प्रेम सागर ने बड़े भक्ति भाव से अपने पिता पर लिखी किताब का विमोचन किया, ख़ास उनके जन्मदिन के अवसर पर

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इस कोशिशों और मुसीबतों के दौर में, जहाँ इंसानी रिश्तों में अमूमन खटास ही देखने को मिल रही है, जहाँ औलादें अपने माँ-बाप की इज़्ज़त करना भूल रही हैं वहीँ प्रेम सागर को अपने पिता के लिए इतना समर्पित देखना बहुत दिलचस्प और ख़ुशनुमा एहसास देता है। प्रेम अपने सुपर टेलेंटेड पिता रामानंद सागर के नाम और उनकी विरासत को सदा जीवित रखने के लिए हर संभव प्रयास करते नज़र आते हैं। प्रेम सागर जो ख़ुद एक प्रतिभाशाली सिनेमेटोग्राफर हैं, जिन्होंने अपने पिता के साथ कई फिल्मों और धारावाहिकों में अपना हुनर दिखाया ही है, रामायण जैसा कभी न भूला जा सकने वाला धारावाहिक बनाने में भी उनका अहम योगदान है। रामायण वो सीरियल है जिसके सदके उनके पिता के लिए लोगों का प्यार आज तक कायम है और सदा जीवित रहेगा। – अली पीटर जॉन

   पिछले साल की शुरुआत में प्रेम सागर ने पिता के लिए एक किताब समर्पित की थी जिसका नाम था “An Epic Life – from Barsaat to Ramayan” जो उनकी तरफ से अपने पिता के लिए प्यार भरा एक टोकन भर था। ‘अन एपिक लाइफ…’ एक ‘कॉफी टेबल’ किताब है। इस तरह की किताबें ख़ास लोगों के लिए ख़ास तरीके से ख़ूबसूरत जिल्द और अमूमन हार्ड कवर में छापी जाती हैं। इस किताब को लिखा प्रेम सागर ने ज़रूर था, पर इसका आवरण और किताब से जुड़े सारे अन्य काम उनके बेटे शिव सागर ने किये थे। टाइटल वेव्स में हुआ पुस्तक विमोचन बहुत शानदार रहा था और उसमें शामिल होने के लिए पूरी रामायण की टीम और अन्य नामी लोगों की शिरकत हुई थी।

Prem Sagarलेकिन, अपने पिता को और बेहतर रूप से सम्मान देने के लिए प्रेम सागर के मन में कुछ और ही चल रहा था। रामानंद सागर, जो आज हमारे बीच मौजूद होते तो उनकी उम्र 103 साल होती। 29 दिसंबर को उनका जन्मदिन था। (साथ ही भारत के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना का भी जन्मदिन 29 दिसंबर को ही होता है) प्रेम सागर ने अपने पिता को समर्पित किताब के लिए तसल्ली से पूरा एक साल लगाया और जब वो अपने काम से संतुष्ट हुए तब उन्होंने विमोचन के लिए आगे सोचा। प्रेम FTII से पास होने के बाद से इसी तरीके से काम करने के आदी रहे हैं कि जबतक उन्हें पूरी तसल्ली नहीं हो जाती वो काम को पूरा हुआ नहीं मानते।

मैंने उस किताब का कवर देखा था जिसमें ख़ूबसूरत अक्षरों से लिखा था “रामानंद सागर के जीवन की अकथ कहानी” (जिसे प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है), किताब की ये किस्मत ही थी या प्रेम सागर की मानूं तो ये ‘होनी’ में अटल था कि ये किताब दिवगंत रामानंद सागर के जन्म दिवस के ठीक एक दिन पहले ही तैयार हुई थी।

प्रेम नहीं चाहते थे कि पहली किताब के जैसा ही इस बार कोई बड़ा जश्ननुमा माहौल बनाया जाए। जैसा कि प्रेम के बारे में सब जानते ही हैं, प्रेम ने अपने घर में हवन का आयोजन किया और भगवत गीता का पाठ कर अपने दिवगंत पिता का आशीर्वाद लिया (उनके पिता को करोड़ों लोग कोई साधू महात्मा मानते हैं जिन्होंने आज के दौर के लिए रामायण लिख इस पीढ़ी को कृतार्थ किया है), प्रेम अपनी पत्नी नीलम के साथ हवन में शामिल थे। अपनी पत्नी के लिए उनका कथन होता है कि “ये वो देवी है जो मेरा हाथ थाम मेरे हर अच्छे-बुरे दिनों में सदा मेरे साथ रहती है, मुझे शक्ति देती है”

हवन के बाद प्रेम ने अपने ऑफिस “लक्ष्मी प्लाज़ा” में पार्टी की और अपने सारे स्टाफ के साथ पुस्तक विमोचन का जश्न मनाया। उनके स्टाफ में उनके सबसे पुराने और भरोसेमंद, उनके दाहिने हाथ सरीखे पिंटो भी मौजूद थे। साथ ही गोविन्द, मितेश, नीलम और सिक्योरिटी स्टाफ मेंबर भी थे।
मैं एक बार फिर ख़ुशक़िस्मत रहा कि ख़ुद लेखक प्रेम सागर द्वारा पुस्तक की पहली प्रति मुझे मिली जिसमें उनके हस्ताक्षर भी थे। उन्होंने अपनी सटीक अडिग राइटिंग में, जिसे मैं पिछले 40 साल से पहचानता आ रहा हूँ; मेरे लिए लिखा “To Ali Peter John, a soul level human in the truest and my relation beyond a friend” (अली पीटर जॉन के लिए, एक शुद्ध सात्विक रूह का स्वामी जिससे मेरा रिश्ता सिर्फ एक दोस्त से कहीं बढ़कर है)

और फिर प्रेम निकल गए अपनी देवी संग करजत के लिए, जहाँ उनका अनोखा रिसोर्ट था

फिर जब पुस्तक विमोचन की सारी औपचारिकताएंपूरी हो गयी, प्रेम और उनकी देवी (नीलम) ‘करजत’ के लिए निकल गए जहाँ उनकी फैमिली का एक अनोखा रिसोर्ट है, जिसका नाम है “टूथ माउंटेन।” यहीं से उनके बच्चों ने अपनी कामयाबी की नींव रही है। उनके बच्चे, शबनम जो अब एक बेहतरीन इंटीरियर डिज़ाइनर है, गंगा जो देश-दुनिया में मशहूर और रसूख वाली कलाकार (पेंटर) है और उनके इकलौते बेटे शिव ने स्विट्ज़रलैंड से हॉस्पिटैलिटी की डिग्री ली है।

और मैं जब प्रेम सागर को पुस्तक विमोचन के वक़्त बहुत उत्सुक और एक्साइटेड देख मुझे उनके पिता याद आए, ऐसा लगा मानों बादलों के बीच से डॉक्टर रामानंद सागर की छवि उभरी हो और गर्व से कह रही हो “ये है मेरा प्रिय बेटा, मेरा प्रेम जिसपर मुझे बहुत गर्व है।”

अनुवाद – सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’


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