मूवी रिव्यू: हेमंंत पांडे चला हीरो बनने ‘प्रकाश इलेक्ट्रॉनिक’ में

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रेटिंग**

मनोज शर्मा द्धारा निर्देशित फिल्म ‘प्रकाश इलेक्ट्रॉनिक’ एक ऐसे इन्सान की कहानी है जिसे जीवन में कभी किसी का प्यार नहीं हासिल हुआ। जिसे उसने अपना कहा उसी ने उसके साथ धोखा किया।

हेमंत पांडे यानि प्रकाश बचपन में अपना सब कुछ लुटा कर मुंबई आ गया था। यहां अपनी मेहनत से उसने काफी कुछ अर्जित किया। जैसे आज वो मुबंई जैसे शहर में दो दो फ्लैट्स और प्रकाष इलैक्ट्रॉनिक्स नामक एक दुकान का मालिक है। उसके काम और व्यवहार की हर तरफ तारीफ है लेकिन उसे कभी किसी का सच्चा प्यार नहीं मिला। उसकी बिल्डिंग में एक लड़की हर्षिता भट्ट रहने के लिये आती है। वो जल्द ही हेमंत से दोस्ती कर लेती है। एक वक्त ऐसा आता है जब हेंमत को लगता हैं कि हर्षिता उसे प्यार करती है। लेकिन जब हर्षिता हीरोइन बन जाती है। उसके बाद वो उसके सामने अपने प्यार का इज़हार करता है तो उसे पता चलता है कि उसका एक तरफा प्यार था हर्षिता सिर्फ उसे अपना खैरख्वाह और दोस्त मानती थी। क्या इसके बाद हेमंत अपना घर बसा पाया?prakash-electronics

फिल्म देखते हुए शिद्दत से असरानी की फिल्म चला मुरारी हीरो बनने की बहुत याद आई। क्योंकि उन दिनों असरानी एक कॉमेडियन के तौर पर काफी सफल थे लिहाजा उन्हें गलतफहमी हो गई कि वे हीरो भी बन सकते हैं। जबकि हेमंत पांडे तो असरानी भी नहीं हैं फिर भी उन्हें लगा कि वे भी हीरो भी बन सकते हैं । उनसे ज्यादा गलत फहमी फिल्म के डायरेक्टर मनोज शर्मा को हुई क्योंकि उन्होंने ही हेमंत को हीरो लेकर ये फिल्म बनाई। फिल्म की शुरूआत बढ़िया तरह से होती है। फिल्म जब तक बढ़िया चलती है जब तक हेमंत एक सीधे सादे मकेनिक के रोल में रहते है लेकिन फिल्म उसके बाद हास्यप्रद हो जाती है जब हेंमत  बाकायदा हीरो बन जाते है। उसके  बाद वही सब जानी पहचानी चीजें ।  फिल्म में हर्षिता भट्ट, मनोज पाहवा,संजय मिश्रा, मिथलेश चतुवेर्दी, ब्रिजेश हीरजी,हिमानी शिवपुरी, अनुपम श्याम, मनोज जोशी जैसे बढ़िया एक्टर्स को जाया किया गया । क्योंकि जानी पहचानी कहानी और लचर स्क्रीनप्ले के सामने प्रवीण भारद्वाज के गीत और संगीत भी कुछ नहीं कर पाते ।


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Mayapuri

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