आईपीएल को टक्कर देने आया पीपीएल लीग!

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14 फ़रवरी को मुम्बई के रेडियो क्लब में देश के एकमात्र प्रो-पंजा लीग का आयोजन किया

पंजा लड़ाने का खेल देश का एक बेहद लोकप्रिय खेल है. मज़ेदार ढंग से टाइम पास करने के लिए इसे बड़े पैमाने पर लोगों द्वारा  खेला जाता है. लेकिन पिछले कुछ समय से इस खेल ने एक प्रतियोगी अवतार धारण कर लिया है जो अब हर उम्र और तबके के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला. इसका श्रेय प्रो-पंजा लीग को जाता है. ग़ौरतलब है कि पंजा लड़ाने‌ के इस खेल को एक प्रोफ़ेशनल लुक देने के लिए प्रो-पंजा लीग ने लीग फॉर्मेट को अपनाया है.

प्रो-पंजा लीग की शुरुआत करनेवाले अभिनेता परवीन दाबास और अभिनेत्री प्रीति झांगियानी कहती हैं, “पंजा लड़ाने का खेल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेला जानेवाला ऐसा खेल है जिसकी जड़ें भारत से जुड़ीं हैं और यही प्रो-पंजा लीग की पहचान भी है. दोनों इस बात को लेकर प्रतिबद्ध हैं कि वे इस खेल को एक अलग स्तर और ऊंचे मकाम तक ले जाना चाहते हैं.

अमेच्योर स्तर पर हुए इस आयोजन में 5000 पुरुष प्रतियोगी और 2000 महिलाओं ने‌ हिस्सा लिया और 18 राज्यों के 400 एथलीटों ने‌ प्रतियोगी के तौर पर भाग लिया.

प्रो-पंजा लीग के दौरान खेल मंत्री किरण रिरिजू और पद्मश्री ओलिम्पिक बॉक्सर विजेंदर सिंह ने‌ न सिर्फ़ अपनी विशेष मौजूदगी दर्ज कराई बल्कि एक एक्ज़ीबिशन मैच में भी हिस्सा लिया. गौरतलब है कि यहां‌ एक-दूसरे से हाथ मिलाने की बजाय दोनों ने एक-दूसरे के साथ पंजा लड़ाया और कुछ इस तरह से इस खेल में प्रतियोगियों के तौर पर हिस्सा लेनेवाले लोगों का हौसला बढ़ाया.

“बॉडी बिल्डिंग के पितामह माने जानेवाले युजीन सनडोव 1904 में भारत के दौरे पर आये थे

भारत में इस खेल की शुरुआत के बारे में बात करते हुए परवीन दाबास ने कहा, “बॉडी बिल्डिंग के पितामह माने जानेवाले युजीन सनडोव 1904 में भारत के दौरे पर आये थे. उन्हें शिपिंग इंडस्ट्री का जाना-माना नाम रहे श्री धनजीबॉय बमन जी ने‌ आमंत्रित किया था. सनडाव के भारत आने का ख़ासा असर देखने को मिला था. इससे पहले की लोग कुछ समझ पाते पंजा लड़ाने का खेल घर घर में लोकप्रिय हो चुका था.”

MMA के फ़ैन परवीन दाबास कहते हैं, “इस लीग ने पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा, मणिपुर, मिज़ोरम और केरल को इस खेल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया है. उल्लेखनीय है कि इनमें से कुछ राज्यों में महिलाओं के लिए ऐसे विशेष जिम की व्यवस्था है जहां वे पंजा लड़ाने की तैयारी करने के लिए वर्जिश करने‌ जाती हैं.” परवीन MMA इंडिया शो, स्पोर्ट्स इंडिया शो व अन्य पोर्टल्स में भी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं.

हमें इस बात की बेहद ख़ुशी है कि हम एक खेल को भारत में बढ़ावा दे रहे रहे हैं

प्रीति झांगियानी‌ का मानना है कि इस खेल में भाग लेनेवाले राज्यों की संख़्या में काफ़ी बढ़ोत्तरी देखी जाएगी. वे कहती हैं, “भारत में सबसे प्रतिभाशाली एथलीटों की बात करें तो आप पाएंगे कि  ज़्यादातर का ताल्लुक मणिपुर और मिज़ोरम से होता है. हम देश के ज़्यादा से ज़्यादा राज्यों को इस खेल में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इस खेल में रूचि लें और इसे अपनाएं.”

पंजा लड़ाने का खेल कोई भी खेल सकता है लेकिन पंजा लड़ाने‌ की तकनीक को परफ़ेक्ट करने, शारीरिक शक्ति बढ़ाने और अपनी प्रतिभा को निखारने‌ के लिए किसी भी शख़्स को घंटों जिम में मशक़्क़त करनी पड़ती है ताकि प्रतियोगी प्रोफ़ेशनल स्तर पर खेल सके. प्रवीण दाबास कहते हैं, “हमें इस बात की बेहद ख़ुशी है कि हम एक खेल को भारत में बढ़ावा दे रहे रहे हैं जो अब किसी कैंटीन से निकलकर पंजा लड़ाने‌ के अखाड़े तक पहुंच गया है.” परवीन दाबास इस बात को लेकर बेहद ख़ुश हैं कि कोरोना महामारी के बावजूद इस साल रिकॉर्ड स्तर पर एंट्री प्राप्त हुईं हैं. उल्लेखनीय है कि इस साल देशभर के नंबर एक आर्म रेसलर के लिए भी ख़िताबी मुक़ाबला होगा.

उल्लेखनीय है कि पंजा लड़ाने‌ के इस अनूठे खेल में हाथ से लेकर उंगलियों के बेहतरीन इस्तेमाल करनेवाले को प्रो-पंजा लीग का विजेता घोषित किया जाता है जिससे साबित होता है दिमाग हमेशा से ही शारीरिक ताकत से श्रेष्ठ होता है.

ऐसे में आप भी उठाइये इस अनूठे खेल का लुत्फ


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Mayapuri

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