INTERVIEW: “ऊँची उड़ान की कोई हद नहीं” – प्रियंका चोपड़ा 

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इस समय अपने अमेरिकन शो क्वांटिको सीजन-2 के लिए यूएस में बेहद व्यस्त है और जल्द ही वह अपनी, नई विश्वस्तरीय दूसरी हॉलीवुड फिल्म की शूटिंग की भी तैयारी शुरू करने वाली है। पिछले दिनों जब वे कुछ हफ्तों के लिए मुंबई आई थी तो उनका कार्यक्रम इतना चौक ए ब्लॉक था कि चाह कर भी वे अपने लिए, अपने मुंबई स्थित फ्लैट की खिड़की पर चयन से कॉफी पीते हुए परिवार से बतिया नहीं पाई, जिस वजह से उन्होंने अपनी मां और भाई को ही यूएस में,अपने साथ रहने के लिए आने की गुजारिश की। भले ही अपने लिए प्रियंका मुंबई में सुकून और फुर्सत के दो पल नहीं निकाल पाई पर ऑफिशियल कामों के दौरान बीच-बीच में समय निकालकर वे मीडिया से मुखातिब होने का फर्ज पूरा करती रही। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश:–

आज के समय में आप ग्लोबल एन्टरटेनमेन्ट की दुनिया में भारत द्वारा प्रस्तुत नायाब कलाकार मानी जा रही है आपको कैसा लग रहा है?

प्रत्येक नया अनुभव एक पाठ बन जाता है, मेरे ख्याल से मेहनत सर चढ़ कर बोलता है। आप अच्छे काम करते जाओ अच्छा प्रतिफल मिलता ही जाएगा। आज मैं अपने अनुभव से बता सकती हूं कि सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है, आपको मेहनत करके डिलीवर करना ही होगा।दर्शक आपको देखना पसंद करेंगे तो आपको और काम मिलेगा। कोई और फार्मूला, कोई भी पीआर गिरी या कोई स्ट्रेटजी नहीं चलेगी। अगर हम अपने चरित्र को पर्दे पर सही ढंग से नहीं निभा सकते तो दर्शक हम को दिल से निकाल फेकेंगे।

आपकी मॉम ने एक बार कहा था कि शुरू में आप मुंबई से ठेठ, हॉलीवुड में जाकर काम करते हुए काफी नर्वस महसूस कर रही थी?

मैंने जब अपने अमेरिकन सीरीज़ को हां कहा था तब सोचा भी नहीं था कि इतने बड़े पैमाने पर यह बात होगी,सोचिए एक ही सीजन में 56 भाषाओं में, विश्वभर में इसे प्रसारित किया गया। ऐसा तो किसी बड़े से बड़े शो के साथ भी नहीं हुआ होगा और किसी भारतीय एक्टर के साथ पश्चिम में भी ऐसा नहीं हुआ होगा इस वजह से मुझे किसी से सपोर्ट या राय भी नहीं मिल पा सकती थी। एक बार तो नर्वसनेस के चलते मैंने एक सीनियर पत्रकार से दिल की बात भी कह दी थी कि अरे यार यह मैंने क्या कर लिया, अगर कहीं कामयाब ना हो पाई तो लोग “बड़ी आई विदेश में काम करने चली” कहकर हंसेंगे। सच, मैं बहुत नर्वस हुई थी, आखिर थी तो एक नॉर्मल लड़की, उतनी कॉन्फिडेंट नहीं थी उस वक्त।

आपके मन में सबसे बड़ा प्रश्न क्या था?

यही कि क्या यह दुनिया भारत से आई एक युवा लड़की को एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट में लीडिंग रोल करते हुए स्वीकार करेंगे? चाहे वह टीवी में हो या फिल्म में, पूरे प्रोजेक्ट, या कहें पूरे ब्रांड को अपने कंधो पर उठाना आसान नहीं एक लड़की के लिए।अक्सर बड़े मेल स्टार ऐसा करते हैं। खैर,अंत में जब वह शो सफलता के शिखर पर पहुंच गई और सफलता की रोशनी से मैं नहा उठी तब मुझे चैन पड़ा।

बेवाचके बाद फिर से एक और विश्वस्तरीय फिल्म साइन करते हुए आप कैसा महसूस कर रही है?

मुझे खुशी है कि बतौर अभिनेत्री मैं विश्व स्तर पर दर्शकों का मन जीत पाई हूँ। यही वजह है कि मुझे फिर से दर्शक देखना चाहते हैं और मैं उन्हें निराश नहीं करूंगी। जब कोई विश्व स्तर की फिल्म बनती है तो उसकी तैयारी भी एलाबोरेट होती है। जब तैयारी पूरी हो जाएगी तो और नई बातें सामने आएगी। तब तक सब्र करिए।

आप यूनिसेफ के ग्लोबल गुडविल एंबेसडर के तौर पर अन्य इंटरनेशनल स्टार्स के साथ जुड़ी है इस बारे में क्या कहेंगी?

मैं वाकई बहुत खुश हूं। जो एंबेसडर के रूप में मनोनीत होते हैं उन लोगों ने ऐसा अच्छा काम किया ही होगा तभी एंबेसडर बने हैं। यूं ही कोई एंबेसडर नहीं बन जाता। मुझे खुशी है कि वहाँ इंटरनेशनल स्टार के स्तर पर मेरे कर्मों को भी अहमियत की नजर से देखी जा रही है।

आप मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री से भी जुड़ी है और हॉलीवुड के फिल्म इंडस्ट्री से भी, कैसे संभाल पाती है मनोरंजन के इस दोनों दुनिया को?

मैं बहुत मेहनत करती हूं फुर्सत का एक पल भी नहीं है मेरे पास। मेरी जिंदगी दो कॉन्टिनेंट्स में बँटी हैमैं यूएस में भी काम कर रही हूं और भारतीय फिल्मों के लिए भी डेट्स दे रही हूं, साथ ही मैं भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में फिल्में भी निर्मित कर रही हूं। इस वर्ष छह फिल्में बना रही हूं। मैं अपने वक्त को दो देशों में बैलेंस कर रही हूं. मेरे लिए दोनों ही दुनिया महत्व है। कोई भी किसी से कम नहीं। बतौर एक्टर ही नहीं बल्कि बतौर एंटरटेनर और बतौर फिल्मेंकर मैं सब कुछ बेस्ट करना पसंद करती हूं। अपने काम के लिए मैंने अपनी निजी जिंदगी को ताक पर रख दिया है।  इसलिए जो भी उपलब्धि हासिल करती हूं उससे मुझे खुशी मिलती है और गर्व  भी होता है। मैं और ज्यादा बड़ी और बेहतरीन फिल्मों में अभिनय करना चाहती हूं। मैं जो भी करती हूं चाहे वह अभिनय हो, गायन हो या फिल्मों का निर्माण हो, उसमें आर्ट और क्रिएटिविटी मुख्य रहा है। ऊँची उड़ान की कोई हद नहीं है मेरे लिए।

बतौर फिल्ममेकर, (वेंटीलेटर) आपको नेशनल अवार्ड हासिल करना कैसा लगा?

एकदम नया अनुभव था, क्योंकि बतौर निर्माता वह मेरी पहली फिल्म थी। मुझे खुशी इस बात की हुई कि मैंने जो थीम चुनी वह सब को इस हद तक अच्छी लगी।

विश्व स्तर पर एन्टरटेनमेन्ट की दुनिया में आपको दूसरे भारतीय प्रतिभाओं का भविष्य कैसा महसूस हो रहा है

मुझे आशा है कि यह वह वक्त है (भारतीयों द्वारा विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाना) जब ऐसा होना शुरु हो चुका है। मुझे उम्मीद है कि मेरा विश्व स्तर पर ऐसा कर चुकने के बाद और अनिल कपूर तथा इरफान खान के भी विश्व तौर पर पहचान बनाने के पश्चात यह रास्ता खुल चुका है। हम गर्व से कह सकते हैं कि हम ग्लोबल एन्टरटेनमेन्ट की दुनिया में भारतीय रिप्रजेंटेटिव हैं और जब मैं ग्लोबल एन्टरटेनमेन्ट कहती हूं तो सिर्फ अमेरिकन एन्टरटेनमेन्ट की बात नहीं कर रही हूँ।

 


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Mayapuri

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