फिल्म चक्कर पे चक्कर की शूटिंग रिपोर्ट

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murad

 

मायापुरी अंक 50,1975

सप्ताह भर का समय! इस बीच मैं अपने पाठकों से बहुत दूर रहता हूं यह दूरी मुझे बहुत खलती है। लेकिन न तो आप ही कुछ कर सकते हैं और न ही मैं खैर…

आइए, चलते हैं शूटिंग देखने…यह-वहां चारो ओर गिद्ध की नजर दौड़ाने के बाद पता चला कि नटराज स्टूडियो में ‘चक्कर पे चक्कर’ कीशूटिंग चल रही है। तो चलिए इसी फिल्म का लुत्फ उठाया जाये। देखें सेट पर कौन-कौन है?

अरे यह तो शशिकपूर हैं और वह रहे रजा मुराद। और डायरेक्टर अशोक राय भी मौजूद हैं।

एक असिस्टेंट डायरेक्टर ने बताया कि इस फिल्म में शशि कपूर सचमुच फिल्मी जगत के मशहूर हीरो रवि कुमार का रोल निभा रहे हैं और रजा़ मुराद मशहूर डायरेक्टर मनी बाबू हैं। इसी बीच स्टार्ट, साउंड, लाइट आदि की आवज के साथ शूटिंग आरंभ हो गयी।

रजा मुराद और शशि कपूर आमने सामने बैठे हैं। शशि शराब का लुत्फ उठा रहे हैं और रजा उनसे कह रहे हैं (एक फाइल दिखलाते हुए)

मिस्टर रवि कुमार, यह फाइल देख रहे हैं। इन कागजों के पुर्जो में मेरे बरसों की मेहनत, मेरे आज तक के तजुर्बो का निचोड़, मेरी आशाएं मेरी उमंगे, सब कुछ सिमट कर इस कहानी के शब्दों में ढल गये हैं। यह कहानी नहीं मेरा दिल है यह सुनकर शराब का एक घूंट पीते हुए हीरो के अंदाज में शशि कहते हैं,

मुझे आपके दिल से कुछ लेना देना नहीं है। मैं तो यह जानना चाहता हूं कि कहानी क्या है? मेरा रोल क्या है? आपके इस दिल में मैं कहा हूं? बताइए कहानी क्या है?

यह सुनकर रजा मुराद कहानी सुनाते हैं यह कहानी उन खुदगर्ज लोगों की है जो अपने स्वार्थ के लिए अपने देश का खून चूसने से भी बाज नहीं आते एक-एक सीन में मैंने उनके काले कारनामों का पर्दाफाश किया है कि किस तरह वे स्मगलिंग करते हैं किस तरह कानून को धोखा देते हैं और किस तरह उन लोगों को खामोशी से मौत के घाट उतार देते हैं, जो उनके रास्ते में रूकावट बनने की कोशिश करते हैं। (फिर रजा फाइल खोलते हुए) देखिए सीन नंबर नाइट का सीन ड्राइंग रूम बिल्कुल ऐसा ही कमरा है रवि। ऐसी ही व्हिस्की की महफिल, ऐसा ही सोफा सेट और ऐसी ही तूफानी रात। जोर से बिजली चमकती है।

रजा का वाक्य पूरा होतेही सचमुच बाहर बिजली चमकती है। रजा आगे कहते हैं,

बारिश होने लगती है।

और सचमुच बारिश शुरू हो गयी। रजा आगे कहते हैं,

ठीक जिस जगह तुम बैठे हो। एक खतरनाक किस्म का स्मगलर बैठा हुआ है, जो खूनी भी है। और ठीक उसके सामने, जहां मैं बैठा हूं, एक और इंसान बैठा है, एक ऐसी हस्ती, जिसने यह कसम खाई है कि वह इन काले धंधे करने वालों का मुंह काला करके रहेगा। लेकिन आज अनजाने में वो इन कातिलों के जाल में फंस चुका है। वह अच्छी तरह जानता है कि उसकी जिंदगी खतरे में है, फिर भी उसके दिल में साहस है। और वह अपनी मौत का मुकाबला करने के लिए बिल्कुल तैयार है। तभी अचानक एक खतरनाक साया खिड़की के पीछे से उभरता है। ठीक उस शरीफ इंसान के पीछे एक खतरनाक शैतान का साया, जिसके हाथ में चाकू है।

और सचमुच खिड़की से एक साया शशि कपूर को नजर आते हैं जिसके हाथ में एक चमकदार चाकू है। शशि कपूर यह समझते हैं कि डायरेक्टर ने सीन को प्रभावशाली बनाने के लिए विद एक्शन सीन समझा कर बता रहे हैं।

रजा ने आगे कहा,

और इससे पहले कि वह शरीफ इंसान अपने सामने बैठे स्मगलर की धज्जियां उड़ा दे (रजा खड़ा हो जाता है, फिर कहता है) और दूसरे ही लहमे जानते हैं क्या होता है?…

रजा का वाक्य अभी पूरा ही नही हुआ था कि उनके पीछेवाले डायरेक्टर मनी बाबू को चाकू मार देता है। वह लपककर रजा के करीब आता है और चाकू निकालने की कोशिश करता है, मनी बाबू मनी बाबू….

और तभी एक साथ कई फ्लैश लाइटें चमक उठती हैं… कोई शशि यानी हीरो रवि कुमार की फोटो ले लेता है…

और इसके साथ ही सीन ओ.के हो जाता है।

हमें डायरेक्टर अशोक रॉय पर बड़ा गुस्सा आया। हमने उनसे पूछा,

इसके आगे क्या होता है?

तो मुस्कुराते हुए वे बोले,

इसके आगे आप अपने शहर के विशाल थियेटर के विशाल पर्दे पर देखियेगा।

और दोस्तो

रजा मुराद के शानदार अभिनय के लिए हम उन्हें धन्यवाद देना न भूले और फिर हम चुपचाप लौट आए।


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Mayapuri

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