कहानी लिखने में राजेन्द्र सिंह बेदी का कोई सानी नही

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abcd

 

मायापुरी अंक 12.1974

कहानी की चर्चा चली तो राजेन्द्र सिहं बेदी का नाम जरूर आएगा। कहानी लिखने में वह अपना सानी नही रखते। उनका दोष यही है कि वह फिल्म बनाते समय भी अपनी कहानी में बॉक्स ऑफिस वाला मिर्ची मसाला नही भरते। बेदी ने गरम कोट’ बनाई, पिट गई. ‘लालटेन’ बनाई तो फ्लॉप इस पर उनका लड़का नरेन्द्र बेदी बोला-पिता जी, आप पीछे हट जाइये। फिल्मी कहानी लिखना आपके बस का नही है। मैं एक कहानी लिखता हूं इस कहानी मै आप कुछ मत कीजिएगा वरना मैं साफ-साफ बताए देता हू, फिल्म फिर पिट जाएगी।

बेचारे राजेन्द्र सिंह बेदी चुपचाप सहमत हो गये. नरेन्द्र बेदी ने अंग्रेजी की दो-तीन फिल्में देखी और सबको मिलाकर ‘जवानी दीवानी’ की कहानी तैयार की। जब फिल्म बन रही थी तो राजेन्द्र सिंह बेदी मिलने वालों के सामने बड़बड़ाया करते थे यह लड़का मेरा नाम डुबाकर रहेगा। नरेन्द्र बेदी बिना परवाह किये अपनी फिल्म बनाये गया जवानी दीवानी हिट हो गई और नरेन्द्र बेदी एक सफल डायरेक्टर बन गया शर्म की मार देखिये, राजेन्द्र सिंह बेदी की ‘दस्तक’ और ‘फागुन’ अच्छी फिल्में होने के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर पिटी और नरेन्द्र बेदी आज भी सफल डायरेक्टर है।

राजेन्द्र सिंह बेदी में गजब का सेंस आफ ह्रयूमर है. ‘दस्तक’ की शूटिंग चल रही थी। कोई परिचित राजेन्द्र सिंह बेदी से मिलने आये। उन साहब ने सिगरेट सुलगाई तो पास बैठी रेहाना सुल्तान को भी ऑफर की। रेहाना ने कहा “नो थैंक्स मैं स्मोक नही करती

राजेन्द्र सिंह बेदी ने बड़े प्रेम से समझाया-“रेहाना, ये अपने खास मिलने वाले है। इनके सामने सिगरेट पीने में कोई हर्ज नही

रेहाना का चेहरा देखते ही बनता था।


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Mayapuri

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