बात राजेन्द्र कुमार की

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kanoon_rajendrakumar

 

मायापुरी अंक 2.1974

बात तब की है जब राजेन्द्र कुमार सभी का प्यारा और दुलारा कलाकार थे। उनकी हर फिल्म हिट होती थी और वह सिल्वर जुबली कलाकार कहलाते थे। राजेन्द्र कुमार के लिए दर्शक अपनी पलकें बिछाए रहते थे। उनकी प्रत्येक फिल्म के प्रीमियर पर एक भारी हंगामा होता था। लगता था बस एक राजेन्द्र कुमार ही है फिल्म इंडस्ट्री में जो कयामत बन छा गए है।

शूटिंग के समय राजेन्द्र कुमार पत्रकारों को सैट से बाहर निकलवा देते थे। उनके नखरे बर्दाश्त करने मुश्किल थे। फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के प्रीमियर पर जब राजेन्द्र कुमार दिल्ली आये थे तो एक पत्रकार सारा दिन उसे होटल की लॉबी से फोन करता रहा और आग्रह करता रहा कि वह उससे मिलना चाहता है मगर राजेन्द्र कुमार ने मिलने का समय नही दिया। हर बार राजेन्द्र की पत्नि ने फोन पर बुरी तरह पत्रकार को झिड़क दिया। शाम को जब सब लोग तैयार होकर ‘मेरा नाम जोकर’ के विशेष शो में विज्ञान भवन जाने लगे तो उस पत्रकार ने फिर राजेन्द्र से प्रार्थना की कि उसे राजेन्द्र से सिर्फ दो मिनट चाहिए मगर राजेन्द्र साहब के नखरे तो लिए दिए नही जा रहे थे। उनका जमाना था, उस समय गुड्डी आसमान पर थी मगर आज सब जानते है कि राजेन्द्र बहुत पीछे रह गये है। उनके पास न तो अधिक फिल्में है और न ही इतना उनका सम्मान है। अतीत की यादें रह-रह कर उसे कुरेदती रहती है राजेन्द्र को अब यह भी महसूस होता है कि उसने मिथ्या गर्व किया था। उसे अपने बीते हुए कल का पूर्ण अहसास है।

आज राजेन्द्र सभी से प्रेम से मिलते है। पत्रकारों के प्रति उसके मन में आदर की भावना है। अब अपनी गलती को स्वीकार करने में उन्हें कोई संकोच नही होता। देर से ही सही मगर अपनी गलती को स्वीकार करने वाले कम लोग होते है और राजेन्द्र कुमार ऐसे लोगों में से है।


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Mayapuri

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