यह है कि चाइना अपना सिनेमा बाजार भारत में फैलाने के लिए बेज़ार है। पूरी दुनिया में हाॅलीवुड बनाम बाॅलीवुड की चर्चा शुरू हो गई है। तो चतुर व्यापारी चाइना चुप कैसे बैठा रह सकता है। प्रधानमंत्री की पिछले दिनों हुई चीन यात्रा ने इस सोच को और मजबूत किया है कि भारत-चीन सिनेमाई भाई-भाई! इरोस ग्रुप के सुनील लुल्ला से प्रधानमंत्री मोदी जी के साथ गए थे वहां उसी समय एग्रीमेंट भी साइन कर लिया था। चीन में विदेशी फिल्में अधिक दिखाए जाने पर रोक है। वहां साल में सिर्फ 36 विदेशी फिल्में ही दिखाई जा सकती हैं। अगर दो देश के लोग मिलकर फिल्म बनायें- तो मसला हल हो जाता है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग जब भारत आये थे, तब यह मसला उठाया गया था। चीन अब इस बात के लिए रजामंदी दे चुका है। भारत चीन मिलकर तीन फिल्में बनाने पर सहमत भी हो चुके हैं। इनमें एक फिल्म सातवीं शताब्दी में भारत आये चीनी यात्री ह्नेनसांग के जीवन पर बनेगी। दूसरी फिल्म ‘योग’ पर बनेगी और तीसरी वहां की हिट फिल्म ‘लोस्ट इन थाईलैंड’ की तर्ज पर ‘लोस्ट इन इंडिया’ होगी। बहरहाल चीन में भारतीय सिनेमा की चर्चा गर्म है, आगे आगे देखिये…!


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Mayapuri

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