प्रेमनाथ – दरिया दिल इंसान

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aag9

 

मायापुरी अंक 49,1975

सनकी प्रेमनाथ के बारे में हर तरह की बातें उड़ती रहती हैं लेकिन उनकी जिंदगी का दूसरा पहलू भी है। वह है खुले दिल से दान करने का बस उनके मन में एक बार आ जाए।

आर.के. स्टूडियो में ‘धर्म कर्म’ की शूटिंग चल रही थी रेखा, डब्बू और प्रेमनाथ सैट पर थे। इतने में अताउला खां, जो मशहूर हीरोइन मधुबाला के पिता हैं, वे डब्बू से मिलने आये। डब्बू ने जब उनका हाल चाल पूछा तो उन्होंने बताया कि वह बहुत मुसीबत में हैं। पैसे की बहुत तंगी और बुढ़ापे में कुछ हो नहीं पाता। कहते-कहते उनकी आंखो में आंसू आ गये और मधुबाला की याद आने पर रोने लगे। प्रेमनाथ वही पर बैठे सब कुछ सुन रहे थे जैसे ही रोते देखा तो उनसे रहा नहीं गया और अताउला खां से बोले

ऐ रोना नहीं, हमारे सामने नहीं, मत बोलो, हम कभीतुम्हारी बेटी के आशिक रहे हैं। हम यह आंसू नहीं देख सकते। तुमको पैसे की तंगी है ना, कल आ जाना यही पर, मिल जायेगा।

अगले दिन प्रेमनाथ नोटों से भरा एक बैग उठा लाये और डब्बू को देता हुआ बोले यार मैं जल्दी चला जाऊंगा। तुम यह एक लाख रूपया वह आये तो उसे दे देना।

एक लाख रूपया..?

अरे क्या फर्क पड़ता है आज कमाता हूं तो दे सकता हूं। पहले नहीं था तो कहां से दे सकता था? और फिर वह बेचारा मुसीबत में है। हमने कभी उनकी बेटी से ‘लव’ किया था। कहते-कहते प्रेमनाथ ने वह एक लाख रूपयों का भरा बैग डब्बू को थमा दिया और डब्बू हैरानी से खड़े इस आदमी की दरिया दिली को सराहता रहे।

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Mayapuri