वाणी गणपति की प्यासी नदी हुई फ्लॉप

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मायापुरी अंक 42,1975

वाणी गणपति को मैं तब से जानता हूं, जब वह फिल्म ‘प्यासी नदी’ में काम कर रही थीं। मैं उन्हें एक फिल्म के लिए अनुबंध करना चाहता था, उनके पिता से मुलाकात हुई तो पैसों पर आ कर बात अटक गई। वह कुछ ज्यादा ही उम्मीद कर रहे थे।

“आपकी बेटी अभी नई है इतने पैसे कौन देगा”

मैंने कहा।

बस “प्यासी नदी” रिलीज होने की देर है सब ही देंगे। फिर मुझे बेबी के लिए कार भी तो खरीदनी है।

मेरे पास कार लेकर देने की हिम्मत नही थी इसलिए वापस चला आया। थोड़े दिनों के बाद ‘प्यासी नदी’ रिलीज़ हुई और बुरी तरह पिट गई। जिन निर्माताओं ने वाणी को साईन किया था। वह भी पीछे रह गये।

आज काफी अर्से के बाद एक निमंत्रण पत्र मिला वाणी गणपति ने अपने माता-पिता के विवाह की पच्चीसवीं सालगिरह की खुशी में बुलाया था। वहां पहुंचा तो सिवाय विक्रम के फिल्मी आदमी कम थे। रिश्तेदारों की भरमार थी। वाणी ने मुझें देखा तो फौरन मेरे पास चली आईं और बोलीं।

“नई पिक्चर कब से शुरू कर रहे हैं”

अगस्त में…!

“हमें याद रखियेगा” वाणी ने बड़े अंदाज से कहा

जरूर यह भी कोई कहने की बात है।

मैंने सफेद झूठ बोला।

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Mayapuri