‘लगन, मेहनत और काम में ईमानदारी ही मुकाम तक पहुंचाती है’

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हालिया रिलीज फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ इनदिनों लोगों में चर्चा का विषय है। राजकुमार राव, कृति खरबंदा स्टारर इस फिल्म के प्रोडयूसर हैं सौन्दर्या प्रोडक्शन के विनोद बच्चन जिनकी पहचान बॉलीवुड में हिट फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ के निर्माता के रूप में होती है। विनोद बच्चन की दूसरी फिल्मों (‘तुन वेड्स मनु), ‘जिला गाजियाबाद’, ‘जिगरिया’, रेन-द टेरर विदिन’) की तरह ही ‘शादी में जरूर आना’ भी प्रदर्शन से पहले ही बाजार में चर्चा पा चुकी है। एक मुलाकात में फिल्म को लेकर विनाद से चर्चा होती है-

‘यह एक पारिवारिक-मनोरंजक फिल्म है जिसमें दर्शकों को सब कुछ मिलेगा- शादी ब्याह की चुहल, जीवन की प्रेरणा, गृहस्थ-जीवन का द्वन्द..और मनोरंजन। हमारी टीम (निर्देशक-रत्ना सिन्हा, लेखक-कमलेश पांडे) हमारे प्रस्तुत कर्ता-दीपक मुकुट, सोहम रॉक स्टार इंटरटेनमेंट सभी ने अपना पूरा प्रयास दिया है। जी म्यूजिक ने संगीत जारी किया है। कमल मुकुट साहब का स्नेह हमारे साथ है। हमारे सभी कलाकारों ने कहानी में रंग भर दिया है।  राजकुमार राव व कृति खरबंदा को देखकर आपको लगेगा कहानी उनके लिए ही थी। मैं यह फिल्म बनाकर संतुष्ट हूं।’

कैरियर की शुरूआत शून्य से करने वाले विनोद बच्चन जब गांव से मुंबई आये थे, कोई उनका रिश्तेदार तक फिल्मों में नहीं था। ना सम्बन्ध, ना पैसा, और सपने बॉलीवुड मं उड़ान भरने के…! तब उम्र भी सिर्फ 14 साल की थी! ‘मैं अमिताभ जी का फैन था। आज भी उनको भगवान का दर्जा देता हूं। बॉलीवुड में आकर सबसे पहले उनका सरनेम ‘बच्चन’ मैंने अपने नाम के साथ जोड़ लिया था।’

वह मुस्कुराते हैं। ‘आज भी मेरा नाम वैसा ही है। इंडस्ट्री का हर छोटा बड़ा काम मैंने किया ताकि यहां टिक सकूं। ईश्वर ने मेरा साथ दिया है। मेरे पिता जी तब चल बसे थे- जब मैं सात साल का था। मेरी मां मुझे चौदह साल की उम्र में ही छोड़ गई थी। यहां फिल्म लाइन में किसी को नहीं जानता था। बस, मेहनत…मेहनत…और मेहनत! आज मैं महसूस करता हूं कि अपनी मंजिल की ओर बढ़ चला हूं।’

‘शादी में जरूर आना’ टाइटल से लगता है आप सबको निमंत्रण दे रहे हैं?

वह हंसते हैं। ‘हां, मेरे यार दोस्त कहते हैं-दूसरी शादी कर रहे हो क्या? वैसे भी, फिल्म देखकर दर्शकों को शादी में होने का पूरा लुत्फ मिलेगा। जब बचपन में हम शादी के माहौल में होते थे, बड़ी उत्सुकता से सब कुछ देखते थे, वैसा ही कुछ है। 25-30 साल पहले के वे सब नजारे जो हमारी सोच से जुड़े हैं वे सब दिखेंगे।

 ‘और इस फिल्म में दिखेगा नारी जागरण का नया रूप। जो लड़के-लड़कियां  प्।ै और  च्ब्ै के सपने देखते हैं उनको यह फिल्म एक प्रेरणा देगी।’ बताते हैं..विनोद बच्चन। ‘यह प्रेम-कथा को नये नजरिये से देखने की फिल्म भी है। सिविल सर्विसेज के बारे में और उस फिल्म की पृष्ठभूमि में इस फिल्म के हीरो हीरोइन अपने प्यार की कहानी कहते हैं।’

 हीरो के रूप में राजकुमार राव का चयन न करते तो कौन हीरो होता?

– राजकुमार राव हमारी पहली और आखिरी पसंद थे। इस फिल्म की कहानी राजकुमार ने पहले ही अप्रूव करके रखी थी। फिल्म की निर्देशक रत्ना सिन्हा जी ने जब मुझे कहानी के बारे में बताया और राईटर ने स्क्रिप्ट सुनाया तब सबके मुंह में हीरो के रूप में राजकुमार का ही नाम था। उनको कहानी पहले से पसंद थी, इसलिए हमने किसी और के लिए सोचा ही नहीं। हां, हीरोइन के लिए कृति खरबंदा का चुनाव हमने 100 लड़कियों का ऑडिशन करने के बाद किया था। इस फिल्म के नायक (सत्तू उर्फ सत्येन्द्र) और नायिका (आरती) लगता है इसी रोल के लिए बने हैं जो दर्शकों को अपने आस-पास के लगते हैं?

 सुना है पहले इस कहानी का नाम कुछ और था आपने बदल दिया?

जी हां, ओरिजनल कहानी में नाम था- ‘यथा कथा प्रेम कथा’। हमने इसे लोगों की सोच के अनुरूप नाम दिया- ‘शादी में जरूर आना’। और यह निमंत्रण में आपको भी देता हूं।

 


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Sharad Rai

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