INTERVIEW!! अमिताभ और जयाजी, “मेगा रोल” में – आर बाल्की

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लिपिका वर्मा    

आर बाल्की की फिल्म, “की एंड का” के ट्रेलर लांच के बाद से ही जनता मैं एक उत्सुकता देखने को मिल रही है। ट्विटर और सोशल साइट्स पर भी इस फिल्म की चर्चा लगातर बनी हुई है।

आर बाल्की की फिल्म में करीना और अर्जुन की कहानी बहुत ही उल्टी सीधी है क्योंकि इसमें अर्जुन एक हाउस हसबैंड बने हैं जबकि करीना घर के किचन को चलाने के लिए मर्दों की तरह काम करती है। करीना और अर्जुन की जोड़ी काफी ओड है पर हॉट भी

पेश है आर बाल्की (निर्देशक) के साथ बातचीत के कुछ अंश – लिपिका वर्मा के साथ

की एंड का – की स्टाइलिंग आपकी पहले की फिल्म्स शमिताभ, चीनी कम, इंग्लिश -विंग्लिश से बहुत अलग है, सो यह आपकी फिल्म जैसी नहीं लगती है ?

हँसते हुए बोले बाल्की जी “यदि आप इस फिल्म को शूटिंग के हिसाब से देख रहे हैं तो मैं आपको यह बता दूँ -चीनी कम बहुत ही ग्लैमरस फिल्म थी अपने समय की और वह फिल्म पूरी तरह से लंदन में शूट की गयी थी। जबकि ‘की एंड का’ दिल्ली में शूट की गयी है। जी हाँ ‘की एंड का’ एक पंजाबी वेडिंग से शुरू होती है सो हमें इस फिल्म में, “देसी तड़का” तो लगाना ही था। शायद इसलिए आपको ऐसा लग रहा है – लेकिन, सही मायने में यह भी मेरी ही फिल्म है भाई !!

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तो फिल्म मर्द और औरत के किरदार को उल्टा दिखला रही है ?

जी नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। दरअसल में फिल्म की कहानी शादी के बाद शुरू होती है सो शादी के बाद क्या और कैसा रिश्ता है मियां बीवी में और उनके उल्टे रोल्स की वजह से समाज को कुछ फर्क पड़ेगा ? दोनों ने यह निर्णय लिया है सो इसके बाद क्या ? उनके रिवर्स रोल से घर का माहौल कैसा होता है और वह दोनों किस तरह हर प्रॉबलम को सुलझाते हैं फिल्म इन्हीं सब मुद्दों को दर्शाती है।

यह फूड ट्रैन का आईडिया कैसे आया आपको जो हम फिल्म के टीज़र में देख पाते हैं ?

मुझे हमेशा से ऐसा शौक रहा है कि मेरे घर में भी ट्रैन द्वारा मुझे ब्रेकफास्ट मिले और खान पान की अन्य चीज़ भी मिले। लेकिन मेरी पत्नी गौरी मेरे इस आईडिया को बिल्कुल सपोर्ट नहीं करती है। पर सेट पर यह सब करने से मुझे एक अच्छी खासी किक मिली। मैंने ट्रैन फ़ूड का ख्याली पुलाव सेट्स पर बहुत एन्जॉय किया।

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आप फिल्म बनाते समय, “बजट” को ध्यान में रखते हो क्या?

बिल्कुल भी नहीं। मैं बजट के बारे में कतई भी नहीं सोचता हूँ। हालांकि मैं जब एजेंसी में काम करता था और बजट मेरे पर निर्भर होता तो कंपनी कंगाल ही हो जाती। एड कंपनी में काम करने की वजह से कम से कम मुझे प्रभावी वार्तालाप करना आ गया है। एजेंसी में काम करने हेतु मैंने खुद डायलॉग्स लिखना सिख लिया। मुझे आज भी याद है जया जी हमेशा मुझे कहती कि तुम लिखना शुरु करो, और मैं हमेशा यही सोचता कि जयाजी मुझे लिखने के लिए क्यों कह रही है ? आज जब मैं स्क्रीन प्ले डायलॉग्स और कहानी खुद लिखता हूँ तो उसे पर्दे पर हु ब हु उतारने में भी अच्छा लगता है, क्योंकि जो आपने लिखा है वह आप स्क्रीन पर सही ढंग से उतार पाओगे। स्वयं लिखने से आप अनुशासित भी हो जाते हैं।

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क्या बच्चन जी हमेशा आपकी फिल्म में होते हैं ?

जी हाँ अक्सर ऐसा ही हो जाता है। दरअसल में, शमिताभ फिल्म की रिलीज़ के बाद कुछ लोग उस फिल्म के बारे में अच्छा कमेंट करते और कुछ ने तो यह भी कह दिया, “आप चिंता न करे आपके मरने के बाद यह फिल्म चर्चित हो जाएगी ? केवल जया जी और अमितजी ने मुझे लगभग 6 रोज लगातार फोन करके कहा आप दार्शनिक  मोड में न जायें बल्कि लिखना शुरु करें। बस उनकी वजह से मैंने ‘की एंड का’ लिख डाली।

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तो अमितजी और जया जी भी हैं, “कैमियो रोल” में ‘की एंड का’ में ?

परिभाषा के हिसाब से कैमियो रोल कहा जा सकता है। जैसा रोल उन्होंने, “इंग्लिश -विंग्लिश” में किया था यह किरदार भी कुछ ऐसा ही होगा, किन्तु ‘की एंड का’ में जया जी भी उनका साथ दे रही हैं। दोनों को एक फ्रेम में देखना अत्यंत सुखमय और बेहतरीन लगता है।

कुछ हंस कर बोले, “यदि आप एक दिन का शूट करते हैं तो वह, ” कैमियो” कहलाता है और यदि 10 दिन हो तो, “स्पेशल अपीयरेंस” कहलाता है और यदि 20 दिन का शूट हो तो मेगा रोल कहलाता है।”

 

 


Mayapuri