INTERVIEW: मेरा सबसे पहला पोस्टर दिल्ली के जामा  मस्जिद में लगा था – धर्मेन्द्र

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लिपिका वर्मा 

बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल, बॉबी देओल, श्रेयस तलपड़े स्टारर फिल्म ‘पोस्टर बॉयज़’ का ट्रेलर रिलीज़ कर दिया गया है। यह फिल्म तीन ऐसे लड़कों की कहानी है, जिनकी जिंदगी उस वक्त बदल जाती है, जब उन्हें पता चलता है कि वह शहर में चल रहे सरकारी नसबंदी प्रोग्राम के ‘पोस्टर बॉयज़’ हैं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर फिल्म की पूरी टीम के अलावा मुख्य मेहमान के लिए धर्मेंद्र जी को खास तौर पर आमंत्रित किया गया था।

फिल्म के पोस्टर पर एक टैगलाइन है ‘हमनें नसबंदी करा ली,आप भी करा लो।’ पूरी फिल्म इसी टैगलाइन के आस-पास है। यह एक कॉमेडी फिल्म है। ‘पोस्टर बॉयज़’ मराठी फिल्म का हिंदी रीमेक है। मराठी में बनी यह फिल्म खूब पसंद की गई थी, यही कि देओल परिवार ने इस फिल्म का निर्माण हिंदी में किया है।  

सनी और बॉबी देओल की मानें तो उन्होंने फिल्म की कहानी सुनते ही इस फिल्म को बनाने का मन बना लिया था। इस मौके पर धर्मेंद्र ने कहा, ‘इस फिल्म का विषय एकदम अलग है। इस फिल्म में मेरे दोनों बेटे एकदम अलग नजर आ रहे हैं। यहां ढाई किलो वाली बात नहीं बल्कि अंदाज अलग है। ‘हीमैन’ के परिवार से पहली बार कोई नसबंदी जैसे विषय की फिल्म में काम कर  रहे  है।

धर्मेंद्र हंसते हुए आगे कहते हैं, ‘मेरी तो आज तक नसबंदी नहीं हुई है, लेकिन फिल्म के लिए तो करवानी पड़ती है। ऐक्टिंग मेरी महबूबा है, लेकिन कभी वह मुझसे रूठ भी जाती है और कभी मैं उससे दूर हो जाता हूं। अब जल्दी ही कोई अच्छी कहानी मिलेगी तो फिर से अभिनय करूंगा।’

धर्मेंद्र ने प्रेस के साथ समां  बाँधे  रखा अपने पहले पोस्टर को लेकर बोले,” मेरा सबसे पहला पोस्टर जब दिल्ली के जामा  मस्जिद में लगा हुआ था, तब मेरे मामाजी मुझे रोज चिट्ठी लिख कर यह बताते रहते की आज मैंने  यहां वह पोस्टर देखा और बहुत याद आयी तुम्हारी .बस यही  सब सुन कर बहुत ख़ुशी होती थी हमें.”

आगे कहते है धर्मजी,” मुंबई  में आना और अपने हीरो दिलीप साहब की तरह बनने के इच्छुक होना, मेरे लिए एक बहुत ही बड़ी बात थी। कभी सोचा भी नहीं था की इस फ़िल्मी दुनिया का हिंसा बनूंगा। आज अपने बेटो के साथ एक ही मंच पर बैठा हूँ -कही कम नहीं लग रहा हूँ। “

चलते चलते अपने बेटे सनी और बॉबी की पोल  खोल  दी धर्मजी ने ,”जी हाँ , फिल्म में काम कर रहा हूँ, इसे अपनी मेहबूबा मानता हूँ। मैंने उर्दू कब सीख ली मालूम ही यही चला। बस कविता और शायरी खुद ब खुद बनने लगी। मेरे बेटों को उर्दू नहीं आती  है, सो इन्हें शायरी का शौक नहीं है। अभी बॉबी के जूते  देख रहा था तो लगा इसे में कब चुरा कर पहन  लू। इसका शौक अच्छे कपड़े लते पहनने का है। और सनी भी अपने कपड़े गिन-चुन कर ही रखता है। बॉबी बड़ी चालाकी से सनी  का खुशबूदार सेंट लगाकर चुपके से वापस बोतल जगह पर रख देता है। पर जो कुछ भी है मेरे बेटो ने मुझे हमेशा गौरवान्वित ही किया है। दोनों मेरा बहुत ख्याल रखते है और क्या चाहिए एक बाप को।

फिल्म का निर्देशन श्रेयस तलपड़े ने किया है। यह फिल्म 8 सितंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी ।

 


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Mayapuri

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