मूवी रिव्यू: इतिहास की ढकी परतें खोलती है ‘रागदेश’

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हासिल, चरस, साहब बीवी और गैंगस्टर तथा पान सिंह जैसी उत्कृष्ठ फिल्मों के रचियता लेखक निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने इस बार पटरी से थोड़ा उतरते हुये पीरियड फिल्म ‘रागदेश’ का निर्देशन किया। राज्य सभा टीवी द्धारा निर्मित ये फिल्म 1945 के फेमस रेड फोर्ट केस पर आधारित ऐसी फिल्म है जिसमें आजादी से पहले के एक ऐसे अध्याय को दर्शाया है, जिसके बारे में लोगों की जानकारी न के बराबर है।

राग देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज के उन तीन अफसरों पर केंद्रित है, जिन्हें देश द्रौह के आरोप में अंग्रेज सरकार फांसी पर लटका देना चाहती थी। लेकिन उस दौर के मशहूर एडवोकेट भूला भाई देसाई के जबरदस्त दलीलों और जनता के आक्रौश के चलते उन्हें मजबूरन बरी कर देना पड़ा था। आजाद हिन्द के सिपाही शहनवाज खान यानि कुणाल कपूर, गुरबख्श सिंह ढिल्लों यानि अमित साध तथा प्रेम सहगल यानि मोहित मारवाह जो दूसरे महायुद्ध में अंगेजों के खिलाफ जापानी सेना के साथ मिल कर लड़े थे। बाद में अंग्रेजी सरकार ने इन तीन अफसरों पर कत्ल और देश द्रौह का मुकदमा चलाया लेकिन उस वक्त देश के सबसे काबिल वकील भूला भाई देसाई यानि केनी देसाई की जबरदस्त पैरवी और जनता के दबाव में आकर अग्रेंजी सरकार को उन तीनों को बरी करना पड़ा था। शायद उस केस में हुई किरकिरी के तहत उन्होंने इस घटना को इतिहास में दर्ज नहीं होने दिया।

राज्य सभा टीवी के सीईओ गुरदीप सिंह सप्पल के अनुसार राज्य सभा टीवी ने साल में दो तीन पीरियड फिल्में बनाने का निश्चय किया तो इस फिल्म के लिये उन्होंने तिग्मांशु धूलिया जैसे नेशनल अवार्ड विनर डायरेक्टर का चयन किया। इसके बाद बाकायदा इस विषय को लेकर रिसर्च हुआ तो जो सामने आया वो ये था कि अपने पुरखों द्धारा उपहार में मिली जिस आजादी को हम आसान समझ लेते हैं लेकिन उस आजादी को हासिल करने के लिये नामचीन शहीदों के अलावा आजाद हिन्द फौज के करीब छब्बीस हजार सिपाही मारे गये थे। ये सब सुनने में बहुत ही भयानक लगता है। फिल्म में युद्ध के दृश्य और ब्रिटिश, जापानी भाषा और कास्ट्यूम पर काफी काम किया है। फिल्म में बाकायदा इतिहास को तारीख और समय के साथ बताया गया है। दुख की बात ये है कि जो अपनी मातृभमि के लिये मर मिटे,उन शहीदों को कोई नहीं जानता। कहने को तो ये नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज की कहानी है लेकिन इसे आप उनकी बायोपिक नहीं कह सकते। फिल्म कहती है कि अगर आपको इतिहास की जानकारी नहीं है तो जो इतिहास में गलतियां हुई हैं वही आगे चलकर आप भी करोगे। म्यूजिक की बात की जाये तो फिल्म में बार बार सुना जाने वाला गीत‘कदम कदम बढ़ाये जा’ जोश पैदा करता है।

तीनों प्रमुख किरदारों में मोहित मारवाह, अमित साध तथा कुणाल कपूर ने बहुत अच्छा काम किया है लेकिन सुभाष चंद्र बोस के किरदार में केनी बासुमतारी बहुत सटीक लगे है उन्होंने बहुत सुंदर काम किया है। इनके अलावा केनी देसाई तथा लक्ष्मी नामक किरदार निभाने वाली अभिनेत्री भी अपनी भूमिका में प्रभावित करती है।

इतिहास की अंजानी घटना के बारे में जानने के लिये फिल्म देखी जा सकती है।


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Mayapuri

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