‘‘चार्ली चैपलीन की जन्मदिन पर 55 फिट लंबा ‘एंटी कोरोना मास्क’ की प्रदर्शनी करने जा रहा हूँ..’’ राजन कुमार

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चार्ली चैपलीन की भाव भंगिमाओं और उनकी अभिनय शैली को अपने करियर की पतवार बनाने वाले अभिनेता राजन कुमार हर वर्ष 16 अप्रैल को चार्ली चैपलीन के जन्मदिन को यादगार बनाने व नए रिकॉर्ड को स्थापित करने में अपनी तरफ से कोई कोर कसर बाकी नहीं रखते हैं. इस वर्ष भी 16 अप्रैल को वह कुछ अनूठा करने जा रहे हैं.अंतर्राष्ट्रीय जगत में ‘चार्ली चैपलीन द्वितीय’ के रूप में मशहूर अभिनेता राजन कुमार अब तक तीन तीन बार भारतीय राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री द्वारा भी सम्मानित हो चुके हैं. अब तक देश विदेश मंे पांच हजार ग्यारह शो कर चुके हैं. 15000 से अधिक घंटों का शो बनाने का रिकॉर्ड स्थापित किया है. गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, छाउ नृत्य के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, इंडियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं. तो वहीं वह अब तक ‘शहर मसीहा नहीं’, ‘जुनूनी मर्डर’, ‘नमस्ते बिहार’, ‘चार मुलाकातें’, ‘रफ्फूचक्कर’ जैसी फिल्मों के अलावा ‘हवाएं’, ‘हीरो’, ‘लापता गंज’, ‘चिड़ियाघर’ व सीआई डी जैसे सीरियलों में भी अभिनय कर चुके हैं। – शान्तिस्वरुप त्रिपाठी

  अमर वत्स निर्देशित फिल्म ‘शहर मसीहा नहीं’ में राजन कुमार ने मुख्य भूमिका निभायी थी. इस फिल्म में बिहार की प्रतिभाओं की उपेक्षा और उनके उपहास को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कई ज्वलंत सवाल उठाए गए थे।
प्रस्तुत है राजन कुमार से हुई एक्सक्लूसिव बातचीत के अंश…

अपनी अब तक की यात्रा पर रोषनी डालेंगें?

– मेरी पैदाइश 1979 में बंबर गॉंव, मंुगेर, बिहार की है. मेरी अब तक की यात्रा बहुत खूबसूरत रही. बचपन मंे ही फिल्म देखते देखते अभिनय के प्रति रूझान पैदा हुआ था. फिल्म में हीरो बनने का सपना लेकर मंुबई आया था. लगातार मेहनत करता रहा.मुझे बचपन के वह दिन याद हैं, जब मैं गाँव मंे बंदर को मदारी के इशारे पर नौटंकी करते हुए देखता था, तब मेरे अंदर यही भाव आता था कि मुझे भी अभिनय में दिलचस्पी लेना होगा. मेरे लिए वह प्रेरणा का स्रोत रहा।

मेरे परिवार में फिल्मों या अभिनय का कोई माहौल नहीं था. इसलिए 1995 में मैं घर से भागकर मंुबई पहुॅच गया था. काफी संघर्ष करना पड़ा. पर 1998 मंे जब मुझे ‘झाउ नृत्य’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, तो मेरा हौसला बढ़ गया. गुरू भी अच्छे मिलते गए. मैंने मंुबई मंे पं.सत्यदेव दुबे के साथ नाटकांे में अभिनय किया. फिर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के लिए मेरा चयन हो गया. तीन साल की ट्रेनिंग ली. फिर मुझे टीवी सीरियल ‘‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’’ के 14 एपीसोड में अपराधियांे के किरदार निभाने का मौका मिला. हर एपीसोड एक अलग अपराधी की कहानी होती थी. मैंने ‘‘क्या होगा निम्मो का’’, ‘‘ये हवाएं’’, ‘‘लापतागंज’’, ‘‘चिड़ियाघर’’, ‘‘हम हैं आपके इन लॉ’’ सहित कई सीरियलों में अभिनय किया.रविकिशन के साथ भोजपुरी फिल्म ‘‘बांके बिहारी एमएलए’’ तथा हिंदी फिल्म ‘‘रफू चक्कर’’ में अभिनय किया. इसके बाद मैंनेे फिल्म ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ में बतौर हीरो अभिनय किया. मैंने हॉलीवुड स्टाइल में बनायी गयी लघु फिल्म ‘‘बबलगम’’ भी की है, जिसने कॉन फिल्म फेस्टिवल व बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में धूम मचायी थी. इसके बाद मेरी अभिनय की गाड़ी सरपट दौड़ती चली गयी. अब तो मैं कार्यक्रमों का मंच संचालन भी कर रहा हँू. हाल ही में मैंने एक बड़े पुरस्कार समारोह का संचालन किया, जहां कई बड़ी हस्तियां मौजूद थी, जिन्होंने मेरा हौसला आफजाई किया. लोगों ने कहा कि मैंने स्टेज के क्राफ्ट को बहुत बेहतर ढंग से समझा है. मैंने बच्चों के लिए एक किताब ‘हंसता बचपन’ लिखी थी।

आपको ‘‘चार्ली चैपलीन द्वितीय’’ क्यों कहा जाता है?

– जब मैं स्ट्रगल कर रहा था, उन्हीं दिनांे दिल्ली मंे एक दिन मुझसे मेरे एक मित्र ने कहा कि कुछ नाटकीय अंदाज मंे नए खुलने वाले होटल के पम्पलेट लोगों के बीच बांॅट दो, तो कुछ पैसे मिलेंगे.उससे बात करते करते अचानक मेरे दिमाग में चार्ली चैपलिन की तस्वीर घूम गयी.जो कि कई साल पहले मैंने एक बाल पत्रिका में देखी थी. मैंने कहा कि क्या मैं चार्ली चैपलिन बनकर पम्पलेट वितरित करुं. वह राजी हो गया. फिर मैं सड़क के बीच बने सिग्नल पर खड़े होकर चार्ली की पोशाक में ही उनका मनोरंजन करता. लोग हाथ मिलाते, कुछ लोग अपना विजिंिटंग कार्ड यह कहकर दे जाते थे कि हमें फोन करना हम आपको समारोह में बुलाएंगे. इस तरह चार्ली के रूप मंे यात्रा शुरू हुई थी, जो कि पिछले 20 वर्षों से अनवरत चली आ रही है. चार्ली चैपलीन के किरदार को निभाते हुए 15 हजार घ्ंाटे पूरे कर लेेने का मैंने  एक विश्व रिकॉर्ड बना डाला है. पांच हजार ग्यारह शो हो चुके हैं. मैं लोगों की आंखांे में आंखें डालकर उन्हें अहसास दिला देता हूं कि आज भी चार्ली चैपलीन जिंदा है. मेरे शो में लोग हंसने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

आज आप जिस मुकाम पर है, उसका श्रेय किसे देते हैं?

– जड़ों से जुडे़ रहने को. मेरी शुरू से ही जड़ांें से जुड़कर काम करने में रूचि रही है. इसलिए मैं गांव में या आदिवासी इलाके में जाकर काफी काम करता रहता हूं. आदिवासी इलाकों में जाकर मैंने वहां के नृत्यों को सीखा. सोहराई नृत्य सीखा. मैं हर साल चदं्रशेखर आजाद के जन्मस्थान झबुआ जाता हूं. वहां जाकर आदि वासीयों के लिए काम करता हंू.इसी वजह से मैंने छाउ नृत्य भी सीखा. यदि इन सारी चीजों से मुझे लगाव नहीं होता, तो मैं ‘चार्ली चैपलीन द्वितीय’’के रूप में मशहूर नहीं होता.‘लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड;, ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में मेरा नाम दर्ज ना होता. मुझे ‘चार्ली चैपलीन द्वितीय’के रूप में स्थापित करने में छाउ नृत्य का बहुत बड़ा योगदान है।

कोरोना काल में कुछ नया किया है?

– कोरोना की आपदा के दौरान हमने अपनी तरफ से लोगों की मदद करने की काफी कोशिश की है.इसके अलावा सत्य घटनाक्रम पर रोड सेफ्टी को मद्देनजर एक लघु फिल्म ‘‘लहरिया कट’’ भी बनायी है. यह मुंगेर (बिहार) में घटी एक सत्य घटना पर आधारित आठ मिनट की फिल्म है, जिसका निर्देशन शशिकांत गुप्ता ने किया है. इस लघु फिल्म के गीतकार संजीव व राकेश, संगीतकार बी पारस, संवाद लेखक गाजी मोइन, और डीओपी आकाश गुप्ता है. इसका कॉसेप्ट मेरा है और इसमें नेहा शर्मा, राजन कुमार, मेघा, निशु, संजीव कुमार, संगम, राजवीर सिंह, राहुल कुमार, सानिया और प्रियंका आदि ने अभिनय किया है.वास्तव में यह कहानी सड़क दुर्घटना में मुंगेर (बिहार) में रहने वाली एक 45 वर्षीय महिला अंजना कुमारी की है, जिनकी जान समुचित चिकित्सा करवा कर हमने बचाई थी. इसके एवज में हमें मुंगेर (बिहार) के जिलाधिकारी द्वारा ‘ए गुड समारिटन‘ अवॉर्ड से नवाजा गया था।

इस फिल्म में कुछ संदेष भी होगा?

– जी हॉ! हमारे देश में मोटर साइकिल से होने वाले हादसों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है और इसमें लहरों की तरह बाइक चलाने वाले जिम्मेदार होते हैं. ऐसे ही बाइकर्स छोटे शहरों में लहरिया कट दिखाने वाले युवा कहलाते हैं, जो अपने साथ साथ राहगीरों की जिंदगी भी खतरे में डाल दिया करते हैं. शॉर्ट फिल्म ‘लहरिया कट‘ ऐसे ही बाइकर्स को एक संदेश देने के लिए बनाई गई है. इस फिल्म के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि किसी भी तरह के सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत मेडिकल हेल्प मिलनी चाहिए ताकि उसकी जिंदगी बच जाए।

इस वर्ष चार्ली चैपलीन के जन्मदिन पर ?

– जी हां! 16 अप्रैल को चार्ली चैपलीन का जन्मदिन थी। मैं पिछले कई वर्षों से लगातार ‘चार्ली चैपलीन फेस्टिवल’ का आयोजन मंुबई में करते आए हैं. लेकिन पिछले वर्ष कोरोना की वजह से मुंबई की बजाय हमने इसे अपने गांव में नीम का पेड़ लगाकर सेलीब्रेट किया था. हम सभी जानते हैं कि नीम में कई रोगो को दूर करने की शक्ति होती है. इस वर्ष हम मंुबई में चार्ली चैपलीन की जयंती के अवसर पर कोरोना के प्रति जागरूकता पैदा करने वाला एक ऐसा कार्यक्रम किया, जिससे कोरोना के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ ही एक नया विश्व रिकॉर्ड भी कायम हो. इस दिन हमने खादी का बना हुआ पचपन फीट लंबा ‘‘एंटी कोरोना मास्क’’ का आम लोगों के लिए सामाजिक दूरी के साथ प्रदर्शित किया. जिससे लोगों तक यह संदेश जाए कि कोरोना से बचने के लिए मास्क बहुत जरुरी है. इसमें चार्ली की तस्वीर भी बनी हुई थी।

आप अक्सर अपनी फिल्म ‘नमस्ते बिहार’ की चर्चा करते रहते हैं. इसकी कोई खास वजह?

– मैं बिहार पुत्र हॅू, इसलिए मेेरे लिए फिल्म ‘‘नमस्ते बिहार’’ काफी मायने रखती है, जिसे आज भी कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है.‘शहर मसीहा’के बाद यह सर्वाधिक सफल फिल्म रही है. इसे मंुबई के सिंगल सिनेमाघरों व मल्टीप्लैक्स में भी काफी पसंद किया गया था. दो घ्ंाटे आठ मिनट की इस फिल्म में मेरी टैग लाइन रही है- ‘‘विद्या, धर्म, दर्शन और मोक्ष का बिहार, नमस्ते बिहार..’’


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Mayapuri

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