“प्रेम पुजारी कौन?”- प्रबोध कुमार गोविल

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Prabodh Govil

सन उन्नीस सौ चौंसठ में साधना की एक फ़िल्म आई थी, दूल्हा दुल्हन। इसमें साधना का डबल रोल था। फ़िल्म के हीरो थे राजकपूर।
मज़े की बात ये थी कि साधना सबसे पहले शशि कपूर के साथ फ़िल्म “प्रेमपत्र” में काम कर चुकी थीं, जो कि राजकपूर के सबसे छोटे भाई थे। साधना ने राजकपूर के दूसरे भाई शम्मी कपूर के साथ भी हिट फ़िल्म “राजकुमार” कर ली थी। और अब सबसे बाद में वो राजकपूर के साथ दूल्हा दुल्हन फ़िल्म कर रही थीं।
इसकी शूटिंग ज़ारी थी।
शूटिंग के बीच लंच का समय था।
साधना प्रायः अपना खाना सेट पर अपनी महिला सहकर्मियों के साथ ही खाती थीं। वो चाहे कोई सहायक अभिनेत्री हो, कोई तकनीकी स्टाफ हो या मेकअप करने वाला स्टाफ ही क्यों न हो।
जबकि दूसरी हीरोइनें प्रायः अपना स्टेटस मेंटेन करने की धुन में अक्सर हीरो, डायरेक्टर या अन्य बड़े स्टारों के साथ ही बैठना पसंद करती थीं।
उस दिन गाड़ी से राजकपूर के टिफिन का बैग लाकर रखने वाले स्पॉटब्वॉय ने जैसे ही उनके लिए पीने का पानी लाकर रखा, वे उससे बोल पड़े- मैडम कहां हैं?
लड़का बोला – उधर, खाना खा रही हैं।
राज कपूर को ज़रा आश्चर्य हुआ।

राजकपूर ने कुछ सोचते हुए प्लेट से एक टुकड़ा उठाया, लेकिन फ़िर बिना खाए उसे वापस रख दिया।
फ़िर वो स्पॉटबॉय से बोले- मैडम से कहो, मैं बुला रहा हूं।
लड़का झटपट गया और पलक झपकते ही वापस आ गया। उसके पीछे पीछे साधना भी चली आ रही थीं। उन्होंने खाना खाकर अभी हाथ भी साफ नहीं किए थे।
राजकपूर कुछ मुस्कराते हुए बोले- क्या कुछ स्पेशल आया था घर से,जो हमसे नहीं बांटा जा सकता था?
साधना झेंप कर रह गईं। केवल धीरे से इतना कह सकीं- उन लोगों ने खाना वहां परोस दिया तो खाने बैठ गई।
राजकपूर कुछ गंभीर हो कर खाने लगे। साधना वहीं उनके पास बैठी रहीं।
अचानक राजकपूर ने खाना छोड़ दिया और हाथ रोक कर बोले- तुमसे कुछ बात करने की सोच रहा था।
साधना को थोड़ी हैरानी हुई। केवल इतना बोल पाईं- जी, कहिए!
– हरि की बेटी और डब्बू के बारे में… राजकपूर ने बिना किसी भूमिका के तपाक से कहा। ( उनका मतलब अभिनेता हरि शिवदासानी की बेटी बबीता और खुद उनके सुपुत्र रणधीर कपूर के बारे में था। हरि शिवदासानी साधना के चाचा थे)
साधना कुछ संजीदा होकर और करीब खिसक आईं। पर बोलीं कुछ नहीं।
राजकपूर ने कहना शुरू किया- सुना है दोनों में अच्छी दोस्ती है, पार्टियों में साथ में घूमते हैं।
साधना चुप रहीं।
– क्या कर रही है ये लड़की बबीता?
साधना खामोश रहीं।
राजकपूर कुछ तल्खी से बोले- मैंने सुना है कि कॉलेज – स्कूल भी नहीं जाती, केवल मॉडलिंग और फ़िल्मों में काम पाने का शौक़ है।
अब साधना ने धीरे से मुंह खोला, बोलीं – कुछ ग़लत है क्या?
– क्या? राजकपूर ने हैरानी से पूछा।
– फ़िल्मों में काम पाने की कोशिश करना। साधना बोलीं।
राजकपूर ने सिर झुका लिया, पर कुछ बोले नहीं।
कुछ देर कमरे में सन्नाटा पसरा रहा। राजकपूर ने खाने की प्लेट बिना ख़त्म किए ही परे सरका दी।
प्लेट उठाने के लिए स्पॉटबॉय भीतर आने लगा तो साधना ने इशारे से उसे रोक दिया और बाहर जाने का इशारा किया।
लड़का चला तो गया पर बाहर की दीवार पर कान लगा कर सांस रोके खड़ा रहा।
अब थोड़ी गहरी पर मंद आवाज़ में बोल रहे थे राजकपूर, कहा – नहीं, गलत नहीं है फ़िल्मों में काम पाने की कोशिश करना, लेकिन दो सपने एक साथ देखे जाएं तो दोनों ही पूरे नहीं होते!
अगर यहां साधना की जगह कोई और हीरोइन होती तो एक बार राजकपूर से इस बात का मतलब ज़रूर पूछती। पर सामने साधना थीं। सब समझ गईं।
राजकपूर बोले- अपनी बहन को समझाओ कि कपूर परिवार की लड़कियां, या इस परिवार में आने की ख्वाहिशमंद लड़कियां फ़िल्मों का रुख नहीं करतीं।
अब साधना तिलमिला गईं। चुप नहीं रह सकीं, बोलीं- क्यों? फ़िल्मों में आने वाली सभी लड़कियां आवारा और बदचलन होती हैं क्या? जो लड़कियां फ़िल्मों में काम नहीं करतीं क्या वो सभी सती – सावित्री होती हैं?
– तुमसे बात करना बेकार है। तुम खुद नहीं समझ रही हो, तो उसे क्या समझाओगी!
– लेकिन समझने की ज़रूरत तो आपको है। आपको पता है, मैं नरगिसजी को आंटी कहती हूं पर वो मुझे बिल्कुल अपनी सहेली की तरह मानती हैं। उन्होंने अपनी हर बात मुझसे शेयर की है। क्या आप भी वही करना चाहते हैं जो आपके साथ हुआ? क्या आपको पसंद आया था वो सब!
अब राजकपूर बैठे न रह सके। वो गुस्से से तमतमाये हुए उठे और दनदनाते हुए बाहर निकल गए।
साधना उनके पीछे – पीछे प्लेट उठा कर गईं- खाना तो खाइए…
पर वो अपनी कार में जा बैठे।
पूरी यूनिट देखती रह गई। शूटिंग पैकअप हो गई।


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Mayapuri

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