प्रेम सागर – हमसफर

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Prem Sagar

संघर्षों की जीती-जागती तस्वीर हैं प्रेम सागर, सीरियल मार्केटिंग को दिया नया आयाम

एक दिन मैं ऐसे ही नटराज स्टूडियो के सामने टहल रहा था, तब वहां बड़े फिल्ममेकर शक्ति सामंत, रामानंद सागर, एफ सी मेहरा, आत्माराम (गुरु दत्त के भाई) और प्रमोद चक्रवर्ती इन सब का ऑफिस वहीं आस पास हुआ करता था और ये सब ही नटराज स्टूडियो के भागीदार भी हुआ करते थे। एक दिन अचानक खूब जोर की बारिश होने लगी। मैंने कहीं आसरा लिया और तभी एक युवक सामने से आया और मुझे देखने लगा। उसने मेरा हाथ थामा और अपने ऑफिस के अंदर ले गया। उन्होंने अपना नाम प्रेम सागर बताया। मैं जानता था कि, प्रेम मशहूर फिल्ममेकर और कथाकार डॉक्टर रामानंद सागर के बेटे हैं।

प्रेम सागर ने ऐसे मौसम में मुझे काफी ऑफर की। वे पहली फिल्मी हस्ती थें जिनसे मैं मिला था। ये साल 1973 की बात है और आज भी हमारा रिश्ता वैसा ही है। बल्कि चालिस साल बाद ये रिश्ता और गहरा हो गया है। प्रेम एफटीआईई के पहले ग्रेजुएट थे। उन्हें सिनेमाटोग्राफी में गोल्ड मेडल मिला है। उन्हें वैसे तो इस इंडस्ट्री में काम पाने के लिए ज्यादा मेहनत करने की जरुरत नहीं पड़ी। उनके पिता इस इंडस्ट्री के जाने-माने फिल्ममेकर हुआ करते थे। दोनों बाप-बेटे की जोड़ी खूब जमी और दोनों ने रामानंद सागर के बैनर तले कई हिट फिल्मों में साथ काम किया है। रामानंद सागर द्वारा निर्मित किसी फिल्म की शूटिंग के दौरान प्रेम सागर की किस्मत ने एक खेल खेला और इनकी जिंदगी ही बदल दी। दरअसल, ये हर वक्त दुनिया के बेहतरीन कैमरों के साथ नए-नए एक्सपेरिमेंट करते रहते थे । एक बार ये क्रेन में चढ़कर एक ऊंचा लेकिन जोखिम भरा शॉट ले रहे थे, तभी उस क्रेन की चपेट में आकर उनके असिसटेंट की मौत हो गई और उन्हें भी गंभीर चोटे आई। डॉक्टरों को यकीन नहीं हुआ कि, सारी हड्डियां टूट जाने के बाद भी वे कैसे जिंदा हैं। प्रेम तकरीबन छः महीने तक अस्पताल में रहे थे। छः महीने बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली लेकिन उनके पैर में थोड़ी दिक्कत रह गई। प्रेम की हिम्मत और जज्बे की दाद देनी पड़ेगी। वे अपनी इच्छा शक्ति और मजबूत मनोबल की वजह से ही अपनी इस शारीरिक व्यथा से लड़ने में समर्थ हो पाए। वे और बिस्तर पर पड़े रहने को तैयार नहीं थे। वे उठकर अपने पिता के काम को आगे बढ़ाना चाहते थे। वे अपनी पिता की कंपनी को ऊंचाईयों पर ले जाना चाहते थे। वे किसी भी मुश्किल हालात में टूटने वाले बंदों में से नहीं थे।

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जब रामानंद सागर रामायण पर काम कर रहे थे, प्रेम ने देखा कि, ये एक चुनौती भरे दौर से गुजर रहा है। उसने अपने पिता से कहा कि, वो सीरियल की मार्केटिंग में मदद करेंगे और वही हुआ। इस सीरियल ने इतिहास रच दिया। प्रेम सागर ने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसकी लोग कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। विश्व तक इस सीरियल की ख्याति पहुंच गई। प्रेम दर्द में थें, उनसे खड़ा भी नहीं हुआ जाता था, लेकिन उन्होंने इस सीरियल की मार्केटिंग करने में कहीं कोई कसर नहीं रखी। आज तक लोगों को यकीन नहीं होता है कि, इस हालत में भी प्रेम किस तरह से इस सीरियल के संदेश को घरों तक पहुंचाने में सक्षम रहे। उन्होंने सिर्फ हमारे देश में ही नहीं, बल्कि अंटारटिक समुंदर, आर्किटक ओशियन तक जहां लोगों ने रामायण का नाम तक नहीं सुना था,उनके कानों तक पहुंचाई। उन्होंने हर धर्मों के लोगों में एक विश्वास पैदा किया। चीन रशिया जैसे देश में भी उन्होंने रामायण की खुश्बू महका दी। आज भी वे बहुत एक्टिव और दुरुस्त रहते हैं। उनका पूरा परिवार आज भी उनके इस संघर्ष की कहानी सुनकर दंग रह जाता है। उन्होंने ये साबित कर दिया कि, अगर दिल में लगन हो तो आप किसी भी मुश्किल घड़ी से लड़ जाएंगे और हर असंभव को संभव कर देंगे। प्रेम को उनकी सिनेमाटोग्राफी के लिए कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। वे अपने जीवन में एक बेहतरीन फोटोग्राफर भी रह चुके हैं। वे आज भी उतना ही काम करते हैं जितना पहले किया करते थे। वे बहुत व्यस्त रहते हैं।वे आज भी पूरी दुनिया घूमते हैं और अपने बेटे द्वारा निर्मित सीरियल के लिए मार्केट तैयार करते हैं। एक समय था जब इन्होंने निर्देशक की भूमिका निभाई है। उन्होंने जितेंद्र और हेमा मालिनी के साथ अपनी पहली फीचर फिल्म हम तेरे आशिक हैं बनाई थी। उसके बाद मशहूर सीरियल विक्रम और बेताल। उन्होंने खुद को डायरेक्शन में बहुत व्यस्त रखा है, लेकिन उन्हें अपनी शारीरिक समस्याओं के बारे में सब पता था। इसलिए वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते प्रेम सागर अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते थे।

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उनकी पत्नी नीलम उनके लिए प्रेरणा का स्रोत और उनकी ताकत रहीं हैं। इनके बेटे शिव सागर ने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की है। शिव भी टीवी सीरियल डायरेक्ट करने में अपना ध्यान लगा रहे हैं। प्रेम सागर की बड़ी बेटी का नाम शबनम, वे बहुत ही बेहतरीन इंटीरियर डिजाइनर हैं और छोटी बेटी गंगा भी अपने समय की बेहतरीन पेंटर रह चुकी हैं।

ये प्रेम सागर वही हैं, जो क्रेन से नीचे गिर गए थे, आज सफलता की ऊंचाईयों को छू रहे हैं।ये ऐसी हस्ती हैं जिन्होंने मार्केटिंग के क्षेत्र को एक नया आयाम दिया है। वक्त के साथ साथ इन्होंने अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी बनाई और आगे चलते गए। मुझे अपने दोस्त पर गर्व है, उसके साहस और जज्बे को मैं सलाम करता हूं। वे लाखों लोगों की प्रेरणा बन चुके हैं। वे हर दिन एक नई चुनौती के साथ नया रास्ता बनाते हैं। एक नई मुश्किल के साथ एक नया हल भी ढूंढ निकालते हैं। वे हर दिन नया सपना देखते हैं।


Mayapuri